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खनन में तीन गुना बढ़ी एनएमडीसी की लागत

मुश्किल
कुमारस्वामी और 11बी डिपॉजिट विकसित करने में बढ़ी लागत
शुरुआत में इसकी लागत थी 592 करोड़ रुपये, बढ़कर हुई 1,506 करोड़
सरकारी क्लियरेंस और औपचारिकताओं की वजह से हुई देरी

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक कांट्रैक्ट देने में देरी होने से लौह अयस्क खनन करने वाली कंपनी एनएमडीसी की विकास लागत में तीन गुना इजाफा हुआ। ऐसे में कंपनी को दो खान विकसित करने के लिए 1,506 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े।


देश में लौह अयस्क के उत्पादन में एनएमडीसी की 16 फीसदी हिस्सेदारी है। गौरतलब है कि 1997 और 2003 में कंपनी ने कर्नाटक में कुमारस्वामी खान और छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा में 11बी डिपॉजिट को विकसित करने का फैसला किया। इन डिपॉजिट को विकसित करने में हुई देरी से कंपनी को तीन गुना ज्यादा खर्च करना पड़ा।


कैग के एक ऑडिटर के मुताबिक इन डिपॉजिट को विकसित करने की शुरुआती लागत करीब 592 करोड़ रुपये थी जो बाद में बढ़कर 1,506 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। कर्नाटक के कुमारस्वामी प्रोजेक्ट को 1997 में हाथ में लिया गया था पर इस पर सरकारी क्लियरेंस और औपचारिकताओं को पूरा करने में काफी समय लगा और यह काम 2009 में ही शुरू हो पाया। इस प्रोजेक्ट में अभी देरी हो रही है क्योंकि इसे विकसित करने के लिए कांट्रैक्ट नहीं दिए गए हैं।


ऑडिटर ने यह भी कहा कि 11बी प्रोजेक्ट में भी कांट्रैक्ट देने में हो रही देरी का असर इस प्रोजेक्ट और इसकी लागत पर पड़ रहा है। इसके अलावा भी कंपनी को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रोजेक्ट में नक्सलियों की वजह से मानवसंसाधन और अन्य संसाधनों के मोबलाइजेशन में दिक्कत आ रही।


कैग के मुताबिक इसके बावजूद कुछ मामलों में देरी को रोका जा सकता था। गौरतलब है कि एनएमडीसी ने अपनी लौह अयस्क क्षमता को 2006 में सालाना 24.22 मिलियन टन (एमटीपीए) से बढ़ाकर 2008 में 32 एमटीपीए किया है।

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