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दिसंबर से निराश बाजार को जनवरी से आस

शुरुआती बिकवाली - आरबीआई ने पॉलिसी दरों व सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे शुरुआती तौर पर बाजारों में बिकवाली रही। हालांकि, वर्ष 2013 की पहली तिमाही से मौद्रिक नीति को आसान बनाए जाने की उम्मीद बढ़ी है। - मिलन बाविशी,  रिसर्च प्रमुख, इनवेंचर ग्रोथ एंड सिक्युरिटीज

2013 से उम्मीद - जनवरी, 2013 में हमें पॉलिसी दरों में 0.5' की कटौती की उम्मीद है। साथ ही, साल 2013 की शेष अवधि में पॉलिसी दरों में 0.5' की कटौती और हो सकती है। अगर ग्रोथ, महंगाई व सरकार की पॉलिसी का ऐसा ही रुख जारी रहा तो आरबीआई निश्चित रूप से इसे समर्थन देगा। - मोतीलाल ओसवाल, सीएमडी, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जनवरी, 2013 से महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने का अनुमान जाहिर किए जाने से निवेशकों को अगले महीने से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ गई है। इसके चलते, निवेशकों ने ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील माने जाने वाले बैंकिंग व रियल्टी सेक्टर के शेयरों में जमकर खरीदारी की। इससे बांबे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक 120.33 अंक की बढ़त के साथ 19,364.75 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 38.90 अंक की मजबूती के साथ 5,896.80 अंक पर रहा।


आरबीआई ने आज हुई अपनी चालू तिमाही की मध्यावधि समीक्षा बैठक में रेपो रेट व रिवर्स रेपो रेट जैसी मुख्य पॉलिसी दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया। साथ ही, रिजर्व बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को भी पूर्व स्तर पर ही स्थिर रखा। विश्लेषकों के मुताबिक, रिजर्व बैंक का यह कदम उम्मीद के अनुरूप ही रहा है।


हालांकि, रिजर्व बैंक ने कहा है कि जनवरी, 2013 से महंगाई का दबाव कम होना शुरू होने की उम्मीद है। साथ ही, रिजर्व बैंक ने अगले माह से आर्थिक विकास पर फोकस करने और इसके रास्ते में आ रही बाधाओं को दूर करने की बात भी कही है। इससे निवेशकों को अगले माह से ब्याज दरों में कटौती होने की उम्मीद बंधी है।


उधर, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि बैंकिंग संशोधन विधेयक में से फ्यूचर्स ट्रेडिंग के उपबंध को हटा दिया जाएगा। इससे इस संशोधन विधेयक के आसानी से पारित हो जाने की उम्मीद बढ़ी है। इसके अलावा, अमेरिका में राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा टैक्स में 12 खरब डॉलर की बढ़ोतरी व खर्च में 12.2 खरब डॉलर की कटौती का नया प्रस्ताव पेश किए जाने से वहां तथाकथित फिस्कल क्लिफ के संकट से राहत मिलने की उम्मीद बंधी है।


इससे ग्लोबल स्तर पर बाजारों में मजबूती रही, जिसका फायदा घरेलू बाजारों को भी मिला। इनवेंचर ग्रोथ एंड सिक्युरिटीज के रिसर्च प्रमुख मिलन बाविशी ने कहा कि आरबीआई ने पॉलिसी दरों व सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे शुरुआती तौर पर बाजारों में बिकवाली रही। हालांकि, वर्ष 2013 की पहली तिमाही से मौद्रिक नीति को आसान बनाए जाने की उम्मीद बढ़ी है।


मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के सीएमडी मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि जनवरी, 2013 में हमें पॉलिसी दरों में 0.5 फीसदी की कटौती की उम्मीद है। साथ ही, साल 2013 की शेष अवधि में पॉलिसी दरों में 0.5 फीसदी की कटौती और हो सकती है। अगर ग्रोथ, महंगाई व सरकार की पॉलिसी का ऐसा ही रुख जारी रहा तो आरबीआई निश्चित रूप से इसे समर्थन देगा।


ग्लोबल स्तर पर देखें तो अमेरिका में बजट के मुद्दे पर बातचीत आगे बढऩे की उम्मीद में अधिकांश एशियाई बाजारों में तेजी रही। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया व ताइवान के मुख्य इंडेक्स 0.10 फीसदी से 0.51 फीसदी तक की बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि हांगकांग व सिंगापुर के बाजारों में हल्की गिरावट रही। दोपहर बाद यूरोपीय बाजारों में भी तेजी देखी जा रही थी। खबर लिखे जाते समय ब्रिटेन के एफटीएसई में 0.31 फीसदी, जर्मनी के डेक्स में 0.42 फीसदी व फ्रांस के सीएसी में 0.02 ' की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा था।


घरेलू स्तर पर बीएसई सेंसेक्स में शामिल 30 में से 23 कंपनियों के शेयरों में तेजी रही। भारती एयरटेल का शेयर 4.23 फीसदी, भेल का 4.14 फीसदी, टाटा स्टील का 3.76 फीसदी, हिंडाल्को का 2.66 फीसदी, सनफार्मा का 2.33 फीसदी, जिंदल स्टील का 2.07 फीसदी, विप्रो का 1.47 फीसदी, एलएंडटी का 1.36 फीसदी और टाटा मोटर्स का शेयर 1.31 फीसदी चढ़ गया। साथ ही एसबीआई में 1.19 फीसदी व एचडीएफसी में 1.15 फीसदी की तेजी रही। दूसरी ओर मारुति सुजुकी में 1.64 फीसदी व ओएनजीसी में 0.87 फीसदी की गिरावट रही।

ग्लोबल हालात - ग्लोबल स्तर पर देखें तो अमेरिका में बजट के मुद्दे पर बातचीत आगे बढऩे की उम्मीद में अधिकांश एशियाई बाजारों में तेजी रही। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया व ताइवान के मुख्य इंडेक्स 0.10 फीसदी से 0.51 फीसदी तक की बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि हांगकांग व सिंगापुर के बाजारों में हल्की गिरावट रही। दोपहर बाद यूरोपीय बाजारों में भी तेजी देखी जा रही थी।  खबर लिखे जाते समय ब्रिटेन के एफटीएसई में 0.31 फीसदी, जर्मनी के डेक्स में 0.42 फीसदी व फ्रांस के सीएसी में 0.02 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा था।

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