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Jim Cramer
दुनिया में डर कर किसी ने एक चवन्नी भी नहीं कमाई।
अच्छे रिटर्न के विकल्पों से लघु बचत में बेरुखी बढ़ी

तेजी से बदलते बाजार के माहौल में निवेशकों की प्राथमिकताएं भी तेजी से बदल रही हैं। म्यूचुअल फंड, एसआईपी, बांड आदि जैसे कर बचत और बेहतर रिटर्न के ऑफर के कारण निवेशकों का रुझान परंपरागत रूप से नेशनल सेविंग स्कीम (एनएसएस) से घटा है। मध्य प्रदेश जैसे राज्य में भी निवेशकों की रुचि इस ओर घटी है।


संस्थागत वित्त आयुक्त अशोक शाह ने कहा कि हां यह सही है कि प्रदेश में निवेशकों का रुझान इस ओर घटा है लेकिन कितना, यह बताना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि निवेशक अन्य बचत स्कीम और दूसरे अन्य म्यूचुअल फंड की ओर रुख कर रहे हैं। इस संबंध में बात करने पर वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउंटेंट और फायनेंशियल प्लानर मनोज शर्मा ने कहा कि एनएसएस सबसे सुरक्षित निवेश है लेकिन इसी कारण से इसमें मिलने वाला रिटर्न बहुत कम है।


इस कारण से निवेशक इस ओर आकर्षित नहीं हो रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर सरकार की प्राथमिकता भी बदली है। पहले सरकार इन योजनाओं को प्रोत्साहित करती थी और उधारी पर मिलने वाले इस जमा राशि पर ब्याज देती थी। लेकिन इस क्षेत्र में निवेश लगातार घटता जा रहा है।


शर्मा ने कहा कि आम लोगों के हित में सरकार को इस स्कीम के तहत नए प्लान अवश्य लाना चाहिए। चूंकि सरकार पर लोगों को भरोसा होता है जो निवेशक सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए तो यह स्कीम बेहतर है ही। वहीं, दूसरी ओर एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि देश में बीते कुछ सालों से कुछ स्थितियां बदली हैं।


चूंकि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा युवाओं का है और वे अच्छी आमदनी भी कमा रहे हैं इसलिए वे ज्यादा रिटर्न वाले रिस्की स्कीम में निवेश कर रहे हैं क्योंकि अभी वे रिस्क उठा सकते हैं। यहीं कारण है कि म्यूचुअल फंड और बांड प्राथमिकता में है। साथ ही एक अन्य कारण यह कि निजी कंपनियां काफी प्रचार प्रसार करती हैं जिससे उनकी स्कीम लोगों की नजर में होती है चूंकि सरकार लंबे समय से कोई नयी स्कीम नहीं ला रही है इसलिए नये निवेशकों का ध्यान इस ओर नहीं है।

  
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