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Peter Drucker
मुनाफा किसी कंपनी के लिए उसी तरह है जैसे एक व्यक्ति के लिए ऑक्सीजन।
गारंटी मूल राशि की, रिटर्न की नहीं

न्यूनतम रिटर्न की गारंटी से छूट पाने के बाद बीमा कंपनियों के पेंशन प्रोडक्ट्स का आकर्षण कम होगा

बीमा पेंशन प्लान
रिटर्न की कोई गारंटी नहीं लेकिन मूल राशि की गारंटी मिलेगी
पेंशन प्लान के साथ बीमा सुरक्षा भी मिलेगी ग्राहकों को
ग्राहकों को उसी बीमा कंपनी से एन्युटी खरीदनी होगी
न्यूनतम रिटर्न गारंटी देने में सक्षम नहीं हो पाई बीमा कंपनियां

न्यू पेंशन स्कीम
एनपीएस में भी रिटर्न की गारंटी नहीं लेकिन पिछले वर्षों में अच्छा रिटर्न
एनपीएस में चार्ज बढऩे के बावजूद बीमा कंपनियों से काफी कम
ग्राहकों को निवेश का पैटर्न चुनने की भी आजादी मिलती है
एन्युटी किसी भी बीमा कंपनी से खरीदने की स्वतंत्रता मिलेगी

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने बीमा कंपनियों के पेंशन प्रोडक्ट्स के लिए नए दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। इसके अनुसार बीमा कंपनियों को मूल राशि की गारंटी देनी होगी। लेकिन उन्हें न्यूनतम रिटर्न की गारंटी देने की अनिवार्यता से छूट दे दी गई है। इससे ग्राहकों के लिए बीमा कंपनियों के पेंशन प्रोडक्ट्स ज्यादा आकर्षित नहीं रह गए हैं।


दूसरी ओर, बीमा कंपनियों के पेंशन प्रोडक्ट के दूसरे नियम भी ग्राहकों के लिए बंधन साबित हो सकते हैं। ऐसे में न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) ग्राहकों के लिए ज्यादा आकर्षक साबित हो सकती है। इसमें भी ग्राहकों को रिटर्न की कोई गारंटी नहीं मिल रही है, लेकिन पिछले वर्षों में एनपीएस का रिटर्न बेहतर रहा है।


एनपीएस में पेंशन संबंधी नियम भी ग्राहकों के लिए ज्यादा आसान हैं। एनपीएस में बेहतर रिटर्न मिलने की एक वजह यह भी है कि एनपीएस में बीमा सुरक्षा न मिलने के कारण ज्यादा रिटर्न मिल रहा है जबकि बीमा कंपनियों के पेंशन प्रोडक्ट में बीमा सुरक्षा का अंश भी जुड़ा होगा, बीमा के खर्च के कारण इनका रिटर्न थोड़ा कम ही रह सकता है।
एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि बीमा कंपनियां न्यूनतम रिटर्न देने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं।


न्यूनतम रिटर्न की गारंटी के प्रावधान से पहले जीवन बीमा कंपनियों के कुल कारोबार में केवल पेंशन प्रोडक्ट की हिस्सेदारी 20 फीसदी से अधिक हुआ करती थी। जब बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने सितंबर 2010 में दिशानिर्देश जारी कर जीवन बीमा कंपनियों के यूनिट लिंक्ड पेंशन प्रोडक्ट (यूएलपीपी) पर 4.5 प्रतिशत के रिटर्न की गारंटी अनिवार्य कर दी, तो कई कंपनियों ने बाजार से अपने यूएलपीपी समेट लिए।


इस दिशानिर्देश के अनुसार केवल दो कंपनियों ने बीमा नियामक के पास अपने पेंशन प्रोडक्ट फाइल किए, जिनमें भारतीय जीवन बीमा निगम और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस शामिल थे। आप स्वयं समझ सकते हैं कि जहां बैंक के बचत खाते पर 4 प्रतिशत का रिटर्न आसानी से मिल रहा है, वहीं जीवन बीमा कंपनियों को यूएलपीपी पर 4.5 प्रतिशत का रिटर्न देने में पसीने छूटने लगे।


इस दिशानिर्देश के तहत केवल भारतीय  जीवन बीमा निगम ने ही यूएलपीपी बाजार में लांच किए थे। अब जब बीमा नियामक के नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार अब जीवन बीमा कंपनियों को न्यूनतम रिटर्न की गारंटी से छूट दे दी गई है। अब कंपनियां दुबारा पेंशन प्रोडक्ट बाजार में लांच करेंगी। लेकिन इनमें ग्राहकों को सिर्फ मूल राशि की सुरक्षा की ही गारंटी मिलेगी। साथ ही उन्हें एन्युटी भी उसी बीमा कंपनी से खरीदनी होगी।


