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Warren Buffett
निवेशकों को असली फायदा वर्तमान में हुए विकास से होगा, अतीत में हुए विकास से नहीं।
आईटी और फार्मा सेक्टर में अच्छे अवसर

 नीति


आजकल की अनिश्चितता और अस्थिरता के माहौल में खुदरा निवेशकों को स्टॉक स्पेसिफिक अप्रोच पर चलते हुए निवेश भी अपनी जोखिम सहनशीलता के अनुसार करना चाहिए


शेयरों का चयन करते समय कंपनी के कारोबार का विस्तार, रिटर्न रेशियो, नकदी सृजन क्षमता, बैलेंस शीट की मजबूती, प्रबंधन व कॉरपोरेट गवर्नेंस की गुणवत्ता को आधार बनाना चाहिए


सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू बैंकों) की वैल्यूएशन में आने वाली तिमाहियों में बढ़ोतरी हो सकती है बशर्ते कि इनका एनपीए प्रोफाइल कम हो जाए


इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर व रियल एस्टेट जैसे सेक्टर भी निवेशकों को लाभ पहुंचा सकते हैं बशर्ते कि इनमें नीतिगत मुद्दों पर स्पष्टता आए तथा ब्याज दरों में रिवर्सल का माहौल बने


फंडामेंटल रुप से मजबूत अच्छी कंपनियां अल्पावधि की अस्थिरता के बावजूद लंबी अवधि में अच्छा प्रदर्शन करती हैं


आईटी व फार्मा सेक्टर के लगातार अच्छा करने की संभावना है। फार्मा सेक्टर में एक्सपोर्ट के भी अच्छे अवसर दिखते हैं कि आने वाले दिनों में एक बड़ी संख्या में दवाएं ऑफ पेटेंट हो रही हैं


मौजूदा बाजार परिस्थितियों में अगर अगर कोई हमसे यह पूछे कि रिटेल निवेशकों के लिए क्या अवसर हैं तो इस बारे में मेरा जबाव होगा कि फिलहाल बाजार में मूल्य ठीक-ठाक हैं।


कमाई के मोर्चे पर एबिटा मार्जिन बॉटम्ड आउट हैं तो इसकी वजह यूएस फिस्कल क्लिफ, भारतीय बजट व नीतिगत सुधारों पर चल रही अनिश्चितता है ओर यही वजह है कि शेयर बाजार अस्थिरता के मूड में है। देश की जीडीपी में वित्त वर्ष 2013 की दूसरी तिमाही में 5.3 फीसदी की वृद्धि दर रही।


हालांकि, निजी खपत व फिक्स्ड इंवेस्टमेंट में महत्वपूर्ण गिरावट आई, निजी खपत जहां वर्षानुवर्षी आधार पर 3.7 फीसदी बढ़ी वहीं फिक्स्ड इंवेस्टमेंट में वर्षानुवर्षी आधार पर 8.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। ठीक इसी अवधि में सार्वजनिक खपत में 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और इसने वर्षानुवर्षी आधार पर 8.7 फीसदी का लक्ष्य हासिल किया। इससे पता चलता है कि मांग की तरफ की तस्वीर धुंधली है और जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में वृद्धि को सरकार की खर्च योजना का समर्थन हासिल है।


क्रिसिल रिसर्च में हमने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की 92 फीसदी बाजार पूंजीकरण पर काबिज 732 सार्वजनिक कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों व बैंकों को छोड़कर की कॉरपोरेट अर्निंग का विश्लेषण किया। इससे हमें यह पता चला कि इन कंपनियों की सम्मिलित टॉपलाइन वर्षानुवर्षी आधार पर 12.2 फीसदी बढी़ है जबकि मांग की हालत अच्छी नहीं थी। ठीक इसी अवधि में मार्जिन में 14 बीपीएस (आधार अंकों) का सुधार हुआ जिससे पता चलता है कि मार्जिन पर दबाव घट रहा है।


अब बात यह आती है कि निवेशक किन कंपनियों में निवेश करें तथा आज के माहौल में उनकी रणनीति क्या होनी चाहिए। मेरा इस बारे में मानना यह है कि आजकल की अनिश्चितता और अस्थिरता के माहौल में खुदरा निवेशकों को स्टॉक स्पेसिफिक अप्रोच पर चलते हुए निवेश भी अपनी जोखिम सहनशीलता के अनुसार करना चाहिए। मेरी सलाह यह है कि जब आप स्टॉक का चयन करें तो कंपनी के कारोबार का विस्तार, रिटर्न रेशियो, नकदी सृजन क्षमता, बैलेंस शीट की मजबूती, प्रबंधन व कॉरपोरेट गवर्नेंस की गुणवत्ता को आधार बनाएं।


