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Jim Cramer
दुनिया में डर कर किसी ने एक चवन्नी भी नहीं कमाई।
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  • इस सम्मेलन में अमेरिका व भारत के सीर्इओ ले रहे हैं भाग
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काम की चीज है पावर ऑफ अटार्नी

पॉवर ऑफ अटार्नी या मुख्तारनामा बड़े काम की चीज है पर इस पर बात आगे बढाने के पहले यह जान लें कि आमतौर पर इस्टेट प्लानिंग के लिए तीन मुख्य उपकरण प्रयोग किए जाते हैं पहली है वसीयत दूसरी  ट्रस्ट का निर्माण  व तीसरी पॉवर ऑफ अटार्नी। इन तीनों के अपने अलग-अलग गुण हैं पर पॉवर ऑफ अटार्नी का योगदान कुछ अलग है।


 इसके कुछ और विकल्प
वसीयत मृत्यु के बाद ही काम में आती है। वसीयत में कोई व्यक्ति अपनी संपति, धन के प्रबंधन के प्रति अपनी इच्छाएं बताता है कि उसे उसकी मृत्यु के बाद किस तरह से किया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति बिना वसीयत किए स्वर्गवासी हो जाता है तो उसकी संपदा उसके उत्तराधिकारियों में कानून सम्मत रूप से बांट दी जाती है। ट्रस्ट जीवन में या वसीयत के जरिए बनाए जा सकते हैं वैसे ट्रस्टों का काफी फायदा भी होता है। कई मामलों में अगर ध्यान से प्रबंधित किया जाए तो इसका लाभ कर छूट में भी उठाया जा सकता है। साथ ही यह भी उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट के रहने पर पैसे व संपति का किसी प्रकार से दुरुपयोग भी होने की संभावना नहीं रह जाती।


आपके जीवित रहने पर ही
इस्टेट प्लानिंग का  तीसरा महत्वपूणर्् उपकरण यानी कि पॉवर ऑफ अटार्नी तो तभी काम करती है जब आप जिंदा हों। पॉवर ऑफ अटार्नी को भारतीय कानून में एक ऐसे कानूनी कागजात की संज्ञा प्रदान की गई है जो कि आपकी ओर से किसी को कोई काम संपादित करने के लिए या कोई कार्य करने के लिए, किन्हीं जिम्मेदारियों का निर्वाह करने के लिए दी जाती है। इसमें कई बार अपाइंटी यानी कि जिसे आपने मुख्तारनामा दिया है उसके अधिकार सीमित रहते हैं तो कई बार उसके अधिकार काफी बड़े रहते हैं।


अधिकार
आपने जिसे पॉवर ऑफ अटार्नी दी है वह आपकी ओर से किसी करार पर दस्तखत कर सकता है, कोई कांट्रैक्ट कर सकता है, आपके हेल्थ केयर से संबंधित फैसले ले सकता है, आपकी ओर से पैसे का लेन-देन कर सकता है और आपकी संपति को बेच भी सकता है। इसके साथ ही पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिए भी किसी की इस्टेट का प्रबंधन भी उसके अक्षम होने की दशा में किया जा सकता है।


दो प्रकार के मुख्तारनामा
यह भी जान लीजिए कि पॉवर ऑफ अटार्नी या मुख्तारनामा अमूमन दो प्रकार का होता है एक- जनरल पॉवर ऑफ अटार्नी-जीपीए और दूसरा स्पेशल पॉवर ऑफ अटार्नी-एसपीए। यहां पर यह भी जानना जरूरी है कि इसी साल अक्टूबर में एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने कहा है कि मुख्तारनामा धारक चेक बाउंस के बारे में मामला दर्ज करवाने का अधिकर रखता है।  इस मुख्तारनामा को हस्ताक्षरित व नोटोराइज्ड करवाना भी जरूरी है ताकि इसकी कानूनी अहमियत बनी रहे।


यह खत्म तब होती है जब इसे करने वाले ने समाप्त कर दिया हो, करने वाले की मृत्यु हो जाए या करने वाला दिवालिया हो जाए।  पॉवर ऑफ अटार्नी का उपयोग आप अपनी जरूरत के अनुसार कर सकते हैं। और यह भी ध्यान दें कि इसक ा उपयोग आप विशेषज्ञों की देखभाल में करें। वे ही आपको इसकी सलाह सही रूप से देंगे कि किन हालातों में पॉवर ऑफ अटार्नी काम करेगी और किन हालातों में पॉवर ऑफ अटार्नी काम नहीं करेगी।

  
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