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Warren Buffett
निवेश की दुनिया में भव‍िष्‍य के बजाय अतीत को देखना ज्‍यादा बड़ी समझदारी है।

ताकि पॉलिसी न हो लैप्स - इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस (ईसीएस) के जरिए समय पर बीमा प्रीमियम का भुगतान करना सुनिश्चित किया जा सकता है बीमा प्रीमियम भुगतान के लिए ईसीएस सुविधा चालू हो जाने पर, पॉलिसीधारक के बैंक द्वारा पूर्व निर्धारित तारीख को प्रीमियम काट लिया जाता है और इसे सीधे बीमाकर्ता को भेज दिया जाता है

श्री कृष्णन के पास एक चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी है और वह तिमाही आधार पर प्रीमियम का भुगतान करते हैं। वह प्रीमियम के भुगतान को लेकर बहुत ही समझदार हैं क्योंकि उन्होंने यह पॉलिसी अपनी बेटी की उच्च शिक्षा के लिए ली है। हालांकि, उन्हें अक्सर काम के सिलसिले में कहीं-न-कहीं जाना होता है और इसलिए वह अत्यंत व्यस्त रहते हैं। बीमाकर्ता द्वारा भेजे गये रिमाइंडर के बावजूद पॉलिसी के प्रीमियम के भुगतान में वह पहले ही दो बार देरी कर चुके हैं।


परिणामस्वरूप, उनकी पॉलिसी बीमा कंपनी द्वारा बंद किये जाने के कगार पर है। आज, हममें से अधिकांश लोगों के व्यस्त जीवन शैली के मद्देनजर, यह एक आम समस्या है। कृष्णन की समस्या महज एक उदाहरण है। कई कारणों से प्रीमियम के भुगतान में देरी हो सकती है, जैसे-चेक बुक की पर्ची खत्म हो जाना या निर्धारित तारीख को भूल जाना। कृष्णन और हम सब की समस्या का प्रभावी उत्तर है, ईसीएस या इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस। इसके जरिए एक बैंक से दूसरे बैंक में स्वचालित तरीके से पैसों को ट्रांसफर किया जा सकता है।


इसे इस प्रकार डिजाइन किया गया है ताकि किसी भी तरह के सावधिक भुगतान किये जा सकें, जैसे-बीमा प्रीमियम से लेकर यूटिलिटी बिल के भुगतान आदि। बीमा प्रीमियम भुगतान के लिए ईसीएस सुविधा चालू हो जाने पर, पॉलिसीधारक के बैंक द्वारा पूर्व निर्धारित तारीख को प्रीमियम काट लिया जाता है और इसे सीधे बीमाकर्ता को भेज दिया जाता है।


ईसीएस के जरिए प्रीमियम का भुगतान क्यों
चूंकि किसी भी बीमा पॉलिसी के लिए प्रीमियम का नियमित भुगतान महत्वपूर्ण है इसलिए ईसीएस के लिए सब्सक्राइब कर यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी भी तरह की देरी न हो। यह एक झंझट-रहित तरीका है, जो ग्राहक की सभी चिंताओं को दूर करता है और प्रीमियम भुगतानों का रिकॉर्ड रखता है। यह सुविधाजनक भी है चूंकि इसमें न तो फिजिकल ट्रांजेक्शन करना होता है और न ही इसके लिए किसी बैंक या ऑफिस में जाने की जरूरत होती है।


हालांकि, कई पॉलिसीधारकों को मौद्रिक लेन-देन के लिए एक स्वचालित प्रणाली के प्रयोग को लेकर संदेह हो सकता है, आप इस सुविधा का उपयोग करते हुए निश्चिंत रह सकते हैं, क्योंकि आरबीआई द्वारा ईसीएस की सख्ती से निगरानी की जाती है। पॉलिसीधारक के खाता और पॉलिसी संबंधी ब्यौरे को भी गोपनीय रखा जाता है। बीमा प्रीमियम के लिए ईसीएस हेतु सब्सक्राइब करना आसान भी है, चूंकि इस सुविधा के इस्तेमाल के लिए बैंक या बीमाकर्ता द्वारा किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता।


कैसे शुरू करें ईसीएस
ईसीएस के जरिए प्रीमियम के भुगतान की सुविधा का लाभ लेने के लिए, पॉलिसीधारक को ईसीएस मैंडेट फॉर्म भरना होता है, जिसे ऑनलाइन या बीमा संस्थान से खरीदा जा सकता है। ग्राहक द्वारा इस फॉर्म को भर दिये जाने और निरस्त चेक के साथ फॉर्म को बीमा कंपनी के पास जमा कर दिये जाने के बाद, बाकी की औपचारिकताएं बीमा कंपनी द्वारा बैंक के साथ पूरी कर ली जाती हैं। ऐसा कर पॉलिसीधारक बैंक को अधिकृत करता है ताकि वह निर्धारित तिथि को प्रीमियम काट ले।


ईसीएस सुविधा चालू हो जाने और पॉलिसीधारक के खाते से प्रीमियम की राशि कटना शुरू हो जाने के बाद, ग्राहक को बीमा कंपनी से प्राप्ति संबंधी सूचना मिलती है। ईसीएस सुविधा वर्तमान में चुनिंदा शहरों में उपलब्ध है, जो प्रत्येक बीमाकर्ता के लिए अलग है। आम तौर पर, अधिकांश बड़े और छोटे महानगर और टियर-2 शहरों में यह सुविधा उपलब्ध है। केवल ऐसी ही पॉलिसी के लिए ईसीएस भुगतान किया जा सकता है जिसके लिए प्रीमियम का भुगतान नहीं किया गया है।


यह बात भी ध्यान में रखी जानी चाहिए कि बैंक खाते में पर्याप्त राशि मौजूद हो। यदि ग्राहक पॉलिसी को बंद करना चाहता है या भुगतान के अन्य तरीके (ईसीएस को छोड़कर) अपनाना चाहता है, तो वह बीमाकर्ता के साथ-साथ बैंक को एक लिखित पत्र भेज कर ऐसा कर सकता है। आज के व्यस्त ग्राहकों के लिए भुगतान का यह तरीका वास्तव में एक आदर्श समाधान है।
- लेखक अवीवा लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ हैं।

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