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Warren Buffett
निवेश कोई खेल नहीं,जहां कोई बलवान किसी कमजोर को हरा दे
निवेश में जोखिम को बेवजह न दें तवज्जो

निवेशक इस बात के लिए ज्यादा चिंतित हैं कि उनकी पूंजी में अस्थिरता न आए हालांकि मुनाफे में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव होता रहता है। अच्छे मुनाफे के लिए उन्हें धैर्य रखना चाहिए


जोखिम और अस्थिरता
जोखिम और अस्थिरता में होता है फर्क
अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो आपके लिए जोखिम नहीं बल्कि उतार-चढ़ाव या अस्थिरता शब्द ज्यादा सटीक है
निवेश से पहले जानकारी और रिसर्च जरूरी है। इस प्रकार चुनी गई कंपनियों में निवेश में अस्थिरता के बावजूद ज्यादा जोखिम नहीं होता
गिरते हुए बाजार से घबराने की जरूरत नहीं अगर निवेश शोध के बाद किया गया है
निवेश की शुरुआत कभी भी की जा सकती है, नहीं होता कोई माकूल वक्त
मामूली मुनाफे पर बेचने की जरूरत नहीं, निवेश बनाए रखने में फायदा
लंबी अवधि के निवेश से होता है ज्यादा मुनाफा


ज्यादातर लोगों को यह बात मालूम नहीं होती है कि जब वे जोखिम शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसका क्या मतलब होता है। एक व्यापारी के लिए संभावित जोखिम घाटा हो सकता है। ऐसे में किसी जुआरी या सट्टेबाज के लिए जोखिम जरूर मौजूद है। अगर आप एक निवेशक है तो आपके  लिए जोखिम नहीं बल्कि उतार-चढ़ाव या अस्थिरता शब्द ठीक है।


ठीक उसी तरह जिस तरह उद्योग में जोखिम शामिल होते हैं। अगर आप सारी जानकारी के साथ शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो उसमें जोखिम नहीं केवल उतार-चढ़ाव होता है। इन शब्दों को एक दूसरे की जगह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जब लोग शेयर बाजार में निवेश करने की बात कर रहे हैं तो वे उस अस्थिरता की बात कर रहें है जो मुनाफा कमाने की प्रक्रिया से जुड़ी हुई है।


तो व्यक्ति को अस्थिरता और जोखिम में अंतर कैसे पता चलेगा? निवेशक को यह बात समझनी चाहिए कि आम तौर पर हम इस बात के लिए ज्यादा चिंतित हैं कि हमारी पूंजी में अस्थिरता न आए, हालांकि मुनाफे में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव होता है तो इससे ज्यादा दिक्कत नहीं है। हमें धैर्य रखना होगा जिससे हमें मुनाफा हो सके। अगर मुनाफे में कोई उतार-चढ़ाव होता है तो इससे हमें ज्यादा दिक्कत नहीं होने वाली है। इसके बावजूद आपको 14 से 20 प्रतिशत का रिटर्न मिलेगा। आइए, देखते हैं कि किस तरह निवेशक जोखिम शब्द को हद से ज्यादा तवज्जो देते हैं।


शेयर बाजार
चाहे घरेलू बाजार हो या अंतरराष्ट्रीय दोनों की विशेषताएं एक जैसी होती हैं। बाजार में नियमित तौर पर उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। बाजार का मतलब ही है दो पहलू। कुछ लोग खरीदना चाहते हैं और कुछ बेचना। यह एक विडंबना है। अगर कोई चीज इतनी ही अच्छी है तो व्यक्ति इसे बेचना क्यों चाहता है।


बाजार का अपना एक चक्र होता है जो समय समय पर खुद को दोहराता है। हर एसेट के लिए यह चक्र अलग होता है। अगर आपको एक बार पता चल जाए कि कौन श्रेणी से कितना मुनाफा हो सकता है तो आप इसका इतिहास देख कर इसके बारे में पता कर सकते हैं और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।


खुद का विश्लेषण ज्यादा अच्छा
खुद से विश्लेषण करके निष्कर्ष निकालना बेहद जरूरी है। उदाहरण के तौर पर अगर आपने किसी एफएमसीजी कंपनी के बारे में विश्लेषण किया है और इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि इस कंपनी का भविष्य अच्छा है और यह 15 फीसदी की दर से अगले कुछ दशकों तक वृद्धि करती रहेगी। यह निवेश की संभावनाएं खोजने का सबसे सुरक्षित तरीका है।


तो इसमें 25 फीसदी से  ज्यादा पैसा लगाने से क्यों डरना? ऐसे में पांच से दस साल की अवधि में आपके निवेश लाभांश और पूंजी विस्तार से टैक्स फ्री डिपॉजिट में बदल जाएंगे। हालांकि, यह सब रिसर्च और जानकारी के बगैर संभव नहीं है। आपको खुद में ही निवेश की स्किल विकसित करनी चाहिए।


खुद पर करें भरोसा
हममें से ज्यादातर लोग खुद पर भरोसा नहीं कर पाते हैं। शेयर बाजार हमारा दुश्मन नहीं बल्कि हम खुद अपने दुश्मन हैं। जब अच्छा निवेश 20 से 30 फीसदी नीचे हो तो घबराकर इसे कभी बेचना नहीं चाहिए। आपको समझना होगा कि यह सिलसिला लंबी अवधि तक जारी नहीं रहने वाला है। जब दाम में गिरावट हो तो यह खरीदने का वक्त है न कि अपने निवेश से बाहर निकलने का।


हम यह बात जानते तो हैं पर कभी इसका पालन नहीं करते हैं। अगर आप इस गिरावट से घबराकर इसे बेच  देंगे तो हो सकता है कि फिर से इस निवेश में कदम रखने के लिए आपको लंबा इंतजार करना पड़े। साथ ही अगर इसे 20 से 30 फीसदी मुनाफे पर बेचते हैं तो आप भविष्य में कई गुना ज्यादा मुनाफा कमाने से चूक जाएंगे।


इसे बेचे या फिर किसी और निवेश में कदम रखें। इस बात का निर्णय आपको खुद ही लेना होगा कि आखिर आपके पास जो पैसे हैं उसका सही इस्तेमाल आपको कैसे करना है। तो ऐसे में डरना जरूरी है पर अव्यवहारिक बरताव करना गलत है। आम तौर पर ऐसा जानकारी के अभाव में होता है। इसका समाधान निकालना बेहद जरूरी है।
- लेखक सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर और मुंबई स्थित ट्रांसेंड कंसल्टिंग के डायरेक्टर हैं।
kartik@transcend-india.com

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