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Jim Cramer
काश! पैसे पेड़ पर उगते लेकिन पैसा कमाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।
निवेश का अनुशासित प्लेटफार्म है पेंशन प्लान

नए नियम
पेंशन की जरूरत को ध्यान में रखकर ही लें पेंशन प्लान 
रिटायरमेंट से पहले पेंशन प्लान में से पैसा नहीं निकाल सकेंगे
रिटर्न की गारंटी नहीं मिलेगी लेकिन मूल राशि सुरक्षित रहेगी
पेंशन प्लान देने वाली कंपनी से ही खरीदना होगी एन्युटी

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) की नई गाइडलाइंस के तहत जीवन बीमा कंपनियां पेंशन प्लान लांच कर रही हैं। जीवन बीमा कंपनियों का मानना है कि देश में लोगों की औसत आयु बढ़ रही है और सामजिक ढांचा बदल रहा है। पहले के संयुक्त परिवारों में माता-पिता की हर तरह की जरूरतों को पूरा करना बेटे का ही उत्तरदायित्व होता था। लेकिन मौजूदा समय में न्यूक्लियर परिवारों के दौर में अब हर व्यक्ति को सेवानिवृत्ति के बाद की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए एक कोष बनाना जरूरी हो गया है।


ऐसे में पेंशन प्लान इस वित्तीय जरूरत को पूरा करने के लिए एक अनुशासित प्लेटफार्म मुहैया कराता है। खास कर आम ग्राहकों के लिए, जो निवेश के विभिन्न विकल्पों को समझकर अपना एक बेहतर पोर्टफोलियो नहीं बना सकते हैं। नई गाइडलाइंस के तहत पेंशन उत्पाद में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं जो ग्राहकों की पेंशन जरूरतों के नजरिए से काफी अहम माने जा रहे हैं।


इसमें सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पेंशन प्लान सिर्फ पेंशन के मकसद से होना चाहिए, न कि शॉर्ट टर्म जरूरतों के लिए। यानि अब ग्राहक पेंशन प्लान मैच्योर होने से पहले पैसा लेकर नहीं निकाल सकेंगे। पहले ग्राहकों को सरेंडर करने पर 100 फीसदी पैसा मिल जाता था, लेकिन अब ग्राहकों को सरेंडर करने पर दो तिहाई फंड से एन्युटी (मासिक पेंशन प्लान) खरीदनी ही पड़ेगी।


एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट (मार्केटिंग प्रोडक्ट एंड डायरेक्ट चैनल्स) संजय त्रिपाठी के अनुसार पेंशन उत्पाद में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पहले ग्राहक पेंशन प्लान की मैच्योरिटी से पहले कभी भी पैसा लेकर निकल सकते थे। अब वे ऐसा नहीं कर सकते।
अब पेंशन प्लान सरेंडर करने पर भी ग्राहकों को दो तिहाई की एन्युटी खरीदनी पड़ेगी।


नई स्कीम में कंपनियां ग्राहकों को रिटर्न की कोई गारंटी तो नहीं देंगी, लेकिन वे ग्राहकों की मूलराशि की गारंटी जरूर देंगी। इस तरह से बीमा नियामक ने पेंशन प्लान में जोखिम को खत्म करने का प्रयास किया है। पहले के पेंशन प्लान में पूरा पैसा इक्विटी में डाल दिया जाता था। ऐसे में अगर बाजार धराशायी हुआ तो आपने जो 10 लाख रुपया जमा किया है, इस मूल राशि में भी कमी आ जाती थी। त्रिपाठी का कहना है कि इस तरह से अब ग्राहक इस बात के लिए आश्वस्त रह सकता है कि उनका मूलधन सुरक्षित रहेगा।


इसके अलावा यह ध्यान रखने की बात है कि पेंशन प्लान आपके बुढ़ापे की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने का फूल प्रूफ समाधान नहीं है। इसके साथ ही हम ग्राहकों को न्यू पेंशन स्कीम, म्यूचुअल फंड और पब्लिक प्रोविडेंट फंड में भी निवेश का सुझाव देते हैं। अगर आपके पास सरप्लस है तो आप निश्चित रूप से इस तरह के विकल्पों में निवेश करें।


