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Ludwig von Mises
फायदा सफल कदमों का भुगतान है,जिसे बिना मूल्यांकन के बताया नहीं जा सकता।
ऑयल स्टॉक्स ने जलाई उम्मीदों की बाती

आकलन - जनवरी की पहली तारीख से खर्च में कटौती व टैक्स में बढ़ोतरी शुरू होने से पहले ही फिस्कल क्लिफ पर चल रही बातचीत के किसी नतीजे पर पहुंच जाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इससे एशियाई बाजारों में तेजी दिखी है। - अमर अंबानी, रिसर्च प्रमुख, आईआईएफएल

घरेलू शेयर बाजार के लिए वर्ष का आखिरी शुक्रवार ऑयल स्टॉक्स के नाम रहा। गुरुवार को सरकार ने डीजल व कैरोसिन के दाम में 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की जो संभावना जताई, उसने बांबे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) व नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के स्टॉक्स को नई दिशा दी।


इसके दम पर बीएसई का 30-शेयरों वाला सेंसेक्स कारोबार के आखिर में 121.04 अंक यानी 0.63 फीसदी की बढ़ोतरी हासिल की।इस बढ़ोतरी के साथ सेंसेक्स 19,444.84 अंक के स्तर पर बंद हुआ, जो इस सप्ताह का इसका उच्च स्तर है। एनएसई के 50-शेयरों वाले निफ्टी में भी 38.25 अंक यानी 0.65 फीसदी का सुधार हुआ, जिसके बाद यह 5,908.35 अंक के स्तर पर बंद हुआ।


ब्रोकरों का कहना था कि सरकार ने सब्सिडी घटाने के लिए डीजल के दाम में चरणबद्ध तरीके से जिस बढ़ोतरी की बात कही है, उसने निवेशकों में ऑयल स्टॉक्स के प्रति उम्मीद एक बार फिर बढ़ा दी है।इसी वजह से रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) तथा भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) जैसे स्टॉक्स में शुक्रवार को निवेशकों का तांता लगा।


गुरुवार को वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा था कि सुधार के आगामी कदमों से थोड़ी तकलीफ जरूर होगी, लेकिन राजकोषीय घाटे का स्तर कम करने के लिए ये कदम जरूरी हैं। इससे निवेशकों में यह भरोसा एक बार फिर मजबूत हुआ है कि सरकार सुधार की राह पर कदम वापस नहीं खींचेगी।


शुक्रवार को आईटी स्टॉक्स में भी खासी गहमागहमी देखी गई। इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो के शेयरों में 1.2-1.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह यह थी कि अमेरिका के नीति-निर्माताओं द्वारा बजट घाटा मामले में तय समय-सीमा से पहले ही राजनीतिक दलों के साथ बातचीत के आयोजन की खबरें आईं।


इससे विदेशी बाजारों में मजबूती दिखी, जिसका फायदा घरेलू बाजार के आईटी स्टॉक्स को मिला। इस बारे में आईआईएफएल के रिसर्च प्रमुख अमर अंबानी ने कहा कि जनवरी की पहली तारीख से खर्च में कटौती व टैक्स में बढ़ोतरी शुरू होने से पहले ही फिस्कल क्लिफ पर चल रही बातचीत के किसी नतीजे पर पहुंच जाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।


गुरुवार को सेंसेक्स में 93.66 अंक की गिरावट दर्ज की गई थी।लेकिन शुक्रवार को सेंसेक्स बेहतर स्थिति में खुला, और दिन भर बेहतर ही दिखा। हालांकि आखिरी घंटों में इसने तेज उछाल ली, और बढ़त का शतक बनाने में कामयाब रहा। सेक्टोरल इंडेक्स के मामले में बीएसई के 13 में से 11 इंडेक्स हरे निशान के साथ बंद हुए। हालांकि हेल्थकेयर व बैंकेक्स इंडेक्स में मामूली गिरावट देखी गई।


जहां तक विदेशी बाजारों का सवाल है, तो एशिया के अधिकतर बाजार बढ़त बनाकर बंद हुए। जापान के बाजार में वर्ष 2005 के बाद की सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई।चीन, हांगकांग, ताइवान, सिंगापुर तथा दक्षिण कोरिया के बाजारों में भी 0.21-1.24 फीसदी बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि यूरोपीय बाजारों में मंदी का आलम रहा। अमेरिकी फिस्कल क्लिफ पर किसी तरह के निर्णय से पहले निवेशक सतर्कता के साथ कारोबार करते दिख रहे थे। फ्रांस, जर्मनी व ब्रिटेन के बाजारों में 0.01-0.36 फीसदी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

ग्लोबल हालात - तो एशिया के अधिकतर बाजार बढ़त बनाकर बंद हुए। जापान के बाजार में वर्ष 2005 के बाद की सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। चीन, हांगकांग, ताइवान, सिंगापुर तथा दक्षिण कोरिया के बाजारों में भी 0.21-1.24 फीसदी बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि यूरोपीय बाजारों में मंदी का आलम रहा। अमेरिकी फिस्कल क्लिफ पर किसी तरह के निर्णय से पहले निवेशक सतर्कता के साथ कारोबार करते दिख रहे थे। फ्रांस, जर्मनी व ब्रिटेन के बाजारों में 0.01-0.36 फीसदी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

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