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Randy Thurman
एक पैसा बचाने का मतलब दो पैसा कमाना जरूर है लेकिन टैक्स चुकाने के बाद।

नई दिल्ली - रिजर्व बैंक द्वारा मंगलवार को मौद्रिक नीति समीक्षा पेश किए जाने के बाद बैंकों ने कहा कि वे ब्याज दरों में तत्काल कमी करने के बारे में कोई निर्णय नहीं लेंगे। फिलहाल बैंकिंग सिस्टम में तरलता की स्थिति मजबूत नहीं है, अत: ऐसे में ब्याज दरें घटाना मुश्किल है। हालांकि, जनवरी के बाद यदि आरबीआई नीतिगत ब्याज दरों में कटौती करने जैसा कोई कदम उठाता है तो इस पर विचार किया जाएगा।


भारतीय स्टेट बैंक के सीएफओ दिवाकर गुप्ता ने कहा, 'हमें उम्मीद थी कि आरबीआई इस बार रेपो रेट के साथ-साथ सीआरआर में भी आंशिक कटौती कर तरलता की स्थिति को बेहतर करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


जनवरी में रिजर्व बैंक अगर रेपो रेट में कमी करता है तो ब्याज दरों में बदलाव किया जा सकता है।' पीएनबी के चेयरमैन के. आर. कामथ ने बताया, 'हमारा बैंक पहले ही अपने होम और ऑटो लोन की ब्याज दरों में कटौती कर चुका है। यदि सीआरआर में किसी भी प्रकार की कमी होती तो इस दिशा में कुछ और कदम उठाया जा सकता था।Ó (ब्यूरो)

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