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नियम नंबर एक: पूंजी को खोना नहीं चाहिए, नियम नंबर दो: पहले नियम को ना भूलें।

अपनाएं फाइनेंशियल प्लानिंग के छह सूत्र

रणजीत मुधोलकर | Aug 10, 2013, 00:04AM IST
अपनाएं फाइनेंशियल प्लानिंग के छह सूत्र

फाइनेंशियल प्लानिंग एक योजनाबद्ध नजरिया है, जिसे अपनाकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्तिके  सभी पर्सनल फाइनेंस साधनों और पूंजी को ध्यान में रखते हुए किसी भी आर्थिक लक्ष्य को कभी भी अनदेखा नहीं किया जाएगा। हर एक लक्ष्य की उचित गणना और उचित प्रावधान कर उन्हें क्रियान्वित किया जाए तो कोई भी  व्यक्तिचिंता-मुक्तजीवन जी सकता है

हर व्यक्ति आर्थिक परेशानियों  से  मुक्ति  चाहता है। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति  कमाता  रहे  और वित्त साधनों का तथा पूंजी  का  इस  प्रकार  से  प्रबंधन किया जाए, जिससे  व्यक्ति  के  जीवन के आर्थिक लक्ष्य, उसकी  प्राथमिकताएं और इच्छाएं  पूरी  हो  सकें।

व्यक्ति  के  वित्त साधन और पूंजी के प्रबंधन  के लिए  उद्देश्यों  पर  आधारित दृष्टिकोण  है फाइनेंशियल  प्लानिंग। सेवा-निवृत्ति के पश्चात के जीवन  निर्वाह  के  लिए  बचत करना, बच्चों  की शिक्षा और शादी, घर अथवा  लक्जरी कार खरीदना आदि कई प्रकार  के जीवन  उद्देश्यों की  पूर्ति का सपना हम सभी देखते  हैं।

फाइनेंशियल प्लानिंग एक योजनाबद्ध नजरिया  है,  जिसे  अपनाकर  यह  सुनिश्चित  किया  जाता  है  कि  व्यक्ति  के  सभी पर्सनल फाइनेंस साधनों  को और पूंजी को  ध्यान  में रखते हुए किसी भी आर्थिक लक्ष्य  को  कभी  भी  अनदेखा  नहीं  किया  जाएगा। संपत्ति  निर्माण  की  प्रक्रिया  के  दौरान  व्यक्ति  के  लिए  पैसा  कमाना  और  उसे  सावधानी  से  सोच-समझ कर  निवेश  करना  जरुरी  होता  है। 

साथ  ही  इस  प्रकार  से  निर्माण  की  जा  रही  पूंजी की सुरक्षा  भी  आवश्यक  है। व्यक्ति  की  कमाई  उसकी  कमाने  की  क्षमताओं  पर  निर्भर  होती  है,  जबकि,  फाइनेंशियल  प्लानर  संपत्ति  के  निवेश  और सुरक्षा में  मदद  कर  सकते  हैं।
फाइनेंशियल  प्लानिंग  में  यही  काम  योजनाबद्ध तरीके से  किए  जाते  हैं  और  इसके  लिए  आपके  फाइनेंशियल  प्लानर  जिस  प्रक्रिया  का  उपयोग  करते  हैं  उसमें  मुख्य रूप से छह चरण  होते  हैं:
1.    लक्ष्य को परिभाषित करना
२.    फाइनेंशियल  प्लानर  को  आपके  बारे  में  तथा  आपके  उद्देश्य,  लक्ष्यों  के  बारे  में  जानकारी  देना
३.    आपकी  वित्तीय  स्थिति  का  विश्लेषण  और  मूल्यांकन  किया  जाना
४.    फाइनेंशियल  प्लानिंग  के  बारे  में  सुझाव  और/अथवा  विकल्प  प्राप्त  करना
५.    फाइनेंशियल  प्लानिंग  सुझावों  पर  अमल  करना
६.    फाइनेंशियल  प्लानिंग  सुझावों  के  कार्यान्वयन  की  नियमित  जांच  और समीक्षा  करते  रहना
इस  प्रक्रिया  के  दौरान पर्सनल फाइनेंस  और  पूंजी  से  जुड़े  निम्न  मामलों  को  शामिल  किया  जाता  है:

1. बीमा की प्लानिंग  (संपत्ति  की  सुरक्षा)
वित्तीय  लक्ष्यों  की  पूर्ति  और संपत्ति निर्माण के  लिए  उन  विपदाओं  से  अपना बचाव करना अत्यंत आवश्यक  है  जो कि,  व्यक्ति की कमाने की क्षमता में बाधा उत्पन्न कर सकती  हैं।

किसी दुर्घटना/भारी चोट अथवा  बीमारी के कारण  मृत्यु होना  अथवा  विकलांगता (हमेशा के लिए अथवा  अस्थाई) आना आदि समस्याएं कभी भी, किसी के भी सामने  आकर  ख्रड़ी  हो  सकती  हैं। परिवार के कमाने वाले सदस्य ने उचित  विश्लेषण कर जीवन  बीमा  कराया  हो  तो  उस सदस्य  की  मृत्यु होने  पर भी उसके परिवार की  वित्तीय  सुरक्षा  को  अबाधित  रखा  जा सकता  है। साथ  ही  विकलांगता  के  लिए  राइडर  भी  लिया  जा  सकता  है।

इस तरह से व्यक्ति अपनी कमाने की क्षमता को  सुरक्षित रख सकता है। हेल्थकेयर  की बढ़ती हुई कीमतों  को  मद्देनजर  रखते हुए मेडिक्लेम लेकर अपने आपको पर्याप्त  हेल्थकेयर सुरक्षा प्रदान करना बहुत आवश्यक बन चुका  है। करियर  के  शुरुआत  के  समय में जब  जिम्मेदारियां  कई  अधिक  होती  हैं और बचत  काफी  कम,  तब  जीवन  बीमा  कराना  अत्यंत जरुरी  है।

