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होम लोन से कर बचत के तरीके

सुरेश के नरूला | May 30, 2013, 01:57AM IST
होम लोन से कर बचत के तरीके

हममें से ज्यादातर लोगों का सपना होता कि या तो अपने लिए एक सुंदर से घर का निर्माण कराएं या फिर अपने पुराने घर को ही एक बार फिर से बनवाएं।

जब हम इन गतिविधियों में पडऩे की सोच रहें हों तो टैक्स से जुड़े मुद्दों के बारे में जानना बेहद जरूरी है। प्रॉपर्टी खरीदने के लिए या फिर इसकी मरम्मत करवाने के लिए अकसर लोग अपनी संपत्ति का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए वे होम लोन का सहारा नहीं लेते हैं। ऐसा न करने से व्यक्ति को टैक्स संबंधी फायदे नहीं मिल पाते हैं।

टैक्स संबंधी फायदे व्यक्ति को तभी मिलते हैं जब वह इन कामों के लिए होम लोन लेता है।
एक बार फिर से बता दूं कि होम लोन लेते वक्त हमें फाइनेंशियल प्लानिंग के पहलू को नहीं भूलना चाहिए। अगर हम नया घर खरीदना चाहते  हैं या फिर अपने घर का रेनोवेशन करना चाहते हैं तो इन सब चीजों को लेकर आयकर अधिनियम 1961 हमारा ख्याल रखता है।  

मूलधन का भुगतान  
अगर आप लोन का पुनर्भुगतान करते हैं तो धारा  80सी के तहत आपको सालाना एक लाख रुपये तक की टैक्स छूट का फायदा मिलता है। आप चाहे इस प्रॉपर्टी का इस्तेमाल रहने के लिए करें या फिर किराए पर देने के लिए, धारा  80सी के अंतर्गत दी जा रही इस छूट पर फर्क नहीं पड़ता है।

यह बात और है कि, आप अगर होम लोन घर के पुनर्निमाण के लिए ले रहे हैं तो मूलधन के भुगतान पर टैक्स छूट का फायदा नहीं मिलेगा। जिस साल घर  की खरीदारी की गई है उस साल स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस पर भी धारा  80सी के तहत टैक्स छूट क्लेम की जा सकती है।

लोन का ब्याज भुगतान  
अगर व्यक्ति प्रॉपर्टी खरीदने के लिए होम लोन लेता है तो इस पर किए जा रहे ब्याज भुगतान पर धारा 24(बी) के तहत टैक्स छूट का फायदा मिलता है। टैक्स छूट की सीमा इस बात पर निर्भर करेगी  कि आपने कर्ज खुद के रहने वाले घर पर लिया है या फिर ऐसे घर के लिए लिया है जिसे किराए पर देना  चाहते हैं।

सेल्फ ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी  
सेल्फ ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी की स्थिति में हाउस प्रॉपर्टी को नकारात्मक आय माना जाएगा। अगर आप प्रॉपर्टी के निर्माण के लिए कर्ज लेते हैं तो इससे आपकी ग्रॉस टोटल इनकम (जीटीआई) को सालाना डेढ़ लाख रुपये तक कम किया जा सकता है। अगर कर्ज प्रॉपर्टी की मरम्मत, रिनोवेशन और पुनर्निर्माण के लिए, लिया गया है तो इस पर केवल 30,000 रुपये तक की कर छूट का प्रावधान है।

किराए पर दी गई प्रॉपर्टी  
अगर आपको किराए के रूप में नियमित आय मिल रही है कि इसे रेंटल इनकम की श्रेणी में गिना जाएगा। इस स्थिति में घर के मालिक को इस पर टैक्स का भुगतान करना होगा।  इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है कि आपने  घर की मरम्मत में कितना खर्च किया है, आप रेंटल वैल्यू पर फ्लैट रेट से 30 फीसदी, कर छूट का फायदा उठा पाएंगे।  

किराए पर मानी गई प्रॉपर्टी
अगर आप अपना पहला घर खरीद चुके हैं और फिलहाल वहां रह रहे हैं और दूसरा घर खरीदना चाहते हैं तो अच्छी खबर यह है कि आप दूसरे घर की ईएमआई के पूरे ब्याज भुगतान पर टैक्स छूट का फायदा क्लेम कर सकते हैं। पहले घर के लिए आप सालाना 1.5 लाख रुपये तक के ब्याज भुगतान पर टैक्स छूट का फायदा क्लेम कर सकते हैं।

