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निवेश की दुनिया में भव‍िष्‍य के बजाय अतीत को देखना ज्‍यादा बड़ी समझदारी है।

क्या आपने कर ली अपनी टैक्स-प्लानिंग?

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली | Jan 19, 2013, 00:09AM IST
क्या आपने कर ली अपनी टैक्स-प्लानिंग?

टैक्स प्लानिंग फाइनेंशियल प्लानिंग का एक अहम हिस्सा है। एक एफिशियंट टैक्स प्लानिंग टैक्स देनदारी कम करने में आपकी मदद करती है। यह काम अलग अलग धाराओं के तहत टैक्स छूट के फायदे उठा कर आसानी से किया जा सकता है। साथ ही इस बात का ध्यान भी रखा जाता है सभी दीर्घकालिक निवेश बरकरार रहें।  

टैक्स प्लानिंग है आसान
टैक्स प्लानिंग टैक्स चोरी नहीं है। इसमें आप गंभीरता से अपने आय के स्रोत और निवेश के विकल्पों की प्लानिंग करते हैं। यह कर चोरी नहीं है जो भारतीय कानून के तहत गैर-कानूनी है।

टैक्स प्लानिंग का मतलब यह नहीं है कि आप आंख बंद कर के धारा 80सी के विकल्पों में पैसा लगा दें। टैक्स प्लानिंग मुश्किल नहीं बल्कि काफी आसान है। यह काम हर व्यक्ति कर सकता है। अगर व्यक्ति वित्तीय मामलों में संगठित है तो टैक्स प्लानिंग करने में ज्यादा वक्त भी नहीं लगता है।

मौजूदा साल की टैक्स प्लानिंग  
आपको कुछ लक्ष्य तय करने होंगे और उन्हें हासिल करना होगा। यह लक्ष्य क्या हैं आपको यह तय करना होगा और साथ ही आपको इसमें टैक्स इफिशियंसी भी खोजनी होगी। टैक्स प्लानिंग संपूर्ण फाइनेंशियल प्लानिंग का प्रमुख हिस्सा है और बहुत जरूरी है। उदाहरण के तौर पर हो सकता है कि आप शादी करने वाले हों या फिर आपको घर की जरूरत हो।

इस स्थिति में आपको खुद पर आश्रित जीवनसाथी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इंश्योरेंस की जरूरत पड़ेगी। साथ ही आपको होम लोन का भी ख्याल रखना होगा। आपको अपनी प्राथमिकताएं तय करनी होंगी साथ ही यह भी देखना होगा कि आपकी क्षमता क्या है।

अगर आप आंख बंद कर के इंश्योरेंस पॉलिसी में पैसा लगा देंगे तो हो सकता है कि आपको इससे पर्याप्त इंश्योरेंस कवर न मिले। ऐसी स्थिति में अगर आप होम लोन की मूल रकम का भुगतान करने का फैसला करते हैं तो यह उपयुक्त रहेगा।  

आप जिस पहले इंश्योरेंस एजेंट से मिलें उसी की पॉलिसी में आंख बंद करके निवेश करना अक्लमंदी का फैसला नहीं है। ज्यादातर लोगों के साथ ऐसा होता है कि वे आंख बंद कर किसी भी इंश्योरेंस पॉलिसी में पैसा लगा देते हैं। इससे न तो उन्हें पर्याप्त इंश्योरेंस कवर मिलता है और न ही जरूरत पडऩे पर यह पैसा।

आपको आखिरी वक्त पर फैसला नहीं लेना चाहिए। ऐसा न हो कि जब आपका पेरोल विभाग याद दिलाए कि प्रूफ जमा करने की आखिरी तारीख पास आ रही है तो आप निवेश करना शुरू करें। ऐसी चीजों से बचने के लिए ही टैक्स प्लानिंग की जाती है।

निवेश विकल्पों का चुनाव  
जब आप टैक्स बचाने के लिए निवेश के विकल्पों का चुनाव कर रहे हों तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

तरलता
आपको पैसे की जरूरत कितनी जल्दी पड़ सकती है? क्या आप एक या दो साल की अवधि में यह फंड हासिल कर सकते हैं? आप निवेश के किसी भी विकल्प से इतनी जल्दी पैसा निकाल नहीं पाएंगे। यहां तक की सभी टैक्स बचत विकल्पों के लिए न्यूनतम लॉक इन पीरियड तीन साल का है।

जोखिम और रिटर्न
आपको तय करना होगा कि आखिर आप कितना जोखिम लेना चाहते हैं। निवेश के कुछ विकल्पों में जोखिम कम होता है और रिटर्न भी कम। जिनमें रिटर्न ज्यादा है उसमें जोखिम भी ज्यादा है।

मुद्रास्फीति से सुरक्षा
जो इंस्ट्रूमेंट कम रिटर्न देते हैं वह मुद्रास्फीति के लिहाज से अच्छे नहीं हैं। इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि कई इंस्ट्रूमेंट लंबी अवधि तक आपका निवेश रोक लेते हैं और इस पर एक निश्चित दर से ही ब्याज देते हैं। हालांकि मुद्रास्फीति के लिहाज से यह अच्छा नहीं है।

टैक्स छूट
धारा 80सी के तहत आने वाले सभी इंस्ट्रूमेंट इस लिहाज से एक जैसे हैं क्योंकि आपको इन पर टैक्स छूट का फायदा तभी मिलेगा जब आप इनमें निवेश करेंगे। हालांकि इनसे मिलने वाली आय में और मैच्योरिटी पर लगने वाले टैक्स में अंतर है।

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टैक्स प्लानिंग फाइनेंशियल प्लानिंग का एक अहम हिस्सा है। एक एफिशियंट टैक्स प्लानिंग टैक्स देनदारी कम करने में आपकी मदद करती है।

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