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मुनाफा किसी कंपनी के लिए उसी तरह है जैसे एक व्यक्ति के लिए ऑक्सीजन।

आयकर रिटर्न फाइल करने की जरूरतों को समझें

बलवंत जैन | Jul 27, 2013, 00:03AM IST
आयकर रिटर्न फाइल करने की जरूरतों को समझें

कर छूट की मौजूदा सीमा फिलहाल दो लाख रुपये की है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर छूट की मौजूदा सीमा 2.5 लाख रुपये और जिन वरिष्ठ नागरिकों की उम्र 80 साल से ज्यादा है उनके के लिए कर छूट की यह सीमा पांच लाख रुपये है।

अगर आप पहली बार टैक्स का भुगतान कर रहे हैं तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने  की प्रक्रिया के बारे में पता होना चाहिए।  वित्त वर्ष खत्म हो चुका है। तो हमें उस साल का रिटर्न फाइल करना है जो साल बीत चुका है।

इस लेख के माध्यम से हम इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करने संबंधी बात करेंगे। इस आर्टिकल में इनकम टैक्स पर लागू  होने वाले कानून के संबंध में बात की जा रही है। इसमें और किसी मसले को कवर नहीं किया गया है।  

आईटी रिटर्न फाइल करने की जरूरत किसे है?
इनकम टैक्स के मामले में अकसर यह सवाल पूछा जाता है कि अगर नियोक्ता ने इसमें से टैक्स काट लिया है तो क्या रिटर्न फाइल करने की जरूरत है। मैंने अक्सर देखा है कि वेतनभोगी लोगों को हमेशा यह लगता है कि अगर उनके नियोक्ता ने आय से टीडीएस काट लिया है तो उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न भरने की कोई जरूरत नहीं है।

यह गलत है। टैक्स का भुगतान करना  और इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना दोनों ही अलग जिम्मेदारी है। आइए देखते हैं कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइन करने में कानूनी स्थिति का क्या योगदान है।  

आयकर अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के हिसाब से अगर किसी व्यक्ति की ग्रॉस टोटल इनकम कर छूट की सीमा से बाहर जाती है तो चाहे उसने टैक्स का भुगतान कर भी दिया हो तो भी उसे इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा। आयकर अधिनियम के अंतर्गत ग्रॉस टोटल इनकम का मतलब होता है चैप्टर वीआईए में दिए गए प्रावधानों की कटौती से पहले  की आय।

इसके अंतर्गत धारा 80सी, 80सीसीसी, 80सीसीडी, 80सीसीजी, 80डी, 80जी और 80जीजीए आदि। इन कटौती में प्रोविडेंट फंड (पीएफ), लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, ट्यूशन फीस, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) आदि की कटौती शामिल है। इसके अलावा नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस), होम लोन का रीपेमेंट, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, रेंट का भुगतान और राजीव गांधी इक्विटी स्कीम में निवेश से मिलनी वाली कटौती आदि शामिल है।  

उन मामलो में जहां इन सब कटौती के बाद टैक्सेबल इनकम कर छूट की सीमा से कम है तो भी आपको इनकम टैक्स फाइल करने की जरूरत पड़ सकती है। भले ही आपका कर दायित्व बनता हो या नहीं। कर छूट की मौजूदा सीमा फिलहाल दो लाख  रुपये की है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर छूट की मौजूदा सीमा 2.5 लाख रुपये और जिन वरिष्ठ नागरिकों की उम्र 80 साल से ज्यादा है उनके के लिए कर छूट की यह सीमा पांच लाख रुपये है।

आइए एक उदाहरण के माध्यम से यह समझते हैं। मान लीजिए कि फॉर्म 16 के अनुसार अगर आपकी टैक्सेबल सेलरी 2.5 लाख रुपये है। साथ ही अन्य स्रोत से आपकी 10,000 रुपये है जिससे आपकी ग्रॉस टोटल इनकम 2.6 लाख रुपये हो जाती है। जैसा कि आपने धारा 80सी के अंतर्गत एक लाख रुपये का निवेश किया है तो आपकी टैक्सेबल आय 1.6 लाख रुपये पर आ जाती है। ऐसे में आपके नियोक्ता को किसी तरह की टैक्स कटौती करने की जरूरत नहीं होगी।  

