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Richard Branson
जीवन में जो चीज रोमांचित करे उसे पूंजी में बदल देना ही उद्यमिता है।
ग्रुप हेल्थ बीमा इस बार पड़ेगा काफी महंगा

रिन्यूअल के दौरान एक-दूसरे के ग्राहक नहीं छीनेंगी सरकारी बीमा कंपनियां

रिन्यूअल कब - दिसंबर के अंत में ही कॉरपोरेट ग्राहकों के ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस का होना है रिन्यूअल
रुख बदला - इस बार सरकारी बीमा कंपनियों में गलाकाट प्रतिस्पर्धा का फायदा भी नहीं मिलेगा कॉरपोरेट ग्राहकों को
ऐसा क्यों - सरकारी बीमा कंपनियां की प्रतिस्पर्धा अब निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों से होगी
पहले क्या था - पहले सरकारी बीमा कंपनियां कारोबार बढ़ाने के लिए कवरेज की पेशकश करती थीं कम प्रीमियम पर
मौजूदा हाल - फिलहाल देश में कुल ग्रुप हेल्थ इंश्योंरेस कारोबार में लगभग 80 फीसदी बाजार हिस्सेदारी पर चारों सरकारी बीमा कंपनियों का है कब्जा

ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज के लिए कॉरपोरेट ग्राहकों को इस बार रिन्यूअल के समय 15-20 फीसदी तक अधिक प्रीमियम चुकाना होगा। दिसंबर माह के अंत में कॉरपोरेट ग्राहकों के ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस का रिन्यूअल होना है। सरकारी क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियां ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस में तार्किक प्रीमियम रखने पर जोर दे रही हैं।


इसके अलावा, कॉरपोरेट ग्राहकों को इस बार सरकारी बीमा कंपनियों में गलाकाट प्रतिस्पर्धा का फायदा भी नहीं मिलेगा। सरकारी बीमा कंपनियां अब कम प्रीमियम रखकर एक-दूसरे के ग्राहकों को अपने पाले में नहीं ला सकती हैं। वित्त मंत्रालय के एक निर्देश के बाद सरकारी बीमा कंपनियां एक-दूसरे के ग्राहकों पर डोरे डालने से परहेज कर रही हैं। सरकारी बीमा कंपनियां की प्रतिस्पर्धा अब निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों से होगी।


सरकारी क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनी ओरिएंटल इंश्योरेंस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'बिजनेस भास्कर' को बताया कि दिसंबर के अंत में कॉरपोरेट के साथ हम ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज का रिन्यूअल कर रहे हैं। इस बार प्रीमियम 15-20 फीसदी तक अधिक होगा। पिछले कुछ वर्षों के दौरान ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस कारोबार में प्रीमियम उचित तरीके से नहीं बढ़ाया गया था जिससे कंपनियां प्राइसिंग जोखिम को कवर करने में सक्षम नहीं थीं।


इससे बीमा कंपनियों को बड़े पैमाने पर नुकसान भी हुआ है। अधिकारी के मुताबिक, इस बार रिन्यूअल के समय सरकारी बीमा कंपनियां आपस में प्रतिस्पर्धा नहीं करेंगी। वित्त मंत्रालय के निर्देश के तहत सरकारी बीमा कंपनी एक-दूसरे के ग्राहक नहीं छीन सकतीं। पहले सरकारी बीमा कंपनियां कारोबार बढ़ाने के लिए कम प्रीमियम पर कवरेज की पेशकश करती थीं।


अब सरकारी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों से होगी। अधिकारी के मुताबिक, रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस कारोबार में सरकारी बीमा कंपनियों के नुकसान में काफी कमी आई है। लेकिन ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस कारोबार में प्रीमियम अभी और बढ़ाए जाने की जरूरत है। मौजूदा समय में देश में कुल ग्रुप हेल्थ इंश्योंरेस कारोबार में लगभग 80 फीसदी बाजार हिस्सेदारी पर चारों सरकारी बीमा कंपनियों का कब्जा है।

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