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Richard Branson
जीवन में जो चीज रोमांचित करे उसे पूंजी में बदल देना ही उद्यमिता है।
सस्ते लोन के आड़े आई महंगाई

मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 8 फीसदी पर यथावत, सीआरआर में भी फेरबदल नहीं

मौद्रिक नीति का फोकस अब उन अवरोधों पर है जिससे तेज विकास संभव नहीं हो पा रहा है।  - डी. सुब्बाराव, आरबीआई गवर्नर
यह अच्छी बात है कि रिजर्व बैंक को अब नीतिगत ब्याज दरों में कमी की गुंजाइश दिख रही है। - रघुराम राजन, मुख्य आर्थिक सलाहकार

राहत अगले माह संभव
रिजर्व बैंक ने जनवरी महीने में नीतिगत ब्याज दरें घटाने के संकेत दिए हैं

उम्मीदें जो नहीं हुईं पूरी
रेपो रेट में कोई कमी नहीं की गई है। मतलब यह कि बैंकों को आरबीआई से सस्ता लोन अब भी नहीं मिल पाएगा। ऐसे में बैंक भी अपने ग्राहकों को सस्ता कर्ज देने के लिए फिलहाल आगे नहीं आएंगे।
सीआरआर में भी कोई कटौती नहीं की गई है। मतलब यह है कि बैंकों के पास कर्ज योग्य रकम बढ़ नहीं पाएगी। ऐसे में अर्थव्यवस्था के अहम सेक्टरों को ज्यादा कर्ज मिलना संभव नहीं हो पाएगा।

उद्योग जगत, बैंकों और मंत्रियों की मांगों की अनदेखी कर आरबीआई ने एक बार फिर नीतिगत ब्याज दरों जैसे रेपो रेट को घटाने से परहेज किया है। दरअसल, आर्थिक विकास की रफ्तार तेज करने के बजाय महंगाई थामने की जरूरत को आरबीआई गवर्नर डी. सुब्बाराव ने फिर तवज्जो दी है। मंगलवार को यहां पेश की गई मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में रेपो रेट को 8 फीसदी और सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) को 4.25 फीसदी पर यथावत रखा गया है। इसका मतलब यही है कि आरबीआई से बैंकों को अब भी सस्ता लोन नहीं मिल पाएगा।


ऐसे में बैंक भी अपने ग्राहकों को सस्ता लोन देने के लिए पहल करने से संभवत: संकोच करेंगे। हालांकि, संतोष की बात यह है कि रिजर्व बैंक ने जनवरी महीने में रेपो रेट घटाने के संकेत दिए हैं। मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा आगामी 29 जनवरी को पेश की जाएगी।
आरबीआई गवर्नर का कहना है कि महंगाई दर में गिरावट के हालिया रुख को ध्यान में रखकर मौद्रिक नीति का फोकस अब उन अवरोधों पर है जिससे विकास की रफ्तार को तेज कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है।


उन्होंने कहा, 'रिजर्व बैंक विकास और महंगाई के रुख पर लगातार करीबी नजर रख रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए ही वित्त वर्ष 2012-13 के लिए विकास और महंगाई के नवीनतम अनुमानों को आगामी समीक्षा के दौरान व्यक्त किया जाएगा।' दूसरे शब्दों में अगर कहा जाए तो चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के दौरान ही ब्याज दरों के मोर्चे पर उद्योग जगत, बैंकों और कर्ज लेने वालों को राहत मिल पाएगी। आरबीआई ने मंगलवार को पेश मौद्रिक नीति समीक्षा में मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी और बैंक रेट को भी 9 फीसदी पर यथावत रखा है।


आरबीआई ने अपनी समीक्षा में कहा है, 'वैसे तो थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर में थोड़ी कमी के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन खुदरा महंगाई दर अब भी अत्यंत उच्च स्तर पर विराजमान है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में शामिल अखाद्य इंडेक्स पर नजरें दौड़ाने से भी मंहगाई दबाव के लगातार जारी रहने का संकेत मिलता है।' मालूम हो कि नवंबर महीने में खुदरा महंगाई दर 9.9% आंकी गई है। आरबीआई ने अपनी समीक्षा में कहा है कि ग्लोबल आर्थिक परिदृश्य अब भी सही अर्थों में बेहतर नहीं हो पाया है।


मौद्रिक नीति समीक्षा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन ने कहा है, 'यह अच्छी बात है कि रिजर्व बैंक को अब नीतिगत ब्याज दरों में कमी की गुंजाइश दिख रही है।' मालूम हो कि थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर मेें कमी के रुख को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही थी कि रिजर्व बैंक मंगलवार को ही रेपो रेट को कुछ हद तक घटाने की घोषणा कर देगा।

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