संजय त्रिपाठी का कहना है कि पेंशन प्लान आपको लंबी अवधि में निवेश के लिए एक अनुशासित प्लेटफार्म मुहैया कराता है। खास कर ऐसे ग्राहकों के लिए, जिन्हें बाजार की पर्याप्त समझ नहीं है। इसके साथ ही जीवन बीमा कंपनियां पेंशन प्लान के जरिए लोगों में रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर जागरूकता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।


तेजी से बढ़ रही महंगाई के मद्देनजर पेंशन प्लान की सीमाओं के बारे में त्रिपाठी का कहना है कि महंगाई पर रिजर्व बैंक या वित्त मंत्रालय का किसी का नियंत्रण नहीं है। महंगाई की दर पिछले कुछ वर्षों से 7-8 फीसदी से भी ऊपर है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि देश की अर्थव्यवस्था कैसी है। इसके बावजूद यह उम्मीद की जाती है कि लंबी अवधि के निवेश से आप बेहतर स्थिति में होंगे।


बजाज लाइफ इंश्योरेंस के हैड (मार्केट मैनेजमेंट) रितुराज भट्टाचार्य का कहना है कि बदलाव के बाद अब पेंशन प्लान को अब पेंशन की जरूरतों के लिए स्ट्रक्चर किया गया है। अब पेंशन प्लान में किसी भी समय पैसे लेकर निकल लेने का लचीलापन नहीं है।


भारत में अब भी पेंशन प्लान का स्ट्रक्चर बहुत अपरिपक्व है। रिटायरमेंट के बाद कितना पैसा चाहिए, इसकी गणना बहुत कम लोग करते हैं। बहुत लोग 5-10 वर्ष के लिए सोचते हैं कि रिटायरमेंट के बाद जो पैसा मिलेगा, तब इस बारे में सोचेंगे। इसका कारण यह है कि पहले लोग घर खरीदते हैं, फिर बच्चों की शिक्षा।


पेंशन प्लान लोगों की प्राथमिकता में नहीं होता है। पेंशन प्लान में ग्राहकों को बाजार की अस्थिरता से बचाने के लिए जीरो फीसदी से अधिक रिटर्न का प्रावधान किया गया है। यह ग्राहकों के लिए काफी पॉजिटिव है। अब आपका फंड पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके साथ ही अब आपको इक्विटी का पूरा फायदा नहीं मिलेगा।


इसके अलावा पेंशन प्लान कंपलसरी सेविंग को बढ़ावा देता है। जीरो फीसदी से अधिक गारंटी रिटर्न का मतलब है कि यह बीमा कंपनियों के लिए बीच का रास्ता है। अब बीमा कंपनियां ज्यादा जोखिम नहीं ले सकती हैं। शुरूआती दौर में कंपनियां रिस्क ले सकती हैं लेकिन जब प्लान मैच्योरिटी की ओर बढ़ता है तो कंपनियों को बिना-जोखिम वाले विकल्पों में निवेश करना होगा।


भट्टाचार्य का कहना है कि बाजार में और पेंशन प्लान आने के बाद इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। हर कंपनी यह सुनिश्चित करना चाहेगी, उसके पेंशन प्लान का रिटर्न प्रतिस्पर्धी कंपनियों से बेहतर हो। कम डिस्पोजेबल इन्कम वाले ग्राहकों के लिए पेंशन प्लान की उपलब्धता के बारे में रितुराज का कहना है कि ऐसा नहीं है कि बीमा कंपनियो के प्लान सिर्फ एक लाख से ज्यादा मासिक आय वाले वर्ग के लिए हैं। यह कंपनी विशेष की रणनीति पर निर्भर करता है।


हमने, जो पेंशन प्लान फाइल किया है, इसमें सुनिश्चित किया गया है कि इसका प्रीमियम कम आय वाले लोग भी वहन कर सकें। भट्टाचार्य का कहना है कि पेंशन बहुत बड़ा सेगमेंट है। मौजूदा समय में निजी क्षेत्र बहुत बड़ा हो गया है। ऐसे में पेंशन की जरूरत बढ़ रही हैं। लोगों की औसत आयु बढऩे के साथ स्वास्थ्य पर आने वाले लागत भी बढ़ रही है। सामजिक सरंचना में बदलाव के कारण लोगों की अपने बुढ़ापे की जरूरतें खुद ही पूरी करनी हैं।

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