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ऐसा कारोबार जो सिर्फ पैसा बनाए,वह बेकार है।

कर्ज लेकर प्रॉपर्टी में निवेश करने में नहीं है बुद्धिमानी

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली | Aug 07, 2013, 02:14AM IST
कर्ज लेकर प्रॉपर्टी में निवेश करने में नहीं है बुद्धिमानी

कर्ज लेकर रहने के लिए घर खरीदने में कोई हर्ज तब नहीं है जब आप कर्ज की मासिक किस्त भरने में सक्षम हैं। इस पर आपको आयकर का लाभ भी मिलता है। लेकिन, कर्ज लेकर प्रॉपर्टी में निवेश करने में बुद्धिमानी नहीं है। एक एसेट क्लास के तौर पर इक्विटी लंबी अवधि में न केवल अच्छा रिटर्न देता बल्कि यह प्रॉपर्टी के मुकाबले ज्यादा लिक्विड भी है।

एक फाइनेंशियल एडवाइजर के ग्राहक, जो उसका दोस्त भी था, ने कहा 'धनार्जन का सबसे अच्छा तरीका यह है कि किसी से पैसे उधार लेकर उसका निवेश प्रॉपर्टी में कर दो। वास्तव में आप आकर्षक दर पर ऋण लेकर पैसे कमा रहे हैं। इस तरह के निवेश से आप को कर में छूट का भी लाभ मिलता है।'

फाइनेंशियल एडवाइजर को यह बात कुछ हजम नहीं हुई। उसने इस बात की तह में जाने का निश्चय किया। आइए देखते हैं कि इसमें कितनी सच्चाई है।

मान लेते हैं कि गोपाल 11 प्रतिशत वार्षिक की ब्याज दर पर 50 लाख रुपये 20 वर्षों के लिए उधार लेकर प्रॉपर्टी में निवेश करता है। लोन के लिए उसकी मासिक किस्त 51,610 रुपये की बनती है। गोपाल अपनी जायदाद किराए पर देकर भी ब्याज में पूर्ण कटौती का दावा कर सकते हैं। अगर इसमें भी घाटा है तो वह वेतन से होने वाली आय से इसकी कटौती कर सकता है।

गोपाल अपनी जायदाद किराए पर देता है और सोसायटी शुल्क एवं प्रॉपर्टी कर देने के बाद उसे 4 प्रतिशत वार्षिक का रिटर्न मिलता है। यहां हम यह मान कर चल रहे हैं कि किराए में प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि होती है(सोसायटी शुल्क, दलाली और प्रॉपर्टी कर देने के बाद)। ऐसी उम्मीद की जाती है कि 20 वर्षों में की अवधि में जायदाद के मूल्य में 8 प्रतिशत की दर से वृद्धि होगी। गोपाल कर में होने वाली बचत का पैसा भी निवेश कर रहे हैं।

कोई भी व्यक्ति यह सोच सकता है कि यहां किराए से मिलने वाला रिटर्न केवल 4 प्रतिशत ही क्यों माना गया है। वैसे देखा जाए तो अच्छी आवासीय सोसायटी के मामले में यह रिटर्न 6 प्रतिशत तक हो सकता है जिसमें से सोसायटी शुल्क, प्रॉपर्टी कर, प्रॉपर्टी मेंटिनेंस (घर का इंटीरियर, पेंटिंग, फर्नीचर आदि), ब्रोकरेज शुल्क एवं बड़े मरम्मत का खर्चा नहीं जोड़ा गया है। यह भी सच है कि 20 साल की पूरी अवधि तक के लिए लगातार उस जायदाद को किराए पर नहीं दिया जा सकता है। इसलिए 4 प्रतिशत का रिटर्न मान कर चलना गलत नहीं होगा।

हमने जायदाद की कीमत में वृद्धि की दर 8 प्रतिशत की मानी है। यह अलग बात है कि मेरे एक दोस्त ने 2.5 साल पहले जो घर खरीदा था आज उसकी कीमत दोगुनी हो चुकी है। पिछले 3-4 वर्षों में जायदाद की कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन हम बीते दिनों के आधार पर यह नहीं कह सकते कि जायदाद की कीमत में दीर्घावधि में उसी दर से वृद्धि होगी।

गोपाल को प्रथम वर्ष में 2 लाख रुपये मिलेंगे। जायदाद से होने वाली आय की गणना के लिए उसे प्रॉपर्टी कर और विभिन्न प्रकार के खर्चे के रुप में 30 प्रतिशत की कटौती करनी होगी।

