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Milton Friedman
किसी कारोबार का सामाजिक उत्तरदायित्व है कि वह अपने फायदे को बढ़ाए।
एनएसई में ऑर्डर प्राइस बैंड 10% तय

नई व्यवस्था
शेयरों के चालू भाव के 10 फीसदी ऊपर या नीचे के भाव पर ही जारी कर पाएंगे ऑर्डर
एनएसई ने अपने सभी सदस्य ब्रोकरों को इस आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा
24 दिसंबर, 2012 से लागू हो जाएगी डायनेमिक प्राइस बैंड की यह नई व्यवस्था
बाजार में तेज बढ़त या गिरावट की स्थिति में डायनेमिक प्राइस बैंड में होगी बढ़ोतरी

गलत ऑर्डरों की वजह से सिस्टम में जोखिम को कम करने की कवायद के तहत अग्रणी शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अपने सदस्य ब्रोकरों से कहा है कि वह ट्रेड ऑर्डर जारी करते समय अपना भाव शेयरों व अन्य सिक्युरिटीज के चालू भाव के 10 फीसदी के भीतर ही रखें। हालांकि, एनएसई ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मूल्य दायरे में जरूरत के हिसाब से बदलाव भी किया जाएगा। यह व्यवस्था 24 दिसंबर, 2012 से लागू हो जाएगी।


यहां जारी सर्कुलर में एनएसई ने कहा है कि उन स्टॉक्स में, जिन पर डेरिवेटिव उत्पाद उपलब्ध हैं और सूचकांकों में शामिल उन शेयरों में, जिन पर डेरिवेटिव उत्पाद उपलब्ध हैं, संशोधित ऑपरेटिंग पॉलिसी के मुताबिक, डायनेमिक प्राइस बैंड 10 फीसदी होना चाहिए। एक्सचेंज ने अपने सदस्य ब्रोकरों से कहा है कि वे इस डायनेमिक प्राइस बैंड की सीमा से बाहर जाकर ऑर्डर प्लेस न करें। एनएसई ने यह भी कहा है कि मार्केट का ट्रेंड किसी भी दिशा में तेजी से जाने की स्थिति में, अन्य एक्सचेंजों के साथ तालमेल के जरिए इस डायनेमिक प्राइस बैंड को बढ़ाया भी जा सकता है।


अगर किसी शेयर में पिछला ऑर्डर उसके चालू मूल्य के सात फीसदी से ज्यादा या कम पर प्लेस किया जाता है तो प्राइस बैंड को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया जाएगा। साथ ही, पिछला ट्रेड 12 फीसदी से ज्यादा पर होने की स्थिति में प्राइस बैंड को बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया जाएगा। इसके बाद, हर बार डायनेमिक प्राइस बैंड में पांच फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। अन्य सभी सिक्युरिटीज के मामले में प्राइस बैंड की मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह लागू रहेगी।


गौरतलब है कि पूंजी बाजार नियामक सेबी ने पिछले हफ्ते ही स्टॉक एक्सचेंजों को कहा था कि वे बाजार की सामान्य परिस्थितियों के दौरान 10 करोड़ रुपये मूल्य से ज्यादा के ऑर्डरों को स्वीकार न करें। साथ ही, सेबी ने डायनेमिक प्राइस बैंड के शुरुआती दायरे को भी सख्त बनाने की बात कही थी। यह समूची कवायद 5 अक्टूबर, 2012 को एमके ग्लोबल द्वारा गलत ऑर्डर जारी कर दिए जाने के चलते एनएसई के निफ्टी इंडेक्स में आई 900 अंक की अचानक गिरावट जैसी परिस्थितियों को रोकने के लिए की जा रही है।

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