आपको यह लग रहा होगा, जैसा कि आपकी नेट इनकम कर छूट की सीमा से कम है तो आपके वेतन से कोई टैक्स नहीं काटा गया है और आपको इनकम टैक्स रिटर्न भरने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि आपको बता दूं कि कानून के अंतर्गत यह नजरिए सही नहीं है। हालांकि लोगों को अकसर ऐसा ही लगता है।  

तो क्या है लीगल स्टेटस?  
आपको एलआईसी, मेडिक्लेम इंश्योरेंस, हाउसिंग लोन रीपेमेंट और स्कूल फीस जैसी कटौती से पहले  अपनी सारी आय को जोडऩा होगा। अगर कटौती से पहले आपकी कुल आय कर छूट की सीमा से ज्यादा है तो आपको इनकम टैक्स फाइल करने की जरूरत पड़ेगी।

जैसा कि ऊपर दिए गए उदाहरण में साफ तौर पर बताया गया है कि भले ही आप पर कोई  कर देनदारी न हो या फिर टीडीएस रिटर्न क्लेम न करना हो, इसके बावजूद आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा।

हालांकि ऊपर दिए गए प्रावधान में एक अपवाद है कि अगर आप एक वेतनभोगी हैं और आपने अपने नियोक्ता के सामने आपने अभी सभी स्रोत से आने वाली आय का खुलासा कर दिया है और उसने इसमें से आपके नियोक्ता ने उपयुक्त टैक्स की कटौती कर ली है।

इसके अलावा आपकी आय पांच लाख रुपये से ज्यादा नहीं है। यह एसेसमेंट ईयर 2012-13 के लिए लागू था। मौजूदा एसेसमेंट ईयर के लिए अगर आप ऊपर दी गई शर्तों का पालन करते हैं तो आपको इनकम टैक्स भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें एक अहम बात यह है कि यह बात केवल वेतनभोगी लोगों पर लागू होती है।

मुझे रिटर्न कब फाइल करना चाहिए?  
ऊपर दी गई स्थिति के अनुसार अगर आपको इनकम टैक्स फाइल करना है तो 31 जुलाई 2013 इसकी देय तारीख है।  

अगर मैं 31 जुलाई को रिटर्न नहीं फाइल कर पाता हूं तो?
अगर आप कानून के मुताबिक दी गई तारीख पर रिटर्न नहीं फाइल कर पाते हैं, इसके बावजूद मार्च 31, 2014 तक रिटर्न फाइल किया जा सकता है। हालांकि जो तय तिथि है उसके बाद रिटर्न फाइल करने पर आप इसमें किसी तरह का फेरबदल नहीं कर सकते हैं।

इसके अलावा आपकी कुल आय पर कोई राशि देय है तो इस पर आपको ब्याज की राशि भी जुर्माने के तौर पर चुकानी होगी क्योंकि इसे फाइल करने में आपने देरी की है। पर आप अपना रिटर्न जरूर फाइल कर सकते हैं। अगर आपको कारोबार में , कैपिटल गेन या फिर किसी और तरीके का नुकसान हुआ है और आप इसे आने वाले सालों में कैरी फॉर्वर्ड करना चाहते हैं तो आपको 31जुलाई 2013 तक अपना रिटर्न भरना होगा वरना इसे कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जा सकेगा।  

आखिरी दिन तक अगर रिटर्न फाइल नहीं कर पाते हैं तो क्या
अगर 31 मार्च 2013 का रिटर्न आप 21 मार्च 2014 तक फाइल करते हैं तो आपको इस पर कोई मुआवजा नहीं देना होगा। हालांकि अगर आपकी आय पर कर देय है और आप इसे 31 मार्च 2014 तक नहीं फाइल करते हैं तो इनकम टैक्स ऑफिसर इसपर 5,000 रुपये की पेनाल्टी लगाएगा। इसके लिए आपको नोटिस भेजा जाएगा और आपको कारण बताना होगा।

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अगर आप पहली बार टैक्स का भुगतान कर रहे हैं तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया के बारे में पता होना चाहिए।

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