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मुनाफा किसी कंपनी के लिए उसी तरह है जैसे एक व्यक्ति के लिए ऑक्सीजन।

बिना पैन कहीं उड़ न जाए चैन

बलवंत जैन | Feb 02, 2013, 00:54AM IST
बिना पैन कहीं उड़ न जाए चैन

भले ही आपकी आय टैक्सेबल न हो और आपको रिटर्न दाखिल करने की जरूरत न पड़ती हो, पर आपके पास पैन रहेगा तो आपका भला ही होगा। इससे आपको टीडीएस (स्रोत पर कर-कटौती) के रूप में काटे गए टैक्स को बचाने में मदद मिलेगी

पैन होने का महत्व
आम तौर पर टीडीएस 10 फीसदी की दर से काटा जाता है। हालांकि, विभिन्न मदों में यह एक फीसदी या दो फीसदी भी हो सकता है। अगर आपके पास पैन है तो टीडीएस की वास्तविक दर लगाई जाएगी अन्यथा 20 फीसदी के हिसाब से स्रोत पर कर कटौती की जाएगी। अगर आप पढ़ाई कर रहे हैं और आप जल्दी ही नौकरी शुरू करने वाले हैं तो यह आपके हित में होगा कि आप जल्दी से पैन ले लें ताकि उच्च टीडीएस की कटौती से बच सकें

इन दिनों पैन यानी परमानेंट अकाउंट नंबर काफी महत्वपूर्ण हो गया है। इसका उपयोग न केवल पहचान के सबूत तौर पर बल्कि कर-देनदारी समेत वित्तीय रिकार्ड रखने में भी होता है। कुछ लोगों की धारणा होती है कि जिनकी आय टैक्सेबल है, सिर्फ उन्हें ही पैन की जरूरत होती है।

यह धारणा गलत है। भले ही आपकी आय टैक्सेबल न हो और आपको रिटर्न दाखिल करने की जरूरत न हो, पर आपके पास पैन रहेगा तो आपका ही भला होगा। इससे आपको टीडीएस (स्रोत पर कर-कटौती) के रूप में काटे गए टैक्स को बचाने में मदद मिलेगी।

यह जानना जरूरी है कि आपको कोई आय प्राप्त होने पर किस दर से टीडीएस की कटौती की जाती है।
आयकर कानून के तहत किराया, ब्याज, कमीशन, वेतन, ठेक ा प्रभार आदि विभिन्न प्रकार की आय का भुगतान करने के पहले भुगतानकर्ता को टीडीएस के रूप में सुपरिचित आयकर काटने की जरूरत होती है। इस कटौती के लिए कुछ नियत नियम भी हैं। पर पहले उस आय को जानें जिन पर टैक्स लगता है।

ब्याज का भुगतान
अगर आपके खाते में एक वित्तीय वर्ष में ब्याज के रूप में जमा होने वाली रकम 10,000 रुपये से ज्यादा होगी तो बैंक को उस पर टीडीएस काटना होगा। 10,000 रुपये की यह सीमा किसी बैंक की प्रत्येक शाखा के लिहाजा से गणना की जाएगी। बैंक ब्याज के अलावा अन्य ब्याज आय से टीडीएस के लिए सीमा 5,000 रुपये की है। अगर ब्याज की रकम उपरोक्त सीमा से ज्यादा होगी तो कुल ब्याज पर ब्याज भुगतानकर्ता को 10 फीसदी के हिसाब से टैक्स काटना होगा।

किराये की आय
किराये के भुगतान के मामले में यह सीमा 1.80 लाख रुपये है। अगर इससे आपको एक वित्तीय वर्ष में मिलने वाली वाली रकम 1,80,000 रुपये से ज्यादा होगी तो किराया भुगतान करने वाले को उस पर टीडीएस काटना होगा। मशीनरी, प्लांट या उपकरण के लिए टीडीएस की दर 2 फीसदी है जबकि जमीन, भवन, फर्नीचर व फिक्सचर्स के लिए 10 फीसदी के हिसाब से टैक्स काटना होगा।

प्रोफेशनल टैक्स
अगर आप कोई प्रोफेशनल या तकनीकी सेवाएं दे रहे हैं तो जिसे आप सेवा दे रहे हैं अगर वह एक वित्त वर्ष में कुल भुगतान 30,000 रुपये से अधिक करता है तो उसे 10 फीसदी टीडीएस काटना होगा।