प्रथम वर्ष में गोपाल ऋण के ब्याज के रुप में 5,46,396 रुपये का भुगतान करता है। इस प्रकार जायदाद पर होने वाली विशुद्ध हानि 4,06,396 रुपये की होगी जिसकी कटौती आयकर वाली कुल आय से की जा सकती है। उच्चतम कर वर्ग में आने वाले व्यक्ति अधिकतम 30 प्रतिशत की बचत कर सकता है और इस प्रकार गोपाल अधिकतम 1,38,175 (सेस सहित) रुपये बचा सकता है।

हालांकि, होम लोन के साथ जोखिम भी जुड़ा हुआ है, इसलिए यह आवश्यक है कि गोपाल ऋण के बराबर की राशि का लाइफ कवर ले ले। 50 लाख रुपये के टर्म इंश्योरेंस का वार्षिक प्रीमियम लगभग 18000 रुपये (ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस नहीं) बनता है। गोपाल के लिए यह बेहतर होगा कि वह 25-25 लाख की दो टर्म पॉलिसी लें एक 14 वर्षों के लिए और दूसरा 20 वर्षों के लिए।

15वें वर्ष में उसका मूलधन घटकर 25 लाख रुपये हो जाता है, उसके बाद केवल 25 लाख रुपये शेष रह जाते हैं और इसके लिए केवल 25 लाख रुपये के कवर की जरूरत होगी जिसके लिए वार्षिक 9000 रुपये का प्रीमियम देना होगा। जायदाद में निवेश करते वक्त हमें इन बातों का भी ख्याल रखना होगा।
20 वर्ष बाद उस जायदाद की अनुमानित कीमत 2.33 करोड़ रुपये है। अगर गोपाल 20वें वर्ष की समाप्ति पर उसे बेचना चाहें तो उन्हें कैपिटल गेन टैक्स देना होगा।

इसकी गणना इंडेक्सेशन और बिना इंडेक्सेशन के की जा सकती है। पिछले इंडेक्सेशन संख्या का प्रयोग करते हुए अगर गणना करें तो जायदाद की कीमत तकरीबन 1.85 करोड़ रुपये बनती है। इस प्रकार देखें तो यहां 48 लाख रुपये का लाभ हो रहा है। 20 प्रतिशत की दर से 9.57 लाख रुपये का कर भी दे दिया जाता है। घर से प्राप्त होने वाली कुल राशि 2.23 करोड़ रुपये है।

किराए से प्राप्त होने वाली आय एवं कर बचत की राशि में से जीवन बीमा के प्रीमियम की राशि घटाकर शेष राशि को अगर ऐसी जगह निवेशित किया गया होता जहां से क्रमश: 8 प्रतिशत एवं 12 प्रतिशत का रिटर्न मिलता तो उससे प्राप्त होने वाली रकम क्रमश: 1.78 करोड़ रुपये एवं 2.85 करोड़ रुपये होती। इस प्रकार प्राप्त होने वाली कुल राशि क्रमश: 4.01 करोड़ रुपये एवं 5.08 करोड़ रुपये बैठती है। इतने पैसे कम नहीं होते।

अब इस निवेश को जरा दूसरे नजरिए से देखते हैं। मान लेते हैं कि गोपाल मासिक किस्त की राशि का म्यूचुअल फंड या इक्विटी में 20 वर्षों तक निवेश करते हैं तो उन्हें 5 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। यह राशि प्रॉपर्टी में निवेश से मिले राशि से कहीं अधिक है। अगर प्रॉपर्टी में निवेश करते हुए वह जीवन बीमा के प्रीमियम के पैसे काटकर शेष राशि का निवेश इसी प्रकार करे तो उसे 5.08 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।

हालांकि यह राशि म्यूचुअल फंड या इक्विटी में निवेश कर प्राप्त होने वाली राशि से थोड़ी अधिक है लेकिन आपको यह मालूम ही होगा कि जितने झंझट जायदाद में हैं उतने म्यूचुअल फंड या इक्विटी में नहीं हैं। जायदाद के मामले में कॉन्सेंट्रेशन रिस्क है, यह इलिक्विड है और ऋण लेने वाला व्यक्ति ब्याज दर के जोखिमों से प्रभावित होता है। यह स्पष्ट हो चुका है कि ऋण लेकर जायदाद में निवेश करना कहीं से भी लाभकारी नहीं है।

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