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Benjamin Graham
शेयर बाजार में लोग सीखते कुछ नहीं,भूल सब कुछ जाते हैं।
आरबीआई के दिशानिर्देशों से फायदे में रहेंगी एनबीएफसी

बदलाव
कॉरपोरेट गवर्नेंस व तरलता प्रबंधन के कठोर मानक
पूंजी पर्याप्तता अनुपात 10 फीसदी करने का है प्रस्ताव
एनपीए मानक की सीमा घटाकर 90 दिन की जाएगी
उम्मीद
परिचालन प्रदर्शन व लाभप्रदता पर ज्यादा विपरीत प्रभाव नहीं
मॉनिटरिंग व क्लेक्शन सिस्टम में सुधार की उम्मीद जताई
उधार लेने वालों का व्यवहार बदलने को लेकर भी आशान्वित

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा प्रस्तावित नए दिशानिर्देश गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए खासे फायदेमंद साबित हो सकते हैं। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह बात कही है। आरबीआई की ड्रॉफ्ट गाइडलाइंस में एनबीएफसी के लिए बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस व डिसक्लोजर मानकों के साथ ही कठोर तरलता प्रबंधन पर फोकस किया गया है।


इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिजर्व बैंक के इन प्रस्तावों से घरेलू एनबीएफसी को फायदा ही होगा। साथ ही, एजेंसी ने यह भी कहा है कि परिसंपत्तियों के वर्गीकरण व प्रोविजनिंग के मानकों में बदलाव और ज्यादा टियर-1 कैपिटल की बाध्यता के बावजूद एनबीएफसी की वित्तीय हालत पर बहुत ज्यादा असर पडऩे की आशंका नहीं है। रिजर्व बैंक ने एनबीएफसी के लिए नए दिशानिर्देशों का मसौदा 12 दिसंबर, 2012 को जारी किया था। यह दिशानिर्देश उषा थोराट समिति की रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर तैयार किए गए हैं।


प्रस्तावित दिशानिर्देशों के मुताबिक, अगर किसी लोन का भुगतान 90 दिनों तक नहीं हो रहा है तो उसे गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) माना जाएगा। मौजूदा समय में यह समय सीमा 180 दिनों की है। साथ ही, नए दिशानिर्देशों के तहत अधिकांश एनबीएफसी के लिए 10 फीसदी का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीएआर) लागू करने का भी प्रस्ताव किया गया है।


पूंजी पर्याप्तता अनुपात के बारे में इंडिया रेटिंग्स ने कहा है कि टियर-1 कैपिटल के न्यूनतम अनुपात को 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिए जाने से एनबीएफसी के परिचालन प्रदर्शन पर बहुत विपरीत प्रभाव पडऩे की आशंका नहीं है। साथ ही, वित्त वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही से एनपीए मानक की समय सीमा 180 दिन से घटाकर 90 दिन किए जाने से इनकी लाभप्रदता पर भी खास विपरीत प्रभाव पडऩे की संभावना नहीं दिखती।


हालांकि, एनपीए की मद में प्रोविजनिंग में बढ़ोतरी से औसत परिसंपत्तियों पर रिटर्न (आरओए) में 0.05 फीसदी से लेकर 0.40 फीसदी तक का नकारात्मक असर पड़ सकता है। इंडिया रेटिंग्स का मानना है कि संक्रमण के इतने लंबे समय में मॉनिटरिंग व क्लेक्शन सिस्टम में सुधार और उधार लेने वालों के व्यवहार में बदलाव होगा और 90 दिनों की सीमा उस समय तक सामान्य दिखाई देने लगेगी।

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