आगे  चल  कर,  बढ़ती  हुई  आयु  के  साथ-साथ  बीमारियों  की  बढ़ती  हुई  आशंका  को  मद्देनजर  रखते  हुए  स्वास्थ्य  बीमा  करना  जरुरी  होता  है,  वरना  किसी  एक  गंभीर  बीमारी  के  कारण  व्यक्ति  की  जुटाई  हुई  पूंजी  खर्च  होने  का  डर  रहता  है। इस  प्रकार  बढ़ती  हुई  आयु  के  साथ-साथ  जीवन  बीमा  को  कम  करते-करते  स्वास्थ्य  बीमा  सुरक्षा  को  बढ़ाना  आपके  लिए  लाभदायी  सिद्ध  हो  सकता  है।

आदर्श तौर पर  देखा  जाए  तो  जब  तक संभव  हो  तब  तक  हर  तीसरे  साल  में  तीन  लाख  रुपयों  की  अतिरिक्त  स्वास्थ्य  पॉलिसी  खरीदनी  चाहिए। साथ दिए ग्राफ में  व्यक्ति  की  आयु  के  20 से 60 सालों  तक  स्वास्थ्य  बीमा  और  जीवन  बीमा  की  आवश्यकता  को  ग्राफिक  की  सहायता  से  दर्शाया  गया  है। यह अनुमान लगाया गया  है  कि  25 साल  की  आयु  में  इस  व्यक्ति की कमाई  5  लाख रुपये है।

2. निवेश की योजना
कमाने  के  साथ-साथ  भविष्य  में सुखमय जीवन  के  लिए  बचत  और  निवेश  करना  भी  अत्यंत  महत्वपूर्ण  है। वित्तीय लक्ष्य और  जोखिम  उठाने  की  क्षमता  का  विश्लेषण  करने  के  पश्चात  उचित  परिसंपत्ति  वर्गों  में  निवेश  किया जाना  चाहिए। कर  चुकाए  जाने  के पश्चात कमाई  को  तीन  हिस्सों  में  विभाजित  किया  जाना  चाहिए। 

इसमें  से  एक  हिस्सा  वर्तमान  खर्चों  के  लिए, एक हिस्सा कर्ज चुकाने  के  लिए  और  एक  हिस्सा  सुखमय भविष्य  के  लिए  निवेश  करने  के  लिए  इस्तेमाल  किया  जाना  चाहिए। इससे  व्यक्ति  पर  किसी तरह का  दबाव  नहीं  आएगा।

3. सेवानिवृत्ति की योजना
नौकरी  करने वाला  हर  व्यक्ति  सेवानिवृत्त  होता  है।  आज  के  समय  में  संगठित  क्षेत्र  में  भी  निश्चित  लाभ  प्रणाली  को  समाप्त  किए  जाने  के  कारण  सेवानिवृत्ति  के  पश्चात  जीवन  निर्वाह  के  लिए  योजना  बनाना  और  उसके  अनुसार  निवेश  करना  अत्यंत  आवश्यक  बन  चुका  है।

अपनी  अन्य  इच्छाएं  और  जरूरतों  के  साथ-साथ जीवनशैली और  स्वास्थ्य  बनाए  रखना  भी  जरुरी  होता  है  और  इसीलिए  करियर  के  शुरुआत  से  ही  बचत  और  निवेश  का  उचित  आवंटन  करना  आवश्यक  है।

4. कर  नियोजन
आयकर  हर  व्यक्ति के  आर्थिक जीवन  का एक अहम हिस्सा होता है। हर व्यक्ति को भारतीय आयकर  अधिनियम, 1961 की विभिन्न धाराओं के अनुसार  अधिकतम  लाभ  प्राप्त हो, प्रयास इस दिशा में होनी चाहिए। आयकर  से  बचना  नहीं चाहिए बल्कि कानूनी  नियमों का पालन करते  हुए  उचित कर नियोजन किया जाना  आवश्यक  है।


5. एस्टेट प्लानिंग
संपत्ति  निर्माण  करना  महत्वपूर्ण  है,  उसी  तरह  से  उस  संपत्ति  को  व्यक्ति  की  अपनी  इच्छाओं  के  अनुसार  विभाजित  करना  भी  आवश्यक  है।    इसलिए एस्टेट प्लानिंग में  उचित  सावधानी  बरतना  जरूरी  है।  वसीयत कर  आप  अपने  प्रियजनों  को  व्यर्थ  कष्टों  से  बचा  सकते  हैं।

इन  सभी  बातों  के  साथ-साथ,  एक  बात  जरूर  ध्यान  में  रखनी  चाहिए  कि, डेप्रिसिएटिंग एसेट  पर  कर्ज  लेना  उचित  नहीं  है  क्योंकि  इससे  व्यक्ति के नेटवर्थ में कमी  संभावना  होती  है।

ऊपर  दिए  गये  हर  एक  मामले  को  विशिष्ट  उद्देश्यों  के  साथ  जोड़कर देखा जाए और  हर  एक  लक्ष्य  की  उचित  गणना  और  उचित  प्रावधान  कर  उन्हें क्रियान्वित  किया  जाए  तो  कोई  भी  व्यक्ति  वित्तीय  चिंताओं  से  मुक्त  जीवन  का  आनंद  ले  सकता  है।

रणजीत मुधोलकर
वाइस चेयरमैन एवं सीईओ, फाइनेंशियल प्लानिंग स्टैंडड्र्स बोर्ड इंडिया

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