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नियम नंबर एक: पूंजी को खोना नहीं चाहिए, नियम नंबर दो: पहले नियम को ना भूलें।

होम लोन लेने से पहले सुविधाओं की करें पड़ताल

ब्रिजेश परनामी | Aug 23, 2013, 12:25PM IST
होम लोन लेने से पहले सुविधाओं की करें पड़ताल

आज जब सब चीजों की कीमतें आसमान छू रहीं हैं ऐसे में रियल एस्टेट को आज भी भारतीय बाजार में एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति के रूप में देखा जा रहा है। रियल एस्टेट में निवेश लाभ की गारंटी नहीं है।

संक्षेप में कहा जाए तो, रियल एस्टेट में जहां एक ओर फायदा है वहीं दूसरी ओर जोखिम की संभावनाएं भी बनी रहतीं हैं। बदलते वक्त के दौर में कम लागत के हाउसिंग फाइनेंस की भूमिका भी बढ़ी है। इसी बाजार में किफायती आवास, सामाजिक आवास, सार्वजनिक आवास एवं कम लागत के आवास जैसे शब्दों का चलन बढ़ गया है।  

सार्वजनिक आवास यानि पब्लिक हाउसिंग का तात्पर्य सरकार अथवा सार्वजनिक प्राधिकरणों के द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले आवास के प्रावधानों से है। सामाजिक आवास यानि सोशल हाउसिंग का तात्पर्य भी कुछ-कुछ सार्वजनिक आवास से मिलता-जुलता ही है।

किफायती आवास यानि अफोर्डेबल हाउसिंग वह है जिसमें उपभोक्ता के द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत उसकी मासिक आय के 30 से 35 फीसदी के आस पास होती है।

कम लागत के आवास यानि लो कॉस्ट हाउसिंग का संदर्भ, निर्माण एवं फाइनेंसिंग की उन विधियों से हैं, जिनमें आवास की लागत को कम किया जा सकता है।  

ये सभी शब्द अंतत: उन प्रयासों को दर्शाते हैं जिनके माध्यम से उन लाखों लोगों को घर उपलब्ध कराया जाता है, जो अपने घर के लिए कीमत चुकाने में सक्षम नहीं हैं। आबादी के बढऩे के साथ, परिवार छोटे होते जा रहें हैं। ऐसे में दुनिया भर में आवास की मांग तेजी से बढ़ रही हैं, और कीमतें भी आसमान छू रहीं हैं। इन ऊंची कीमतों के साथ अपना घर खरीदने का सपना आम जनता की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।

जहां एक ओर रोटी, कपड़ा और मकान को जीवन की मूल आवश्यकताएं माना जाता रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज के एक वर्ग के लिए घर आज ऐसी विलासिता बन गया है, जिसकी कीमत चुका पाने में वह समर्थ नहीं है। इसलिए अफोर्डेबल हाउसिंग की जरूरत महसूस की जा रही है।

अफोर्डेबल हाउसिंग के दो मुख्य अवयव हैं- घर की कम लागत और इस लागत को चुका पाने के लिए फाइनेंसिंग के किफायती साधन। यहां यह बताना जरूरी नहीं कि, घर की कीमत को कम करना एक बेहद महत्वपूर्ण अवयव है, चूंकि जब तक घर की लागत को कम नहीं किया जाएगा तो इसके लिए फाइनेंस के सस्ते साधन जुटाना संभव नहीं है।

आंकड़े दर्शाते हैं कि इसी वजह से हाउसिंग लोन के बाजार के 18-20 फीसदी तक बढऩे की उम्मीद की जा रही है। घर की लागत को कम करने के भी कई अवयव हैं- जैसे घर का क्षेत्रफल, निर्माण की विधियां जो निर्माण की लागत को कम कर सकतीं हैं तथा घरों को सुदूर स्थानों पर बनाना जहां जमीन की कीमतें कम हैं।

अफोर्डेबल हाउसिंग का एक और महत्वपूर्ण अवयव है हाउसिंग फाइनेंस। घर एक ऐसी संपत्ति है जिसमें फाइनेंस लगभग हर मामले में अनिवार्य है। संपत्ति की खरीद के लिए के लिए फाइनेंस अक्सर समय के साथ मेल नहीं खाता जैसे मुझे एक घर की जरूरत तो अभी है परन्तु इसके लिए धन मैं बाद में चुका सकूंगा।

वास्तव में ऐसा ही होता है, फाइनेंसिंग और समय एक दूसरे से मेल नहीं खाते। इस परिस्थिति को ऋण के द्वारा संतुलित किया जाता है। घर के मामले में, ऐसी संभावनाएं बिल्कुल स्पष्ट होतीं हैं। आपको ऋण लेते समय या घर के फाइनेंस की सेवाएं प्राप्त करते समय कुछ जरूरी चीजों को ध्यान में रखना चाहिए:

