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नेचुरल रबर में लंबी अवधि का करें निवेश

आर. एस. राणा नई दिल्ली | Feb 16, 2013, 02:30AM IST
नेचुरल रबर में लंबी अवधि का करें निवेश

फायदे की बात
एनएमसीई में मार्च महीने के वायदा कारोबार में नेचुरल रबर की कीमतों में महीने भर में 5.9' की गिरावट आई है
15 जनवरी को मार्च महीने के वायदा कारोबार में नेचुरल रबर का दाम 168 रुपये प्रति किलो था जबकि 15 फरवरी को इसका दाम 158 रुपये प्रति किलो रह गया
घरेलू बाजार में नेचुरल रबर के दाम न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं। जैसे ही टायर उद्योग की मांग निकलेगी कीमतों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो की तेजी आएगी
ऐसे में वायदा बाजार में लंबी अवधि के निवेशक निवेश करके मुनाफा कमा सकते हैं

टायर उद्योग की मांग कमजोर होने से नेचुरल रबर की कीमतों में गिरावट आई है। घरेलू बाजार में अप्रैल 2012 से अभी तक नेचुरल रबर के भाव में 23.2 फीसदी की गिरावट आकर कोट्टायम में शुक्रवार को दाम 152-157 रुपये प्रति किलो रह गए।

नीचे दाम पर उत्पादकों की बिकवाली कम है जबकि मार्च आखिर तक उत्पादन का लीन सीजन रहेगा, इसलिए आगामी दिनों में मौजूदा कीमतों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो की तेजी आ सकती है। ऐसे में वायदा बाजार में लंबी अवधि के निवेशक खरीद करके मुनाफा कमा सकते हैं।

नेशनल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज लिमिटेड (एनएमसीई) में मार्च महीने के वायदा कारोबार में नेचुरल रबर की कीमतों में महीने भर में 5.9 फीसदी की गिरावट आई है। 15 जनवरी को मार्च महीने के वायदा कारोबार में नेचुरल रबर का दाम 168 रुपये प्रति किलो था जबकि 15 फरवरी को इसका दाम 158 रुपये प्रति किलो रह गया।

एग्री विश्लेषक अभय लाखवान ने बताया कि घरेलू बाजार में नेचुरल रबर के दाम न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं। जैसे ही टायर उद्योग की मांग निकलेगी कीमतों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो की तेजी आएगी। ऐसे में वायदा बाजार में लंबी अवधि के निवेशक निवेश करके मुनाफा कमा सकते हैं।

ऑल इंडिया टायर डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष एस पी सिंह ने नेचुरल रबर की कुल खपत में 60 फीसदी
हिस्सेदारी टायर उद्योग की है जबकि ट्रक और बस की बिक्री कमजोर बनी हुई है जिसकी वजह से टायर कंपनियों की खरीद नेचुरल रबर में सीमित मात्रा में ही आ रही है। बस और ट्रक टायर की सेल अप्रैल से जनवरी के दौरान 24-25 फीसदी कम हुई है।

रबर मर्चेंट एसोसिएशन के सचिव अशोक खुराना ने बताया कि नेचुरल रबर में टायर उद्योग के साथ ही नोन टायर उद्योग की मांग भी कमजोर है। कंपनियों के पास आयात माल का स्टॉक भी बचा हुआ है।

लेकिन मार्च तक नेचुरल रबर का उत्पादन कम रहेगा जबकि मार्च से टायर उद्योग की मांग में तेजी आने की संभावना है। ऐसे में नेचुरल रबर की मौजूदा कीमतों में आठ से दस फीसदी का सुधार आ सकता है।

उन्होंने बताया कि कोट्टायम में 7 अप्रैल 2012 में नेचुरल रबर का दाम 198-200 रुपये प्रति किलो था जबकि शुक्रवार को भाव घटकर 152-157 रुपये प्रति किलो रह गया। हालांकि बैंकाक में इस दौरान कीमतें नहीं घटी है।

अप्रैल महीने में बैंकाक में नेचुरल रबर का भाव 177-178 रुपये प्रति किलो था जबकि शुक्रवार को दाम 176 रुपये प्रति किलो रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम भारत के मुकाबले ज्यादा होने से आयात के नए सौदे नहीं होने के कारण भी दाम सुधरने की संभावना है।

रबर बोर्ड के अनुसार जनवरी में नेचुरल रबर के उत्पादन में 5 फीसदी की कमी आकर 97,000 टन का उत्पादन ही हुआ है जबकि जनवरी में खपत 9 फीसदी कम होकर 75,000 टन की हुई है। चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों (अप्रैल से जनवरी) के दौरान नेचुरल रबर का उत्पादन थोड़ा बढ़कर 790,200 टन का हुआ है

जबकि पिछले साल की समान अवधि में उत्पादन 784,400 टन का हुआ था है। इस दौरान नेचुरल रबर की खपत 2 फीसदी बढ़कर 817,815 टन की हुई है जबकि पिछले साल अप्रैल से जनवरी के दौरान खपत 801,750 टन की हुई थी। 31 जनवरी 2013 को घरेलू बाजार में नेचुरल रबर का कुल स्टॉक 296,000 टन का है।

इंटरनेशनल रबर स्टडी ग्रुप (आईआरएसजी) की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से दिसंबर 2012 के दौरान विश्व में रबर उत्पादन 3.2 फीसदी बढ़ा जबकि इस दौरान खपत 1.1 कम रही। आर्थिक मंदी के असर से अमेरिका और यूरोपीय देशों की मांग कम हुई है जबकि इस दौरान चीन में खपत की गति भी धीमी हुई है।

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टायर उद्योग की मांग कमजोर होने से नेचुरल रबर की कीमतों में गिरावट आई है।

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