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निवेश की दुनिया में भव‍िष्‍य के बजाय अतीत को देखना ज्‍यादा बड़ी समझदारी है।
पूरी फिल्‍मी है 133.5 मिलियन डॉलर के मालिक रजत गुप्‍ता की कहानी

वॉल स्ट्रीट में सबसे सफल भारतीय अमेरिकियों में शामिल गोल्डमैन सैक्श के पूर्व डायरेक्टर रजत गुप्ता कंपनी रूम से निकलकर जेल पहुंचने की कगार पर आ गए हैं। गुप्ता को अमेरिका के सबसे बड़े इनसाइडर ट्रेडिंग मामले में दोषी करार दिया गया है। उन्होंने गैलियन हेज फंड के संस्थापक राज राजारत्नम को कारोबार से जुड़ी कई गोपनीय सूचना पहुंचाई थी। उन्हें 18 अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी। उन्हे 25 साल तक की क़ैद हो सकती है।

 

रजत गुप्ता के खिलाफ मुकदमा आखिरी चरण मे हैं। पिछले बुधवार को सुनवाई के दौरान एक अभियोजक ने साफ कहा कि गुप्ता के खिलाफ स्पष्ट सबूत हैं। उन्होंने हेज फंड मैनेजर राजरत्नम को स्टॉक टिप्स देकर करोड़ों डॉलर बनाने का रास्ता मुहैया कराया। जबकि गुप्ता के वकीलों का कहना है कि गोल्डमैन सैक्श के इस पूर्व बोर्ड सदस्य के पास ऐसी कोई मजबूरी नहीं थी कि वह इस तरह की संवेदनशील सूचना लीक करें। सरकारी गवाह के मुताबिक 2008 में गुप्‍ता की कुल संपत्ति 133.5 मिलियन डॉलर थी।


 

अभियोजन पक्ष ने कहा है कि 63 वर्षीय गुप्ता ने 2008 में वित्तीय संकट के दौर में राजरत्नम को संवेदनशील सूचना देने के अलावा वारेन बफेट के बर्कशायर हैथवे में पांच अरब डॉलर का निवेश करवाया। इसके अलावा उन्होंने प्रॉक्टर एंड गैंबल के बोर्ड के सदस्य के तौर पर गोपनीय सूचनाएं लीक की। गेलियन ग्रुप हेज फंड और अरबपति राजरत्नम का पिछले साल उसी कोर्ट हाउस में मुकदमा चला था, जिसमें रजत गुप्ता का मुकदमा चल रहा है। राजरत्नम इस समय इनसाइडर ट्रेडिंग के मामले में ही 11 साल की सजा काट रहे हैं। सरकारी गवाह हीथर वेबस्‍टर (जेपी मॉर्गन चेज एंड कंपनी में गुप्‍ता के प्राइवेट बैंकर) ने अदालत में बताया कि 2008 में रजत गुप्‍तान की कुल संपत्ति 84 मिलियन डॉलर थी। इसके अलावा गुप्‍ता एस्‍टेट प्‍लानिंग के लिए ट्रस्‍ट में 38.5 मिलियन डॉलर के मालिक हैं और उनके पास 11 मिलियन डॉलर कैश भी हैं।

 

गुप्ता को बचाने के लिए भारतीय कारोबारियों से लेकर अमेरिकी अधिकारी तक कई प्रयास कर रहे हैं। गुप्ता के साथ काम कर चुके लोगों को कहना है कि वह ऐसा नहीं कर सकते। उन्हें फंसाया जा रहा है। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन अजीत रंगनेकर का कहना है कि रजत इनसाइडर ट्रेडिंग में लिप्त नहीं हो सकते। जो लोग रजत को जानते हैं, उन्हें इस पर विश्वास नहीं हो रहा है। रंगनेकर का नाम उस 20 लोगों की सूची में शामिल है, जिन्हें गुप्ता का बचाव कर रही टीम की ओर से बहस के दौरान गवाह के तौर पर शामिल होना है। उनका कहना है कि भारत में रजत ने शानदार काम किया है। कल्याणार्थ और समाज सेवा के काम में उन्होंने नए प्रतिमान बनाए हैं। इस अच्छे काम के लिए रजत को अब तक मान्यता नहीं दी गई। गुप्ता ने शिक्षा, हेल्थ और शहरीकरण के क्षेत्र जबरदस्त काम किया है। कोई भी व्यक्ति तब तक अपराधी नहीं होता जब तक यह साबित न हो जाए। मुझे पूरे उम्मीद है कि गुप्ता के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलेगा और वह निर्दोष साबित होंगे।