कांट्रैक्टर के लिए
अगर आप कांट्रैक्टर हैं तो कांट्रैक्ट की कुल वैल्यू का एक फीसदी टीडीएस के रूप में कटेगा अगर व्यक्तिगत स्तर पर लिया गया ठेका एक साल में 30,000 रुपये अधिक या कुल मिला कर ठेका 75,000 रुपये से अधिक है।

वेतन
पीएफ की रकम, एनएससी में निवेश, एचआरए, एलटीए व होम लोन के ब्याज और मूलधन समेत विभिन्न कटौतियों के बाद अगर आपका नेट वेतन बेसिक छूट की सीमा से ज्यादा है तो आपके नियोक्ता को उस पर टीडीएस काटना होगा। अगर नेट वेतन उपरोक्त कटौतियों के बाद बेसिक छूट की सीमा के अंदर है तो कोई कर नहीं काटा जाएगा।

कर की गणना मासिक आधार पर औसत दर के हिसाब से की जाती है। वेतन पर टीडीएस कितना काटा जाए इसकी दर निर्धारित नहीं है इसलिए टीडीएस का आधार कर्मचारी के वेतन को बनाया जाता है। इस मामले में अगर आप अपने नियोक्ता को पैन विवरण उपलब्ध करा देंगे तो अच्छा रहेगा।

पैन होने के फायदे
आपको अगर कोई आय होने वाली है, जिस पर टीडीएस कटना है तो आपको ऐसी आय के भुगतानकर्ता को अपने पैन का विवरण उपलब्ध कराना होगा अन्यथा आपको आम दर से ज्यादा यानी 20 फीसदी के हिसाब से टीडीएस का भुगतान करना होगा।

लिहाजा सिर्फ एक फीसदी, दो फीसदी, पांच फीसदी या 10 फीसदी की बजाय भुगतानकर्ता 20 फीसदी टीडीएस काटेगा। यह तब और तकलीफदेह होगा जब आप ठेकेदार हों या मशीनरी, उपकरण का किराया प्राप्त करते हों, जिसमें आपको नियमानुसार एक फीसदी या दो फीसदी कर ही देय होगा, पर भुगतानकर्ता टीडीएस के तौर पर सीधे 20 फीसदी काट लेगा।

वेतन के मामले में भी यही बात लागू होती है। अगर आपका वेतन टैक्सेबल नहीं है तो भी नियोक्ता को 20 फीसदी टीडीएस काटना होगा, भले ही आपके वेतन आय में टैक्स नही लगता हो। वह आपके पहले वेतन के चेक में से भी इतना टीडीएस काट सकता है।

ऐसे समय में अगर आपके पास पैन होगा तो बेहतर रहेगा। चंूकि इस बारे में नियम साफ नहीं है पर इससे पैन की उपयोगिता तो साबित होती है। वेतन स्लैब पर टीडीएस के बारे में जब तक कोई स्लैब के  लिहाज से नियम न आ जाए तब तक बिना पैन वालों का नुकसान होता रहेगा। यानी कि अपनी नौकरानी या फिर ड्राइवर को वेतन देते समय अगर उसने पैन नहीं दिया है तो आपको उसी अनुसार टीडीएस काटना होगा।

आपको क्या करना चाहिए
अगर आप पढ़ाई कर रहे हैं और आप जल्दी ही नौकरी शुरू करने वाले हैं तो यह आपके हित में होगा कि आप जल्दी से पैन ले लें ताकि उच्च टीडीएस की कटौती से बच सकें।

उच्च टीडीएस की कटौती से बचने के लिए कृपया अपने नियोक्ता के पास गलत पैन न सबमिट करें क्योंकि ऐसी हालत मेंं आपको 10000 रुपए जुर्माने के साथ 20 फीसदी टीडीएस का भुगतान भी करना पड़ सकता है।

यह तब और भी ज्यादा जरूरी होगा जब कि आप रिटायर्ड व्यक्ति हों और बैंक में टैक्स न काटने के लिए आप फार्म न. 15 जी या 15 एच सबमिट करना चाहते हों, और इन फार्मों पर आपने पैन नहीं लिखा है तो बैंक 10 फीसदी के लागू कर की बजाय 20 फीसदी कर काट लेगा।

इसलिए समय मत खराब कीजिए आज ही आप पैन के लिए आवेदन कर दीजिए ताकि आप उच्च टीडीएस की कटौती से बच सकें। हमारा कहना कुल मिलाकर इतना ही है कि पैन प्राप्त करते हुए चैन की बंसी बजाएं।
- लेखक अपनापैसा डॉट कॉम के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर हैं।

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