आम तौर पर फंडामेंटली अच्छी कंपनियां अल्पावधि की अस्थिरता के बावजूद लंबी अवधि में अच्छा प्रदर्शन करती हैं। जहां तक बात निवेश लायक सेक्टरों की बात है तो आईटी व फार्मा सेक्टर के लगातार अच्छा करने की संभावना है। फार्मा सेक्टर में एक्सपोर्ट के भी अच्छे अवसर दिखते हैं कि आने वाले दिनों में एक बड़ी संख्या में दवाएं ऑफ पेटेंट हो रही हैं।


इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर व रियल एस्टेट जैसे सेक्टर भी निवेशकों को लाभ पहुंचा सकते हैं बशर्ते कि इनमें नीतिगत मुद्दों पर स्पष्टता आए तथा ब्याज दरों में रिवर्सल का माहौल बने। इन सेक्टरों में एक मुद्दा जो सबसे महत्वपूर्ण है वह यह है कि परियोजनाओं में देरी के चलते कंपनियों के कार्यशील पूंजी दिवसों में बढ़ोतरी आई है। जहां तक नीतिगत मुद्दों की बात है तो जमीन अधिग्रहण, खनन अधिकार, कोयले की उपलब्धता आदि से इन सेक्टरों में डाउनट्रेंड का माहौल बनने की संभावना नजर आती है।


इसी तरह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू बैंकों) की वैल्यूएशन में आने वाली तिमाहियों में बढ़ोतरी हो सकती है बशर्ते कि इनका एनपीए प्रोफाइल कम हो जाए। वित्त वर्ष 2013 की दूसरी तिमाही में पीएसयू बैंकों के ग्रॉस एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों) में 40 बीपीएस की गिरावट दर्ज की थी।


हम यहां पर यह तथ्य साफ कर देना चाहते हैं कि इन सेक्टरों में बदलाव की संभावना है बशर्ते कि सरकार की ओर से नीतिगत मुद्दों पर स्पष्टता आए तथा ब्याज दरों में रिवर्सल का माहौल बने। जबकि आईटी व फार्मा सेक्टर के लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना है और इनमें अच्छे अवसर हैं लिहाजा इनमें निवेशकों को फंडामेंटली स्ट्रांग कंपनियों यानी कि स्ट्रांग बिजनेस मॉड्यूल व बेहतरीन बैलेंस शीट तथा सामथ्र्यवान प्रबंधन टीम वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहिए।


ऐसी ही एक कंपनी, क्रिसिल इक्विटी रिसर्च द्वारा फंडामेंटली सुपीरियर ग्रेड-4/5 दी गई एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट है। क्रिसिल रिसर्च ने इसको 55 रुपये की फेयर वैल्यू दी है। मजबूत शोध व विकास, तकनीकी रूप से क्षमतावान व अपने समकक्षों से बेहतर यह कंपनी रक्षा व अंतरिक्ष संगठनों के लिए उप-प्रणालियों की डिजाइन, विकास व निर्माण करती है। हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 13 की अर्निंग में यह कंपनी 11 फीसदी वृद्धि दर्ज कर सकती है।


हमारा भरोसा है कि एस्ट्रा का लांग टर्म प्रॉस्पेक्ट्स मजबूत है। हालांकि बढ़ती प्रतिस्पर्धा व अस्थिर कमाई प्रमुख जोखिमों में शामिल है। एक और ऐसी ही एक कंपनी है दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड। क्रिसिल इक्विटी रिसर्च द्वारा इसे भी फंडामेंटली सुपीरियर ग्रेड-4/5 प्रदान की गई है। दीवान को क्रिसिल इक्विटी रिसर्च ने प्रति शेयर 276 रुपए की फेयर वैल्यू दी है। दीवान, एचडीएफसी और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है।


यह प्रमुख रुप से पश्चिमी व दक्षिणी भारत के 437 स्थानों के टियर 2 व टियर 3 शहरों में निम्न व मध्यम आय वर्गों को आवास कर्ज उपलब्ध कराती है। कंपनी ने पिछले पांच सालों में बेहतरीन विकास किया है। इसकी एकीकृत लोन बुक पांच वर्षीय सीएजीआर पर 52 फीसदी बढ़कर 52 अरब रुपये पहुंच गई है जबकि इस उद्योग की बढ़त 16 फीसदी सीएजीआर ही है। हमारा मानना है कि अच्छी परिसंपत्ति वाले दीवान में निवेश से निवेशकों को फायदा होने की उम्मीद है।


मोहित मोदी डायरेक्टर-इक्विटी रिसर्च क्रिसिल रिसर्च

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