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Jim Cramer
दुनिया में डर कर किसी ने एक चवन्नी भी नहीं कमाई।
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डायरेक्ट कैश ट्रांसफर समय पर शुरू होने में संशय

इस स्कीम पर महज सांकेतिक रूप से काम शुरू होने के आसार

प्रॉब्लम
अभी तक संबंधित जिलों से लाभार्थियों की डिजिटाइज्ड सूची नहीं आई है केंद्र के पास
जिले - डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के लिए 43 जिलों का किया गया है चयन
स्कीम - इसके तहत 34 योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में जाएगा

सब्सिडी के डायरेक्ट कैश ट्रांसफर की केंद्र सरकार की योजना पर एक जनवरी से सांकेतिक रूप से भले ही कहीं काम शुरू हो जाए, लेकिन चयनित सभी 43 जिलों में इसके शुरू होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक संबंधित जिलों से लाभार्थियों की डिजिटाइज्ड सूची केंद्र के पास नहीं आई है। तब भी इसे लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय के अधिकारी जोर-शोर से लगे हुए हैं।


वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजना की प्रगति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया 'योजना को पहली जनवरी से लागू करने के लिए जोर-शोर से काम चल रहा है। उस दिन से यह योजना शुरू हो जाएगी।' हालांकि, इसी मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने 1 जनवरी 2013 से सभी चयनित जिलों में सब्सिडी की डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजना शुरू होने पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि सभी जिलों से अभी तक लाभार्थियों की डिजिटाइज्ड सूची नहीं मिली है।


कहीं-कहीं से पूरी सूची आई भी है तो उसकी छानबीन इसके मद्देनजर चल रही है कि संबंधित बैंक से लाभार्थियों के अकाउंट और आधार नंबर लिंक हुए हैं या नहीं। सरकार ने नए साल में देश भर के 43 जिलों में आधार नंबर के सहारे सब्सिडी की डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजना को लागू करने की मंशा जताई है। इसके तहत 34 योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में जाएगा।


एक अधिकारी के मुताबिक आंध्र प्रदेश के एक जिले में इस बारे में पूरी तैयारी की खबर मिली है। हो सकता है कि वहां केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश योजना की शुरुआत करें। इसके साथ ही कुछ अन्य जिलों में भी इस तरह की तैयारी पूरी हो चुकी है। लेकिन जहां तक सभी 43 जिलों की बात है तो वहां अभी तक लाभार्थी के आंकड़े ही डिजिटाइज्ड नहीं हुए हैं।


कहीं देखने में आ रहा है कि आधार कार्ड में किसी अन्य बैंक का अकाउंट जोड़ा गया है जबकि वहां किसी दूसरे बैंक को सब्सिडी ट्रांसफर की जिम्मेदारी मिली है। वहां जब तक संबंधित बैंक में खाता नहीं खोला जाता है, तब तक पैसा कैसे ट्रांसफर होगा।


फिलहाल जिन योजनाओं की सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते में जाएगी, उनमें से अधिकतर मानव संसाधन विकास विभाग की छात्रवृत्ति से जुड़ी हंै। लेकिन अभी तक मंत्रालय के पास ही लाभार्थी की पूरी डिजिटाइज्ड सूची नहीं आई है तो उसे वित्त मंत्रालय के पास कैसे भेजा जाएगा।


इसी तरह की दिक्कत अन्य मंत्रालयों में भी है। इनके मुताबिक सब्सिडी भले ही केन्द्र सरकार दे रही हो, लेकिन उनमें से अधिकतर योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों की है और राज्य से अभी तक केंद्र को आंकड़े सही-सही और पूर्णत: नहीं मिले हैं।

  
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