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Henry Ford
ऐसा कारोबार जो सिर्फ पैसा बनाए,वह बेकार है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उठे ग्लोबल इकोनॉमी से जुड़े मुद्दे

बिजनेस ब्यूरो | Jan 24, 2013, 16:03PM IST
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उठे ग्लोबल इकोनॉमी से जुड़े मुद्दे

सवाल 5 लाख करोड़ डॉलर का
दावोस - यहां जुटे दुनियाभर के निवेशकों के लिए इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यह है कि आर्थिक संकट से जूझ रही विश्व अर्थव्यवस्था में वे राजस्व के रास्ते कहां तलाशें। सलाहकार फर्म एसेंचर के मुताबिक विश्लेषकों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए दुनिया की शीर्ष 1200 कंपनियों को हर साल अपने राजस्व में करीब पांच लाख करोड़ डॉलर का इजाफा करना होगा।

एसेंचर के ग्लोबल हेड (स्ट्रैटजी) मार्क स्पेलमैन के मुताबिक समस्या यह है कि शेयर बाजारों की कंपनियों से काफी ज्यादा उम्मीदें हैं। इस समय जो वैश्विक आर्थिक हालात हैं, उन्हें देखते हुए बाजारों की उम्मीदें काफी ऊंची हैं। स्पेलमैन के मुताबिक कंपनियों को उभरते बाजार और मध्य वर्ग से आगे सोचना होगा।

कॉमर्शियल रियल्टी में बढ़ेगा निवेश
दावोस - जोंस लांग लासेल (जेएलएल) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2030 तक खास कर एशिया प्रशांत क्षेत्र में कॉमर्शियल रियल्टी सेक्टर में निवेश एक लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा। वर्ष 2012 में इस क्षेत्र में 450 अरब डॉलर का निवेश हुआ था। विश्व आर्थिक संकट के बाद से ही रियल एस्टेट के मामले में एशिया प्रशांत क्षेत्र अन्य क्षेत्रों से काफी आगे है।

जेएलएल के सीईओ कॉलिन डायर ने कहा है कि आर्थिक संकट का असर रियल एस्टेट की कीमतों पर दिखा जरूर है लेकिन इसके बावजूद लोगों के लिए यह निवेश का पसंदीदा माध्यम है। रिपोर्ट के मुताबिक 2008 से एशिया प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक विकास की गति तेज रहने के कारण यूरोप और उत्तरी अमेरिका की तुलना में यहां रियल्टी में गतिविधियां काफी तेजी से बढ़ी हैं।

बैंकों को चाहिए नई स्ट्रैटजी
दावोस - अमेरिका के जेपी मॉर्गन और स्विट्जरलैंड के यूबीएस समेत दुनिया के शीर्ष बैंक आगे बढऩे के लिए नई रणनीति की तलाश कर रहे हैं। हालांकि उनका मानना है कि अगर बैंकों पर नियामकों की तरफ से ज्यादा नियंत्रण थोपा जाता है तो यह न केवल बैंकों के खिलाफ होगा बल्कि अर्थव्यवस्था और आम लोगों को भी इससे नुकसान पहुंचेगा।

यूबीएस चेयरमैन एलेक्स वेबर के मुताबिक वे उभरती अर्थव्यवस्थाओं और दूसरी ऐसी जगहों पर संभावनाएं तलाश रहे हैं जहां रिकवरी जारी है, भले ही इसकी गति धीमी हो। जेपी मॉर्गन के प्रमुख जेमी डिमॉन ने कहा कि बैंक अब भी अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी छवि को 'शैतान' की तरह प्रचारित किया जा रहा है।

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यहां जुटे दुनियाभर के निवेशकों के लिए इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यह है कि आर्थिक संकट से जूझ रही विश्व अर्थव्यवस्था में वे राजस्व के रास्ते कहां तलाशें।

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