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राजीव गांधी स्कीम के लिए म्यूचुअल फंड उत्पादों की लगी लाइन

बिजनेस ब्यूरो | Jan 10, 2013, 01:09AM IST
राजीव गांधी स्कीम के लिए म्यूचुअल फंड उत्पादों की लगी लाइन

तीन मसौदे - कम से कम तीन म्यूचुअल फंड हाउसों ने सेबी के पास राजीव गांधी स्कीम पर फोकस करने वाले उत्पादों के ड्रॉफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट जमा कर दिए हैं। इनमें से दो सरकारी फंड हाउस एसबीआई व आईडीबीआई हैं। जबकि, निजी क्षेत्र के डीएसपी ब्लैकरॉक ने भी अपनी नई स्कीम का मसौदा सेबी के पास जमा किया है।
 

फंड हाउसों ने राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम (आरजीईएसएस) पर फोकस करने वाले म्यूचुअल फंड उत्पाद लांच करने की कवायद शुरू कर दी है। सरकार ने हाल ही में बाजार में पहली बार निवेश करने वाले निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम की घोषणा की थी। इस स्कीम के तहत निवेश करने पर कर छूट का भी प्रावधान है।

इस कवायद के तहत कम से कम तीन म्यूचुअल फंड हाउसों ने पूंजी बाजार नियामक सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के पास ऐसे उत्पादों के ड्रॉफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट जमा कर दिए हैं। इनमें से दो सरकारी फंड हाउस एसबीआई व आईडीबीआई हैं। जबकि, निजी क्षेत्र के डीएसपी ब्लैकरॉक ने भी अपनी नई स्कीम का मसौदा सेबी के पास जमा किया है।

जानकारों का कहना है कि कई अन्य फंड हाउस भी जल्द ही ऐसी स्कीमों के मसौदे सेबी के पास जमा करने जा रहे हैं। किसी भी नई म्यूचुअल फंड स्कीम को लांच करने से पहले इसका मसौदा सेबी के पास जमा कराना होता है। सेबी आम तौर पर तीन से चार सप्ताह के भीतर इस मसौदे को मंजूरी दे देता है।

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के एमडी एवं सीईओ निमेष शाह कहते हैं कि राजीव गांधी स्कीम से म्यूचुअल फंडों को देश के रिटेल निवेशकों के बीच पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस स्कीम से निवेशकों के बीच जागरूकता तो बढ़ेगी ही, साथ ही इससे रिटेल निवेशकों की पूंजी को उचित जानकारी के साथ पूंजी बाजारों की तरफ मोडऩे में भी मदद मिलेगी।

क्वांटम एसेट मैनेजमेंट कंपनी के सीईओ जिमी पटेल कहते हैं कि यह स्कीम पूंजी बाजार में पहली बार निवेश करने वालों के लिए है और इस मामले में देश में भरपूर संभावनाएं मौजूद हैं। लेकिन, अभी तक फंड हाउसों को यह पूरी तरह पता नहीं चल पाया है कि उन्हें किन लोगों को लक्ष्य बनाना है।

साथ ही, स्कीम का लाभ उठाने के लिए डिमैट अकाउंट होना भी जरूरी है। इसी वजह से केवल तीन फंड हाउसों ने ही ड्रॉफ्ट मसौदे दाखिल किए हैं। जानकारी के मुताबिक, डीएसपी ब्लैकरॉक ने तो इस स्कीम के लांच होने के कुछ दिनों के भीतर ही अपना ड्रॉफ्ट मसौदा दाखिल कर दिया था। जबकि, आईडीबीआई व एसबीआई ने अपने मसौदे पिछले सप्ताह ही जमा किए हैं।

गौरतलब है कि सेबी ने पिछले माह ही इस स्कीम को औपचारिक रूप से लांच किया था। इस स्कीम के तहत पूंजी बाजार में पहली बार 50,000 रुपये तक का निवेश करने वालों के लिए कर छूट का प्रावधान किया गया है। लेकिन, ऐसे निवेशक की सालाना सकल आय 10 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

पीएसयू में हिस्सेदारी घटाने पर सहमत हुई सरकार
मुंबई - सरकार ने सेबी को कहा है कि वह इसके मानकों के अनुरूप अगस्त, 2013 तक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हिस्सेदारी घटा लेगी।

सेबी ने अगस्त तक पीएसयू में 10% व जून तक निजी कंपनियों में 25' पब्लिक शेयरहोल्डिंग सुनिश्चित करने का आदेश दिया हुआ है। सेबी चेयरमैन यू. के. सिन्हा ने बुधवार को यहां एसोचैम के एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि सरकार ने इस बारे में सेबी को सूचित कर दिया है।

उन्होंने कहा कि पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के लिए सेबी ने कई नए तरीके घोषित किए हैं। इसके बावजूद अगर कोई मुद्दा सामने आता है तो इस पर विचार किया जा सकता है। सिन्हा ने बताया कि बाजारों में गलत गतिविधियों पर लगाम लगाने के नए मानक लागू करने के बाद से बाजारों में उठापटक कम हुई है। (ब्यूरो)

एसआरओ के लिए सेबी ने जारी की अधिसूचना
मुंबई - म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार के रेगुलेशन की कवायद के तहत पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गेनाइजेशन (एसआरओ) के गठन के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित कर दिए हैं।

मंगलवार को इसे लेकर जारी की गई अधिसूचना में सेबी ने कहा है कि यह रेगुलेशंस आज से प्रभावी हो गए हैं। अब म्यूचुअल फंडों की एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के साथ जुड़े डिस्ट्रीब्यूटरों व पोर्टफोलियो मैनेजरों का रेगुलेशन इन्हीं दिशानिर्देशों के आधार पर होगा।

सेबी ने पिछले साल अगस्त में अपनी म्यूचुअल फंड एडवायजरी कमेटी के प्रस्ताव के आधार पर एक एसआरओ के गठन का फैसला लिया था। डिस्ट्रीब्यूटरों के लिए कोई रेगुलेटर न होने व मिस-सेलिंग की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। (प्रेट्र)

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