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Jim Cramer
दुनिया में डर कर किसी ने एक चवन्नी भी नहीं कमाई।
विश्व बाजार में सुस्ती से कपास में तेजी मुश्किल

पंजाब की मंडियों में चालू सीजन के दौरान अब तक सिर्फ 40 फीसदी कपास की आवक

वैश्विक मांग कमजोर होने के कारण कपास के भाव में फिलहाल तेजी की संभावना नहीं है। इस साल देश में कपास का उत्पादन 15 फीसदी कम रहने का अनुमान है। मंडियों में भाव कम होने के कारण किसानों की बिक्री भी धीमी है। इसके बावजूद भाव सुस्त पड़े हुए हैं। पंजाब की मंडियों में कपास के भाव करीब 4100 से 4300 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।


विश्व बाजार से सुस्ती के संकेत और घरेलू टेक्सटाइल उद्योग की सीमित मांग के चलते भाव कम है। इस वजह से किसान कपास लेकर मंडियों में नहीं आ रहे हैं। चालू सीजन में अभी तक मंडियों में केवल ४0 फीसदी ही कपास पहुंची है। कपास के दाम पिछले साल की तुलना में 5 से 7 फीसदी कम बने हुए हैं। जानकारों के मुताबिक इस साल कपास के दाम वर्तमान स्तर से अधिक नहीं बढ़ेंगे। 


पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की मंडियों में इन दिनों प्रतिदिन 30 हजार गांठ (प्रति गांठ 170 किग्रा) कपास की आवक हो रही है। पिछले साल की तुलना में जहां उत्पादन 15 फीसदी तक घटने की संभावना है। लेकिन कपास के दाम न बढऩे से मंडियों में आवक भी जोर नहीं पकड़ रही है। वर्धमान टेक्सटाइल लिमिटेड के डायरेक्टर (मैटीरियल) आई. जी. धूरिया के मुताबिक कपास के दाम वैश्विक बाजार के ऊपर निर्भर हैं।


वैश्विक बाजार में पुरानी कपास का स्टॉक बहुत अधिक है, इसलिए इसकी मांग इस साल कम है। चीन में कॉटन यार्न की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन मिलें बड़े पैमाने पर कपास की खरीद नहीं कर रही है। उन्हें कपास के मूल्य में गिरावट आने की उम्मीद है।


इसी वजह से वे कपास का भारी स्टॉक नहीं कर रहे हैं।
नॉर्दर्न इंडिया कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश राठी के मुताबिक वर्तमान में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की मंडियों में कपास का भाव 4100 से 4300 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। काफी समय से कपास के दाम सुस्त हैं। कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीआईआई) ने 3500 गांठ खरीदने के बाद सरकारी खरीद बंद कर दी है। मंडियों में इस समय केवल मिलों की मांग चल रही है।

  
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