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लोग कम टैक्स नहीं चुकाते, दरअसल सरकारें खर्च बहुत करती हैं।
गुलबर्गा में 20 फीसदी ज्यादा रही दालों की उत्पादकता

गुलबर्गा जिले में किसानों ने दो प्रमुख दलहनी फसलों अरहर और चना की 15-20 फीसदी ज्यादा उत्पादकता हासिल की है। किसानों को अच्छे बीज व खाद के अलावा कीट नियंत्रण के जरिये यह सफलता मिली है। अनुमान है कि कीटों के कारण देश में करीब 4,000-5,000 करोड़ रुपये मूल्य की दलहन बर्बाद होती है।


एग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन के सीनियर साइंटिस्ट येलशेट्टी ने कहा कि बीदर और गुलबर्गा जिलों में कुल मिलाकर देश की 15 फीसदी अरहर दाल का उत्पादन होता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत गुलबर्गा जिले में 2010-11 से चलाए जा रहे एक्सीलरेटेड पल्सेस प्रोडक्शन प्रोग्राम में अरहर और चना का उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।


गुलबर्गा को अरहर उत्पादन बढ़ाने के लिए चुना गया है। यहां हर साल करीब 3.7 लाख हैक्टेयर में अरहर का उत्पादन होता है। गुलबर्गा दालों का कटोरा कहा जाता है। बीदर में 65 हजार हेक्टेयर में अरहर का उत्पादन होता है। यह भी महत्वपूर्ण उत्पादक जिला है। इस जिले में दलहन उत्पादकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सरकार ने अरहर और चना का उत्पादन बढ़ाने का कार्यक्रम इस वजह से चलाया है कि देश में 60 फीसदी इन्हीं दलहनों का उत्पादन किया जाता है।


येलशेट्टी ने कहा कि कार्यक्रम के तहत विभिन्न प्रणालियों के तहत दाल का उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में बदलती स्थितियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के चलते कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इस कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन के बावजूद दलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर है। इस कार्यक्रम में उड़द, मूंग और मसूर की दाल उगाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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