होम लोन ट्रांसफर
कर्ज को ट्रांसफर कराने से पहले, आपको जांच लेना चाहिए कि बैंक में दरों को कम करने की क्षमता कितनी है, और बाजार में दरों के गिरने पर क्या बैंक भी दरों को कम करेगा। क्योंकि कुछ बैंक आरबीआई द्वारा दरों में बढ़ोतरी के साथ ही अपनी ब्याज दरों को भी बढ़ा देते हैं परन्तु उपभोक्ता को दरों के गिरने पर अगर कोई फायदा पहुंचना है, तो उस स्थिति में दरों को कम करने में ज्&52द्भ;यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं।  

होम लोन की शिफ्टिंग
अगर आप किसी नए उपभोक्ता की तुलना में ज्&52द्भ;यादा दर चुका रहे हैं तो बैंक से बात कर आप कम ब्याज दर में शिफ्ट करने की बात कर सकते हैं। जहां कुछ बैंक ऋण की बकाया राशि के 25-50 पॉइंट्स पर चार्ज करते हैं, वहीं अधिकांश बैंक बाजार की दर एवं आपके द्वारा चुकाई जाने वाली दर के बीच के अंतर के आधार पर गणना करते हैं।

विकल्प का चयन
एक और महत्वपूर्ण कारक है फ्लोटिंग और फिक्स्ड दरों के बीच का अंतर तथा उस समय में मौजूदा ब्याज की दरों का स्तर। अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि ब्याज की मौजूदा दरें उच्च हैं और उनके कम होने की संभावना है तो उसे फ्लोटिंग दरों के आधार पर ऋण लेना चाहिए।

ज्वॉइंट होम लोन के फायदे
हालांकि फिक्सड दरों पर मिलने वाला ब्याज थोड़ा महंगा होता है, यह दरों के उतार-चढ़ाव के कारण होने वाले जोखिम की क्षतिपूर्ति करता है। परन्तु कुछ बैंक केवल एक निर्धारित अवधि के लिए ही फिक्स्ड ब्याज दरों की पेशकश करते हैं।

तय अवधि के बाद, ऋण की दरों को बाजार की मौजूदा दरों के अनुरूप फिर से बदल दिया जाता है। उदाहरण के लिए एक बैंक के द्वारा दिया गया फिक्स्ड हाउसिंग लोन, फ्लोटिंग दरों की तुलना में ऊंची दरों पर दिया जाता है, जबकि दोनों को पांच साल की समान अवधि के लिए लिया गया है।

ब्याज की दरों में हर पांच साल के बाद संशोधन किया जाता है तथा दोबारा निर्धारित की गई दरें फिक्स्ड मार्जिन के द्वारा मौजूदा फ्लोटिंग दरों की तुलना में अधिक होती हैं। अफोर्डेबल हाउस एवं कर्ज के अलावा मॉगेज भुगतान के भी विकल्प होते हैं। वास्तव में देश भर में अधिकांश डेवलपर्स मॉगेज भुगतान की सुविधाएं उपलब्ध करा रहें हैं।

इसका स्पष्ट लाभ यह है कि जब आप दरें निर्धारित करते हैं, पुनर्भुगतान की दरें, ब्याज की दरों के बढऩे के साथ नहीं बढ़ेंगी।

इसलिए आपको पहले से पता होगा कि आपका पुनर्भुगतान एक निर्धारित अवधि के लिए है और आप आमतौर पर अपने लिए पांच साल की अवधि का चुनाव कर सकते हैं। अगर आपके पास धन की कमी है, तो यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। अधिकांश बैंक अपने पास इस अधिकार को सुरक्षित रखते हैं कि वे विभिन्न परिस्थितियों में फिक्स्ड दरों को बदलने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

बाजार की स्थिति में बदलाव होते रहते हैं। इसके अलावा, रियल एस्टेट से जुड़े सभी लोग रेपो रेट में आरबीआई कट का स्वागत करते हैं।

रेपो रेट में कटौती होने से घर के खरीदार को भी सस्ती दरों पर आवास ऋण उपलब्ध हो सकता है। इससे कम आय के आवास ऋण में 20-30 फीसदी प्रति वर्ष की बढ़ोतरी होती है और मांग बढ़ती है। हालांकि मार्च 2012 के बाद से कुल बैंक ऋण में आवास ऋण का योगदान कम हुआ है क्योंकि इस दौरान वृद्धि दर कम हुई है।

एक व्यक्ति अपने कार्यकाल के दौरान धन कमाता है और संभवतया लगभग दो दशकों तक बचत करता है ताकि जब वह रिटायर हो जाए तो अपने खुद के घर में रह सके। परन्तु सवाल यह है कि आप जब नौकरी कर रहें हैं, उन सालों में भी आपको रहने के लिए अपना घर चाहिए। तो जरूरी है कि फाइनेंस की ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं जो इस असंतुलन को दूर कर सकें।

ब्रिजेश परनामी
सीईओ (डिस्ट्रीब्यूशन) डेस्टीमनी एंटरप्राइजेज, प्राइवेट लिमिटेड

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