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सभी तरह के सौदे में मुनाफे से पहले सिद्धांतों को रखें,न कि सिद्धांतों से पहले मुनाफे को।
तेलंगाना पर फैसला एक माह में : शिंदे

आज तेलंगाना बंद
तमाम दलों के साथ बैठक के बाद घोषणा
टीआरएस नाखुश, आज बंद का आह्वान

बहुप्रतीक्षित तेलंगाना मुद्दे पर फैसला एक माह के भीतर ले लिया जाएगा। तेलंगाना पर सर्वदलीय बैठक के बाद शुक्रवार को केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने यह :घोषणा की। बैठक के नतीजे से नाखुश तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने शनिवार को तेलंगाना में बंद का आह्वान किया है।
शिंदे ने कहा, हमने विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों के विचार सुन लिए हैं।


एक माह के भीतर कोई निर्णय ले लिया जाएगा। बैठक में कांग्रेस, भाजपा, टीआरएस, भाकपा, माकपा, तेलुगु देशम, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन तथा वाईएसआर कांग्रेस के दो-दो प्रतिनिधि शामिल हुए।


इस बीच शिंदे ने युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके विरोध में टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने कहा कि कांग्रेस अगर चाहे तो आज शाम तक ही फैसला हो सकता है, शिंदे तीन साल में हजार बार आश्वासन दे चुके हैं। उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी और तेलंगाना सचिवालय कर्मचारियों के संघ ने टीआरएस के इस बंद के प्रति समर्थन जताया है।

बैठक बंद कमरे में
गृह मंत्री शिंदे ने बैठक की बातें बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, बैठक बंद कमरे में हुई है। इसमें पेश किए गए विचारों के आधार पर ही फैसला होगा। यह तेलंगाना मुद्दे पर अंतिम सर्वदलीय बैठक थी और मैं इसके नतीजों से संतुष्ट हूं।

शुक्रवार को हुई बैठक के नतीजे मंजूर नहीं हैं, हर पार्टी ने अपना पुराना रुख ही रखा। कोई नई बात नहीं हुई। यह बेकार साबित हुई।
के चंद्रशेखर राव , (प्रमुख, तेलंगाना राष्ट्र समिति)

कांग्रेस में दो राय - कांग्रेस की ओर से शामिल दोनों प्रतिनिधियों ने अलग विचार रखे। एक ने अलग तेलंगाना राज्य का समर्थन किया दूसरे ने विरोध। कांग्रेस के केआर सुरेश रेड्डी ने कहा कि पार्टी दो राज्यों के पक्ष में है। विरोधाभासी बयान पर कांग्रेस के रुख के बारे में पूछे जाने पर गृहमंत्री ने दखल दिया और कहा कि कांग्रेस प्रतिनिधि ने साफ कर दिया है कि पार्टी दो राज्यों के पक्ष में है।

तीन दल पक्ष में - भाकपा, टीआरएस और भाजपा ने अलग तेलंगाना राज्य को हरी झंडी दे दी। एआईएमआईएम ने आंध्र प्रदेश राज्य के विभाजन का विरोध किया, लेकिन कहा कि अगर केंद्र ऐसा करता है तो हैदराबाद नए राज्य की राजधानी होनी चाहिए और उसमें रायलसीमा भी होना चाहिए। हैदराबाद को केंद्र शासित प्रदेश नहीं बनाया जाना चाहिए।

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