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Warren Buffett
निवेश की दुनिया में भव‍िष्‍य के बजाय अतीत को देखना ज्‍यादा बड़ी समझदारी है।

चुनिंदा सेक्टरों से बढ़ रही है बाजार की रफ्तार

Agency | Aug 15, 2013, 00:07AM IST

कंज्यूमर, फाइनेंस, आईटी व फार्मा सेक्टर के शेयरों की भारिता बढऩे का असर दिख रहा है एनएसई निफ्टी पर

घरेलू अर्थव्यवस्था की डांवाडोल स्थिति और डॉलर की तुलना में रुपये की बेहद खस्ता हालत के बावजूद भारतीय शेयर बाजार इन दिनों जनवरी, 2008 के अपने उच्चतम स्तरों के आसपास बने हुए हैं, जो कि कई लोगों के लिए भारी आश्चर्य की बात हो सकती है।

क्रिसिल रिसर्च की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी मुख्य वजह कंज्यूमर, फाइनेंस, आईटी व फार्मा जैसे सेक्टर की कंपनियों की नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी इंडेक्स में बढ़ी हुई भारिता है।

अपनी ताजा रिपोर्ट 2008 से 2013 : दो निफ्टी की कहानी में क्रिसिल रिसर्च कहा है कि मौजूदा समय में निफ्टी इंडेक्स अपने जनवरी, 2008 के अब तक के उच्चतम स्तर से महज छह फीसदी नीचे है। निफ्टी की इस मजबूती में कहीं भी देश की अर्थव्यवस्था की बेहद खस्ता हालत की कोई परछाई तक नहीं दिख रही है।

क्रिसिल रिसर्च ने कहा है कि इस बात का जवाब निफ्टी में शामिल कंपनियों में कंज्यूमर, निजी क्षेत्र की वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाली और आईटी व फार्मा जैसी निर्यात पर फोकस करने वाली कंपनियों की बढ़ती भारिता यानी वेटेज में है। निफ्टी में इन कंपनियों के शेयरों की कुल भारिता अब 65 फीसदी पर पहुंच गई है।

वर्ष 2008 में यह आंकड़ा महज 29 फीसदी पर हुआ करता था। दूसरी ओर, वर्ष 2008 के दौरान निफ्टी में निवेश से जुड़े मेटिरियल्स, इंडस्ट्रियल्स, एनर्जी, यूटिलिटीज व टेलीकॉम जैसे सेक्टरों की कंपनियों के शेयरों की भारिता 66 फीसदी पर हुआ करती थी। जुलाई, 2013 में इनकी भारिता घटकर महज 31' पर आ गई है।

किसी भी इंडेक्स में किसी स्टॉक की भारिता उसके मुक्त यानी फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण के हिसाब से तय होती है। फ्री-फ्लोट पूंजीकरण का सीधा या अर्थ यह है कि उक्त कंपनी के कितने मूल्य के शेयर बाजार में खरीद-फरोख्त के लिए उपलब्ध हैं। बीते पांच सालों के दौरान कंज्यूमर, आईटी व फार्मा सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में लगातार तेजी दर्ज की गई है।

इससे इन कंपनियों का कुल व फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण बढ़ा है और इसी वजह से निफ्टी में इनकी भारिता भी बढ़ गई है। इसी वजह से देश की खराब आर्थिक हालत के बावजूद निफ्टी 2008 के उच्चतम स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है।

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