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Milton Friedman
किसी कारोबार का सामाजिक उत्तरदायित्व है कि वह अपने फायदे को बढ़ाए।

फेंरचाइजी लेने के लिए आसानी से मिलेगा लोन

आशुतोष वर्मा नई दिल्ली | Feb 06, 2013, 00:05AM IST
फेंरचाइजी लेने के लिए आसानी से मिलेगा लोन

और क्या प्रगति
फेंरचाइजी इंडस्ट्री को भी के्रडिट गारंटी फंड योजना में शामिल किए जाने पर बातचीत जारी
फेंरचाइजी सेक्टर को डायरेक्ट के्रडिट स्कीम योजना में शामिल करने पर भी चर्चा

देश भर में बढ़ते फेंरचाइजी कारोबार को देखते हुए स्मॉल इंडस्ट्री एंड डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) ने भारत की फेंरचाइजी एसोसिएशन के साथ करार करने पर बातचीत शुरू कर दी है। फेंरचाइजी चलाने वालों और फेंरचाइजी से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने वालों ने बैंकों एवं सिडबी के समक्ष एक प्रस्तुतीकरण पेश किया है जिसमें सेक्टर के बारे में जानकारी दी गई है।

सिडबी के उप प्रबंध निदेशक एन. के. मेनी ने 'बिजनेस भास्कर' को बताया कि आजकल हर जगह फें्रचाइजी का ही जमाना है। मैकडोनाल्ड, कैफे कॉफी डे, हल्दीराम, बीकानेर, प्रिया गोल्ड आदि कई कंपनियों की फें्रचाइजी लेने के लिए कई लोग आगे बढ़ रहे हैं। इसमें वे लोग भी हैं जो थोक में माल सप्लाई करते हैं।

मेनी ने बताया कि फें्रचाइजी इंडस्ट्री को भी के्रडिट गारंटी फंड योजना में शामिल किए जाने पर बातचीत हो रही है। एसोसिएशन की ओर से भी कुछ प्रस्ताव पेश किए गए हैं, जिनमें फें्रचाइजी उद्योग की रेटिंग करने से लेकर वित्तीय सहायता देने तक के प्रस्ताव हैं। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि फें्रचाइजी सेक्टर को डायरेक्ट के्रडिट स्कीम योजना में शामिल करने पर भी चर्चा हो रही है।

मेनी ने बताया कि देश के जीडीपी में तकरीबन 60 फीसदी हिस्सेदारी सेवा सेक्टर की है और छोटे एवं मझोले कारोबारी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए सिडबी की ओर से रिस्क कैपिटल और निरंतर वित्तीय प्रवाह उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

अब भी सेवा सेक्टर से जुड़े छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज प्रवाह काफी कम है। बैंकों को सर्विस सेक्टर को कर्ज देने में जोखिम महसूस हो रहा है। ऐसे में सेवा सेक्टर के लिए जोखिम मुक्त फंड में शामिल करने पर विचार हो रहा है।

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देश भर में बढ़ते फेंरचाइजी कारोबार को देखते हुए स्मॉल इंडस्ट्री एंड डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) ने भारत की फेंरचाइजी एसोसिएशन के साथ करार करने पर बातचीत शुरू कर दी है।

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