 

इस भारतीय कारोबारी के अर्श से फर्श पर पहुंचने की कहानी भी काफी रोचक है। गुप्ता का जन्म कोलकाता के माणिकतला में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार थे। गुप्ता जब सोलह साल के थे तो उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। इसके दो साल बाद उनकी मां का भी निधन हो गया। उनकी स्कूली शिक्षा दिल्ली के मॉर्डन स्कूल में हुई। उन्होंने बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग आईआईटी दिल्ली से की। 1971 में उन्हें यह डिग्री दी गई। इसके बाद उन्होंने आईटीसी में नौकरी का इंटरव्यू दिया, लेकिन खारिज कर दिए। इसके बाद वह मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए हारवर्ड बिजनेस स्कूल चले गए और बेकर स्कॉलर बने।

 

गुप्ता 1973 में मैंकिजी में शामिल हुए थे। पहले उनकी दावेदारी इसलिए खारिज कर दी गई थी उनके पास पर्याप्त अनुभव नहीं था। लेकिन हारवर्ड बिजनेस स्कूल में उनके प्रोफसर वाल्टर जे. सालमन उस समय न्यूयॉर्क दफ्तर के प्रमुख मैंकिजी के प्रमुख वाल्टर जे सालमन को उनकी दावेदारी के पक्ष में फोन किया। इसके बाद उन्हें इसके लिए चुन लिया गया। बाद में गुप्ता ने अपनी असाधारण प्रतिभा साबित की और उनके प्रमुख रहते मैकिंजी ने अपना जबरदस्त विस्तार किया।

 

पढ़ने में थे अव्वल

गुप्ता शुरू से ही पढ़ने में काफी तेज तर्रार माने जाते थे। उन्होंने 1966 में आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में 15वां स्थान हासिल किया था। इसके बाद उन्हें आईआईटी दिल्ली में दाखिला मिला। वहां से स्नातक करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए इस कारोबारी ने अमेरिका जाना पसंद किया। अमेरिका में हार्वर्ड स्कूल में उच्च शिक्षा के दौरान अपनी क्लास में वो फर्स्‍ट आए थे। अमेरिका में उनकी पूरी पढ़ाई स्‍कॉलरशिप के बूते ही हुई थी।

 

कारोबारी दुनिया में है बड़ा नाम

भारतीय मूल के अमेरिकी कारोबारी रजत गुप्ता आज कारोबार दुनिया के चंद बड़े नामों में शामिल हैं। 63 साल की उम्र में ही गुप्ता ने काफी कुछ कर अपना नाम बुलंदियों पर पहुंचा दिया है। उन्होंने कंसलटेंसी फर्म मैकिंजी के प्रमुख के पद से लेकर गोल्डमैन सैक्श तक कई बड़ी कंपनियों में बड़े पद पर काम किया। वहीं गुप्ता प्राक्टर एंड गैंबल जैसी कंपनी के बोर्ड सदस्यों में भी शामिल रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेष सलाहकार के रूप में भी वे अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह अमेरिकन एयरलाइंस की मूल कंपनी एएमआर कॉपरेरेशन के निदेशक के पद पर भी काम कर चुके हैं।

 

रजत गुप्ता 1994 से 20003 तक मैंकिजी के मैनेजिंग डायरेक्टर रहे हैं। गुप्ता किसी ग्लोबल कॉरपोरेशन के पहले भारतीय सीईओ थे। रिटायरमेंट के बाद भी वह गोल्डमैन सैक्श, प्रॉक्टर एंड गैंबल, अमेरिकन एयरलाइंस और गेट्स फाउंडेशन से विभिन्न स्तरों से जुड़े रहे।



इन आरोपों में पाए गए दोषी


रजत गुप्ता पर आरोप है कि गोल्डमैन सैक्श और प्रॉक्टर एंड गैंबल के बोर्ड में रहते उन्होंने हेज फंड के मैनेजर राज राजरत्नम को गोपनीय सूचनाएं दी थीं। राजरत्नम इनसाइडर ट्रेडिंग मामले में अभी 11 साल की सजा काट रह है। गुप्ता ने खुद पर लगाए गए इस आरोप से इनकार किया है। गुप्ता का ट्रायल मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में 21 मई को शुरू हुआ था।



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