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मुनाफा किसी कंपनी के लिए उसी तरह है जैसे एक व्यक्ति के लिए ऑक्सीजन।

आपकी मोटर पॉलिसी कहीं जाली तो नहीं!

विजय कुमार | Feb 05, 2013, 02:19AM IST
आपकी मोटर पॉलिसी कहीं जाली तो नहीं!

जाली मोटर पॉलिसी का बढ़ता कारोबार
एक आकलन के मुताबिक हाल के वर्षों में फर्जी मोटर इंश्योरेंस का कारोबार बढऩे की वजह से भारतीय साधारण बीमा उद्योग को सालाना लगभग 2,500-3,500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है

मोटर पॉलिसी जाली होने के कारण पॉलिसीधारकों का क्लेम सेटल नहीं हो पाता। पैसों के नुकसान के साथ ही उन्हें मोटर इंश्योरेंस का फायदा भी नहीं मिल पाता है

देश भर में सक्रिय है फर्जी मोटर इंश्योरेंस जारी करने वाला गिरोह। इसलिए असली और नकली पॉलिसी की पहचान करना हो जाता है जरूरी


हाल के सालों में फर्जी इंश्योरेंस के मामलों में तेजी आने की वजह से अब इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विभिन्न आकलनों से यह माना गया है कि हाल के वर्षों में इंश्योरेंस फ्रॉड में तेजी आने की वजह से भारतीय साधारण बीमा उद्योग को इससे सालाना 2,500-3,500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही पॉलिसी खरीदने वाले ग्राहकों को तो नुकसान हो ही रहा है।

क्लेम के समय होता है खुलासा
वैसे भी यह बात कितनी तकलीफदेह है कि अचानक एक ग्राहक को पता चलता है कि जो मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी उसने खरीदी है वह जाली है। दुख की बात तो यह है कि उसे यह बात तब पता चलती है जब वह कोई दावा करता है।

जबकि ग्राहक उस पॉलिसी के  प्रीमियम का भुगतान पिछले कुछ वर्षों से इसलिए कर रहा होता है कि किसी दुर्घटना होने की दशा में उसे इंश्योरेंस पॉलिसी का फायदा मिलेगा। अधिकतर लोगों को पॉलिसी के जाली होने पता तब चलता है जब वाहन चोरी हो जाती है या उसे कोई नुकसान पहुंचता है।

कैसे बचें जाली पॉलिसी से
दोपहिया, चार पहिया और कॉमर्शियल व्हीकल की पॉलिसी जाली है कि असली है, इसे जानने के लिए निम्नलिखित सावधानियां अपनाई जा सकती हैं:

बीमा कंपनी से करें संपर्क
जो मोटर बीमा पॉलिसी आपको दी गई है वह वास्तविक है या जाली, इससे जानने का सबसे सरल व सुगम रास्ता यह है कि आप अपनी बीमा कंपनी से तत्काल संपर्क कीजिए। चाहे ईमेल भेजिए या फिर कस्टमर केयर या फिर टोल फ्री नंबर पर बात कीजिए या फिर आप बीमा कंपनी के नजदीकी शाखा कार्यालय जाकर इस बात का सत्यापन कीजिए कि आपकी मोटर बीमा पॉलिसी वास्तविक है या फर्जी।

रसीद लेना न भूलें
हमेशा प्रीमियम भुगतान के बाद रसीद की मांग कीजिए। कुछ कंपनियां इसे प्रपोजल फॉर्म में उल्लिखित करती हैं तो कुछ अलग से। यदि उनसे मांगा जाए तो कंपनियां प्रीमियम भुगतान की रसीद जारी करती हैं। अगर आप प्रीमियम का भुगतान नकद कर रहे हैं तो रसीद जरूर मांगें।

आईडीवी और एनसीबी की चेकिंग
जब आपको आपकी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी मिल जाए तो आप इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू-आईडीवी, नो क्लेम बोनस- एनसीबी व डिडक्टिबल यानी कि वालंटरी एक्सेस, कंपलसरी डिडक्टिबल व एडिशनल कंपलसरी डिडक्टिबल को जरूर चेक कीजिए, इससे भी पता चल जाता है कि आपको मिली मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी सही है या नहीं।

अगर आपको मिली पॉलिसी जाली होती है तो उसमें यह सब जानकारियां ऐसी होंगी जिसे देख कर आप भांप जाएंगे। इसे आप पहले ही चेक करेंगे तो कोई दावा करते समय बहुत सी समस्याओं से बचेंगे भी।

इसमें से यानी कि आईडीवी, एनसीबी व डिडक्टिबल के विवरण में अगर आपको कोई खामी नजर आती है तो इसको चेक करने के बाद तत्काल बीमा कंपनी से मिलकर उसे ठीक करवाइए। यह आपके ही फायदे की बात है। ताकि बाद में आपको क्लेम सेटलमेंट में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रपोजल फॉर्म/कवर नोट पर हस्ताक्षर
कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी ओर से प्रपोजल फॉर्म या कवर नोट पर हस्ताक्षर न करने दीजिए। हमेशा आप खुद ही दस्तखत कीजिए। आप उस प्रपोजल को पहले पढि़ए फिर उस पर दस्तखत कीजिए।

इस प्रकिया आपके लिए अच्छी होगी जिसके जरिए आप अपने वाहन के फीचर्स को क्रॉस चेक कर सकेंगे। जैसे कि आपके वाहन में सीएनजी है पर एजेंट को यह पता नहीं है और उसने लिख दिया कि पेट्रोल या डीजल तो बाद में आपको परेशानी हो जाएगी। इसीलिए प्रपोजल फॉर्म या कवर नोट पर हस्ताक्षर आप स्वयं कीजिए।

अधिकांश निजी बीमा कंपनियों ने जालसाजी को रोकने के लिए पॉलिसी का डिस्पैच सेंट्रलाइज्ड कर दिया है। वे अब इस पर बार कोड भी मुद्रित करने लगी हैं ताकि असली या नकली पॉलिसी की पहचान हो सके।
- लेखक बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के हेड (मोटर इंश्योरेंस) हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।

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हाल के सालों में फर्जी इंश्योरेंस के मामलों में तेजी आने की वजह से अब इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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