दूसरे घर के लिए आप ब्याज भुगतान की पूरी राशि पर टैक्स छूट का फायदा क्लेम कर पाएंगे। इसके लिए कोई ऊपरी सीमा नहीं है। आप जिस प्रॉपर्टी में रह रहे हैं उसके अलावा जो दूसरी प्रॉपर्टी है वो अगर खाली है तो माना जाएगा कि यह किराए पर है। ऐसे में आपको किराया मिले या न मिले पर आपको किराए की राशि पर टैक्स चुकाना होगा।

इस पर नगर निगम के कानून के अंतर्गत स्टैंडर्ड रेंट की गणना की जाएगी।  इसमें एक अहम बात यह है कि कर छूट का फायदा लेने के लिए आपके पास घर का पजेशन होना जरूरी है।  कहने का मतलब यह है कि, अगर यह प्रॉपर्टी निर्माणाधीन है तो आपको इसके ब्याज भुगतान पर टैक्स छूट का फायदा नहीं मिलेगा।

निर्माणाधीन घर पर टैक्स छूट  
निर्माणाधीन घर के संदर्भ में ब्याज की राशि पर धारा 24(बी) के तहत टैक्स छूट का फायदा तब तक नहीं मिलता है जब तक निर्माण जारी रहता है। धारा 24(बी) के तहत टैक्स छूट का फायदा क्लेम करने के लिए आपके पास घर का पजेशन और सर्टिफिकेट ऑफ ओनरशिप होना अनिवार्य है।

आप ब्याज की राशि पर कर छूट का फायदा तब तक क्लेम नहीं कर सकते हैं जब तक आपको घर का पजेशन नहीं मिल जाता। हालांकि पजेशन मिलने के बाद आप टैक्स छूट का फायदा अगले पांच साल में, पांच बराबर किस्तों में क्लेम कर पाएंगे।   

ज्वाइंट ओनर का मामला
अगर आपको ऐसा लगता है कि आपकी प्रॉपर्टी में केवल जीवनसाथी ही को-ओनर बन सकता है और उसे ही टैक्स छूट का फायदा मिलेगा तो आपको पूरी कहानी नहीं पता है। आप अपनी प्रॉपर्टी में अपने जीवनसाथी, माता-पिता या फिर भाई-बहन को भी को-ओनर बना सकते हैं और इस पर मूलधन और ब्याज के भुगतान  पर भी टैक्स छूट का फायदा मिलेगा। तो अगर आप अपने भाई अथवा बहन के साथ मिलकर प्रॉपर्टी खरीदते हैं और वह प्रॉपर्टी में को-ओनर भी है और लोन में को-बॉरोअर भी तो दोनों को टैक्स छूट का फायदा लोन के अनुपात में मिलेगा।

पांच साल से पहले प्रॉपर्टी की बिक्री
धारा 80सी के तहत टैक्स छूट का फायदा इस शर्त पर मिलता है कि प्रॉपर्टी को पांच साल से पहले नहीं बेचा जाएगा। अगर आप अपना घर पांच साल बीतने से पहले बेच देते हैं तो आपने धारा 80सी के तहत जो राशि टैक्स से बचाई है उसे आपकी आय  मानकर घर बेचने वाले साल के वेतन में जोड़ दिया जाएगा और इस पर टैक्स चुकाना होगा। इस स्थिति में इस पर लांग टर्म कैपिटल गेन भी चुकाना होगा।

दोस्तों से लिया जाने वाला लोन  
अगर आप अपने दोस्त या फिर परिवार के सदस्य से कर्ज लेना चाहते हैं तो भी आप धारा 24 के तहत ब्याज भुगतान पर सालाना 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट का फायदा क्लेम कर सकते हैं। हालांकि आप इसके मूलधन भुगतान पर धारा 80सी के तहत टैक्स छूट का फायदा क्लेम नहीं कर पाएंगे।

यह आपको तभी मिलेगा जब आप किसी बैंक या फिर अन्य वित्तीय संस्थान से कर्ज लेंगे। कहने का मतलब यह है कि ऐसा कोई जरूरी नहीं कि आप हमेशा बैंक से ही कर्ज लें।

सुरेश  के नरूला
सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर, प्रूडेंट एफपी, पंचकुला

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हममें से ज्यादातर लोगों का सपना होता कि या तो अपने लिए एक सुंदर से घर का निर्माण कराएं या फिर अपने पुराने घर को ही एक बार फिर से बनवाएं।

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