सुनिश्चित रिटर्न पर एक निगाह
एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस ऐसी पहली कंपनी है, जिसने बीमा नियामक के नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुरूप दो यूनिट लिंक्ड पेंशन प्रोडक्ट लांच किए हैं- एचडीएफसी लाइफ पेंशन सुपर प्लस और एचडीएफसी लाइफ सिंगल प्रीमियम पेंशन सुपर। दिलचस्प बात यह है कि मैच्योरिटी पर कुल भुगतान किए गए प्रीमियम का एक प्रतिशत रिटर्न या फंड वैल्यू, जो भी अधिक हो, सुनिश्चित किया गया है।


पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर कुल दिए गए प्रीमियम पर छह प्रतिशत रिटर्न मिलेगा। कई अन्य जीवन बीमा कंपनियों के यूएलपीपी भी अब बाजार में आएंगे क्योंकि नियामक ने गारंटी रिटर्न के मामले में राहत दे दी है।


बात एनपीएस की न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) रिटायरमेंट कोष का सबसे बेहतरीन जरिया है। 1 मई 2009 से एनपीएस देश के उन सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध है, जो इसमें स्वैच्छिक रूप से अंशदान कर सकते हैं। यह अनिवार्य रूप से पेंशन उत्पाद है, लिहाजा धारक को कुछ नियत नियमों के तहत अनिवार्य रूप से लाइफ एन्युटी खरीदनी ही होगी।


अगर हम खर्च की बात करें तो अक्टूबर तक जहां एनपीएस पेंशन फंड मैनेजर सालाना 0.0009 प्रतिशत का शुल्क लेते थे, वह नवंबर 2012 से बढ़कर अधिकतम 0.25 प्रतिशत हो गया है। इसके बावजूद यह म्यूचुअल फंडों और जीवन बीमा प्रोडक्ट के मुकाबले काफी सस्ती है।


मुंबई स्थित लैडर-7 फाइनेंशियल एडवायजरी के प्रिंसिपल फाइनेंशियल प्लानर सुरेश सदगोपन कहते हैं कि रिटायरमेंट के लिए कोष तैयार करने के नजरिये से एनपीएस अन्य उपलब्ध प्रोडक्ट के मुकाबले कहीं बेहतर है। इसकी कई वजह है। पहला, इसकी लागत काफी कम है और यह एक सुलझा हुआ प्रोडक्ट है, जहां आप अपनी मर्जी से इक्विटी और डेट में निवेश का विकल्प चुनते हैं। दूसरा, पेंशन फंड प्रबंधकों ने अब तक जो रिटर्न उपलब्ध कराया है, वह भी अच्छा रहा है।


तीसरा, एनपीएस की मैच्योरिटी पर आपको जिन पैसों से अनिवार्य रूप से एन्युटी खरीदनी होती है, उसके लिए आप अपने फायदे के मुताबिक उस एन्युटी प्रोडक्ट को चुन सकते हैं, जहां आपको बेहतर रिटर्न मिल रहा हो। दूसरी तरफ लाइफ इंश्योरेंस के पेंशन प्रोडक्ट के मामले में बाध्यता है कि आपने जिससे पॉलिसी ली है, उसी से एन्युटी खरीदेंगे। भले ही वह दूसरे के मुकाबले कम रिटर्न की पेशकश ही क्यों न कर रहा हो।


एनपीएस में निवेशक 60 साल की उम्र तक पहुंच जाए तो एनपीएस के अंतर्गत जमा की गई राशि में से 60 फीसदी निकालने का विकल्प भी होता है। इसके अलावा 40 फीसदी का इस्तेमाल किसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से एन्युटी खरीदने में करना अनिवार्य होता है। अगर कोई निवेशक 60 साल की उम्र से पहले इसे निकालता है तो उसे 80 फीसदी राशि का इस्तेमाल एन्युटी खरीदने में करना पड़ेगा। बाकी की 20 फीसदी राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है। खाताधारक की आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में नॉमिनी को एनपीएस की 100 फीसदी राशि एकमुश्त निकालने का प्रावधान किया गया है।


टैक्स के नजरिये से एनपीएस और यूएलपीपी
कोष बनाने की अवधि समाप्त होने के बाद आप जीवन बीमा कंपनियों के पेंशन प्रोडक्ट से एक-तिहाई राशि की निकासी कर सकते हैं और यह टैक्स-फ्री होती है। शेष दो-तिहाई हिस्से से आपको उसी जीवन बीमा कंपनी से एन्युटी खरीदनी होती है। एनपीएस के तहत आप कुल संचित राशि के 60 प्रतिशत की निकासी कर सकते हैं लेकिन यह टैक्स-फ्री नहीं होगी।


इसके बावजूद विशेषज्ञों की मानें तो जीवन बीमा कंपनियों के पेंशन प्रोडक्ट से कहीं बेहतर है एनपीएस, जो आपके रिटायरमेंट को सुखमय बनाने में मददगार हो सकता है।

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