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Warren Buffett
निवेश की दुनिया में भव‍िष्‍य के बजाय अतीत को देखना ज्‍यादा बड़ी समझदारी है।

अब बाजार रेंज-बाउंड ही रहने की संभावना

बिजनेस भास्कर/एजेंसियां नई दिल्ली/मुंबई | Feb 16, 2013, 00:05AM IST
अब बाजार रेंज-बाउंड ही रहने की संभावना

बड़ी खबर का अभाव - औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े व महंगाई दर के आंकड़े जारी हो चुके हैं। अब बजट तक बाजार में कोई महत्वपूर्ण डेवलपमेंट होने की संभावना दिखाई नहीं दे रही है। किसी बड़े आंकड़े के न आने की स्थिति में अब बाजार रेंज-बाउंड ही रहने की संभावना है। इसके बाद बजट के हिसाब से बिल्ड-अप शुरू होगा।

- कौशिक दानी फंड मैनेजर,पियरलेस म्यूचुअल फंड

तिमाही नतीजों का सीजन खत्म होने को है और महंगाई व औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े भी आ चुके हैं, ऐसे में अब घरेलू बाजारों पर बजट का दबाव दिखाई देने लगा है। इसी दबाव में हुई सतर्कता भरी बिकवाली के चलते शुक्रवार को बांबे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक 29.03 अंक की गिरावट के साथ 19,468.15 अंक पर बंद हुआ।

गुरुवार को भी सेंसेक्स में 111 अंक की गिरावट दर्ज की गई थी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी में भी 9.55 अंक की गिरावट दर्ज की गई और यह 5,887.40 अंक पर बंद हुआ।

ब्रोकरों का कहना था कि तिमाही नतीजों की सीजन खत्म होने और महंगाई व आईआईपी आंकड़ों के आने के बाद अब बाजार में बजट से पहले कोई बड़ा ट्रिगर दिखाई नहीं दे रहा है।

इसी वजह से, विशेष रूप से घरेलू फंड इस मौके को मुनाफा काटने के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इन हालात में, बाजार इन्हीं स्तरों पर सीमित दायरे में कुछ दिनों तक कारोबार करता रहेगा और कंसोलिडेशन होता रहेगा।

इस माहौल में आम निवेशकों का रुख भी सतर्कता भरा हो गया है और वे खरीदारी के बजाय मुनाफावसूली पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। इस बीच, कई दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजे भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं, जिससे स्टॉक विशेष में बिकवाली देखी गई।

डॉ. रेड्डीज के शेयर का भाव 3.55 फीसदी, डीएलएफ का 2.03 फीसदी, बजाज ऑटो का 1.41 फीसदी और मारुति सुजुकी के शेयर का भाव 0.81 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार की दोनों दिग्गज कंपनियों रिलायंस इंडस्ट्रीज व इंफोसिस में तकरीबन एक फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

पियरलेस म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर कौशिक दानी ने कहा कि औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े व महंगाई दर के आंकड़े जारी हो चुके हैं। अब बजट तक बाजार में कोई महत्वपूर्ण डेवलपमेंट होने की संभावना दिखाई नहीं दे रही है। किसी बड़े आंकड़े के न आने की स्थिति में अब बाजार रेंज-बाउंड ही रहने की संभावना है।

इसके बाद बजट के हिसाब से बिल्ड-अप शुरू होगा। उधर, ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि निजी निवेश को बढ़ाने वाली नीतियों को अपनाने व महंगाई पर लगाम लगाने से ही भारत अपने चालू खाता घाटे को कम कर सकता है। सितंबर, 2012 की तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा 5.3 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।

ग्लोबल स्तर पर देखें तो जी20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक से पहले एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखा गया। हांगकांग व दक्षिण कोरिया के बाजार 0.08 फीसदी से लेकर 0.13 फीसदी तक की बढ़त के साथ बंद हुए। जबकि, जापान व सिंगापुर के बाजारों में 1.2 फीसदी तक की गिरावट देखी गई। दोपहर बाद के कारोबार में यूरोपीय बाजारों का भी यही हाल था।

खबर लिखे जाते समय ब्रिटेन का एफटीएसई 0.06 फीसदी और फ्रांस का सीएसी 0.01 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। जबकि, जर्मनी के डेक्स में 0.19 फीसदी की गिरावट देखी जा रही थी।

घरेलू स्तर पर बीएसई सेंसेक्स में शामिल 30 में से 16 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ। डॉ. रेड्डीज में 3.55 फीसदी, बजाज ऑटो में 1.41 फीसदी, टाटा स्टील में 1.21 फीसदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 1.20 फीसदी, इंफोसिस में 0.99 फीसदी और जिंदल स्टील में 0.96 फीसदी की गिरावट रही।

दूसरी ओर टाटा मोटर्स के शेयर का भाव 2.48 फीसदी, टाटा पावर का 1.79 फीसदी, भारती एयरटेल का 1.23 फीसदी, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज का 1.22 फीसदी, गेल इंडिया का 0.99 फीसदी और सन फार्मा के शेयर का भाव 0.94 फीसदी चढ़ गया।

कुल मिलाकर बाजार की धारणा नकारात्मक रही। बाजारों में सूचीबद्ध कुल कंपनियों में से 1,234 के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों की संख्या 896 पर रही। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को भी घरेलू शेयरों में 321.26 करोड़ रुपये की शुद्ध लिवाली की।

ग्लोबल हालात - ग्लोबल स्तर पर देखें तो जी20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक से पहले एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखा गया। हांगकांग व दक्षिण कोरिया के बाजार 0.08 फीसदी से लेकर 0.13 फीसदी तक की बढ़त के साथ बंद हुए। जबकि, जापान व सिंगापुर के बाजारों में 1.2 फीसदी तक की गिरावट देखी गई।

दोपहर बाद के कारोबार में यूरोपीय बाजारों का भी यही हाल था। खबर लिखे जाते समय ब्रिटेन का एफटीएसई 0.06 फीसदी और फ्रांस का सीएसी 0.01 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। जबकि, जर्मनी के डेक्स में 0.19 फीसदी की गिरावट देखी जा रही थी।

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