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Jim Cramer
दुनिया में डर कर किसी ने एक चवन्नी भी नहीं कमाई।
के्रडिट कार्ड के कर्ज जाल से निकलने के उपाय

क्रेडिट कार्डों से खरीदारी करने पर आपको भुगतान करने के लिए एक महीने से अधिक की अवधि मिलती है। साथ ही नकदी लेकर चलने का झंझट भी नहीं रहता। लेकिन क्रेडिट कार्ड से नकदी की निकासी, खरीदारी करने जैसा नहीं होता है। क्रेडिट कार्ड से पैसे निकालना बचत खाते से पैसे निकालने जैसा नहीं है।


यह ओवरड्राफ्ट खाते से पैसा निकालने जैसा है जहां आपको पैसा निकालने के दिन से ही ब्याज लगना शुरू हो जाता है। क्रेडिट कार्ड से कैश निकालने पर लगने वाली ब्याज दरें 2.5 प्रतिशत से 3.10 प्रतिशत प्रति माह तक हो सकती हैं। इसलिए ग्राहकों को चाहिए कि वे क्रेडिट कार्ड की इस सुविधा का लाभ तभी उठाएं जब कोई इमरजेंसी आ गई हो।


बैलेंस ट्रांसफर का सहारा
अगर आपने 3-4 क्रेडिट कार्ड पर उधार ले ही लिया है तो आप कुछ क्रेडिट कार्ड कंपनियों द्वारा पेश किए जाने वाले बैलेंस ट्रांसफर सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। बैलेंस ट्रांसफर एक ऐसी सुविधा है जिसके तहत आप 3-4 कार्डों का बैलेंस एक ही कार्ड पर ट्रांसफर कर सकते हैं। बैलेंस ट्रांसफर पर 3-6 महीने तक लगने वाला ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होता है।


इसलिए अगर आप 3-6 महीने की अवधि में भुगतान कर सकते हैं तो बैलेंस ट्रांसफर के विकल्प का चुनाव कर सकते हैं। अगर आप 3-6 महीने में भुगतान नहीं कर सकते हैं तो बेहतर है कि पर्सनल लोन लेकर आप क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान कर डालें क्योंकि पर्सनल लोन की ब्याज दरें आम क्रेडिट कार्ड की ब्याज-दरों से कम होती है।


क्या करें जब कर्ज बन जाए बोझ
ऐसी परिस्थिति में, जब आप क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान करने में खुद को असमर्थ पाते हैं, तुरंत क्रेडिट कार्ड कंपनी से संपर्क करें और सेटलमेंट योजना की बात करें। सेट्ïलमेंट योजना के अंतर्गत कंपनी आपको यह सुविधा देती है कि आप अपना भुगतान निश्चित किश्तों में 3-12 महीनों के बीच कर दें। सेट्ïलमेंट तब बहुत जरूरी हो जाता है जब आपका रिवॉल्विंग क्रेडिट 6 महीने से अधिक अवधि का हो गया हो। क्रेडिट कार्ड पर 2.5 से 3 प्रतिशत का ब्याज दर लगता है।


सेट्ïलमेंट प्लान क्रेडिट कार्ड के बकाए को ऋण में बदल देता है। इस ऋण पर आपको ब्याज अदा करना होगा। रिवॉल्विंग क्रेडिट को रोकने के लिए क्रेडिट कार्ड के बकाए को ऋण में बदलने पर भी ब्याज देना होगा। ब्याज दर ग्राहकों को देखते हुए तय किया जाता है। यह योजना ग्राहक के व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तैयार की जाती है।

  
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