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Warren Buffett
निवेश की दुनिया में भव‍िष्‍य के बजाय अतीत को देखना ज्‍यादा बड़ी समझदारी है।

आवक के दबाव से मक्का में और नरमी के आसार

आर एस राणा नई दिल्ली | Feb 22, 2013, 00:03AM IST
आवक के दबाव से मक्का में और नरमी के आसार

घाटे का सौदा- पोल्ट्री और स्टार्च की मांग घटने से स्टॉकिस्टों को नुकसान

विदेशी बाजार
अक्टूबर से करीब 8 लाख टन निर्यात सौदे, शिपमेंट 4.5 लाख टन
पिछले वर्ष में भारत से कुल 43 लाख टन मक्का का निर्यात हुआ
इंडोनेशिया व मलेशिया को निर्यात सौदे 290-300 डॉलर प्रति टन पर
ब्राजील, अर्जेंटीना और दक्षिण अमेरिका में नई फसल मार्च-अप्रैल से
जिससे विश्व बाजार में भी कीमतों में तेजी नहीं की संभावना नहीं

पोल्ट्री के साथ ही स्टार्च मिलों की कमजोर मांग से मक्का की कीमतों में गिरावट बनी हुई है। दिसंबर 2012 से अभी तक कीमतों में 150 रुपये की गिरावट आकर दिल्ली में भाव 1,400-1,450 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

अप्रैल में रबी सीजन के मक्का की घरेलू आवक शुरू हो जाएगी जबकि विश्व बाजार में ब्राजील, अर्जेंटीना और दक्षिण अमेरिका की नई फसल आएगी। ऐसे में मक्का की मौजूदा कीमतों में मार्च व अप्रैल के दौरान गिरावट आने के आसार हैं।

यूएस ग्रेन काउंसिल में भारतीय प्रतिनिधि अमित सचदेव ने बताया कि पोल्ट्री उद्योग और स्टार्च मिलों की मांग अपेक्षानुसार नहीं आ रही है जबकि निर्यात मांग भी सीमित मात्रा में बनी हुई है।

रबी मक्का के बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी से पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है। अक्टूबर 2012 से अभी तक करीब 8 लाख टन मक्का के निर्यात सौदे हुए है जिसमें से करीब 4.5 लाख टन की शिपमेंट हुई है।

पिछले फसल वर्ष में मक्का का कुल निर्यात 43 लाख टन का निर्यात हुआ था जो चालू साल में घटने का अनुमान है। इंडोनेशिया और मलेशिया के आयातक मक्का के आयात सौदे 290-300 डॉलर प्रति टन के भाव पर कर रहे हैं। ब्राजील, अर्जेंटीना और दक्षिण अमेरिका में मक्का की नई फसल मार्च-अप्रैल में बनेगी, जिससे विश्व बाजार में भी मक्का की कीमतों में तेजी नहीं की संभावना नहीं है।

बी एम इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर एम एल अग्रवाल ने बताया कि मक्का की नई फसल की आवक के समय स्टॉकिस्टों की खरीद से दाम तेज हो गए थे। पोल्ट्री उत्पादकों को चालू सीजन में भारी घाटा हुआ है जिसकी वजह से इनकी मांग कमजोर रही है।

कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की मंडियों में दिसंबर 2012 में मक्का के दाम 1,450 रुपये प्रति क्विंटल थे जबकि इस समय भाव घटकर 1,310-1,320 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। काकीनाडा बंदरगाह डिलीवरी मक्का के भाव घटकर इस दौरान 1,450 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं।

एनसीडीईएक्स पर मार्च महीने के वायदा अनुबंध में निवेशकों की बिकवाली से पहली जनवरी से अभी तक मक्का की कीमतों में 10.4 फीसदी की गिरावट आई है। पहली जनवरी को मार्च महीने के वायदा अनुबंध में मक्का का भाव 1,451 रुपये प्रति क्विंटल था जबकि गुरुवार को भाव घटकर 1,299 रुपये प्रति क्विंटल रह गया।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में मक्का की बुवाई बढ़कर 15.34 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जो पिछले साल के 13.46 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है। अभी तक मौसम भी फसल के अनुकूल है। ऐसे में रबी में मक्का की पैदावार बढऩे का अनुमान है।

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पोल्ट्री के साथ ही स्टार्च मिलों की कमजोर मांग से मक्का की कीमतों में गिरावट बनी हुई है।

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