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Jim Cramer
दुनिया में डर कर किसी ने एक चवन्नी भी नहीं कमाई।
बजट सत्र में पेश होगा खाद्य सुरक्षा बिल

सरकार की योजना
गरीबों को हर महीने 7 किलो चावल, गेहूं या फिर मोटे अनाज देने की गारंटी
3 रुपये प्रति किलो की दर से चावल और 2 रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं
गरीबों को एक रुपये प्रति किलो की दर से बाजरा देने का प्रावधान
गरीबी रेखा से ऊपर वाले परिवार में हर सदस्य को प्रति महीने 3 किलो अनाज

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा बिल को संसद के बजट सत्र में पेश किये जाने की संभावना है। खाद्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो. के वी थॉमस ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि संसद की स्थाई समिति द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा बिल पर अपनी संस्तुतियों चालू सप्ताह के अंत तक दिए जाने की उम्मीद है।


खाद्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के वी थॉमस ने स्वयं द्वारा लिखित पुस्तक फॉर द ग्रेनर्स के विमोचन के अवसर पर कहा कि संसद की स्थाई समिति की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा बिल में आवश्यक बदलाव किए जायेंगे।


उसके बाद इस विधेयक को कैबिनेट कमेटी में पेश किया जायेगा। खाद्य सुरक्षा बिल में खास बात यह है कि गरीबों को हर महीने 7 किलो चावल, गेहूं या फिर मोटे अनाज देने की गारंटी दी गई है।


गरीबों को 3 रुपये प्रति किलो की दर से चावल, 2 रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं और एक रुपये प्रति किलो की दर से बाजरा देने का प्रावधान है। इसके अलावा गरीबी रेखा से ऊपर रहने वाले परिवार के सदस्य को हर महीने 3 किलो अनाज मिलेगा, यह अनाज के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से आधी कीमत पर दिया जाएगा।


हालांकि बिल के लागू होने के बाद सरकार के वित्तीय घाटे में बढ़ोतरी होगी। इससे पहले साल में फूड सब्सिडी बिल 67,300 करोड़ रुपये से बढ़कर 94,973 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इस अवसर पर कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि मेरे पिछले 7-8 वर्ष के अनुभव के अनुसार देश का खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्री केरल राज्य से ही होना चाहिए।


प्रो. के वी थॉमस ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जलवायु में हो रहा बदलाव कृषि क्षेत्र के लिए चिंताजनक है। इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश में नारियल का मार्केटिंग सिस्टम ठीक नहीं है। उपभोक्ताओं को जहां ज्यादा दाम चुकाने पड़ते हैं वहीं उत्पादकों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है इसलिए इसमें सुधार की आवश्यकता है।

  
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