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मुनाफा किसी कंपनी के लिए उसी तरह है जैसे एक व्यक्ति के लिए ऑक्सीजन।
SUV के चाहने वालो के लिए खुशखबरी

कवायद
कमजोर हो रहा है कंपनी का पैसेंजर कार पोर्टफोलियो
नई कार लांच करने की तैयारी में है टाटा मोटर्स
मिनी एसयूवी और नैनो का डीजल मॉडल करेगी लांच
इसके लिए 12 से 18 महीने करना पड़ेगा इंतजार

पिछले कुछ सालों में पुणे स्थित टाटा के पिंपरी प्लांट में प्रमुख जगह कॉमर्शियल व्हीकल ने ले ली है। इस प्लांट में कंपनी बस, ट्रक जैसे कॉमर्शियल व्हीकल की मैन्युफैक्चरिंग करने में लगी हुई है। आलम यह है कि कंपनी ने अपना सारा ध्यान कॉमर्शियल व्हीकल पोर्टफोलियो को विकसित करने में लगा दिया है जिसका खमियाजा पैसेंजर कार कारोबार को भुगतना पड़ रहा है। कंपनी की आखिरी कार जो काफी लोकप्रिय हुई थी वह थी इंडिका जो 1998 में लांच की गई। इसके बाद 2008 में कंपनी ने नैनो लांच की पर यह इंडिका के तरह लोकप्रिय नहीं हुई।

घरेलू बाजार में हुंडई और मारुति से मिल रही प्रतिस्पर्धा और कमजोर हो रही स्थिति के चलते टाटा मोटर्स मिनी एसयूवी बनाने की तैयारी में है। इसके साथ ही कंपनी अपने पैसेंजर कार कारोबार पर ध्यान केंद्रित करेगी।


दरअसल साल 2008 में नैनो लांच करने के बाद अब तक टाटा की पैसेंजर कार श्रेणी में कोई हलचल नहीं दर्ज की गई है। आलम यह है कि पिछले 18 महीनों से कंपनी के पैसेंजर कार कारोबार में भारी डिस्काउंट और सुस्ती का सिलसिला जारी है। ऐसे में कंपनी अपना पैसेंजर कार पोर्टफोलियो सुधारने के लिए प्रयास कर रही है। इसके तहत मिनी एसयूवी बनाने की तैयारी चल रही है। साथ ही कंपनी की भविष्य में नैनो का डीजल मॉडल लांच करने की योजना है।


टाटा मोटर्स के रिसर्च और डेवलपमेंट हेड टिम लेवर्टन ने कहा कि हम कुछ ऐसा विकसित करने की कोशिश में हैं जिसकी जबरदस्त प्रतिक्रिया मिलेगी। हालांकि इसके लिए 12 से 18 महीने का इंतजार करना होगा। उन्होंने बताया कि अगले पांच साल में कंपनी अपने पैसेंजर कार कारोबार में 75 अरब रुपये का निवेश करेगी। इस राशि का तीस फीसदी से कम मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को अपग्रेड करने में लगाया जाएगा बाकी का इस्तेमाल नए उत्पाद विकसित करने के लिए किया जाएगा।


गौरतलब है कि पैसेंजर कार श्रेणी में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए टाटा मोटर्स को फिलहाल नए कार मॉडल की जरूरत है। आलम यह है कि पिछले साल अप्रैल से नवंबर तक की अवधि में मारुति सुजुकी और हुंडई के मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते टाटा की कार बिक्री में 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी के कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट में जगुआर लैंड रोवर का 90 फीसदी योगदान रहा।

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