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महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

बिजनेस ब्यूरो | Jan 05, 2013, 01:44AM IST
महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
एक्टिव समाज : क्या-क्या गुजारिश
रिटायर्ड महिला आईएएस अधिकारी प्रोमिला की याचिका
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दोषी करार दिए जा चुके सांसदों व विधायकों को निलंबित करें
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध व दुष्कर्म के मामलों की जांच का जिम्मा महिला पुलिस अफसरों को दिया जाए
औरतों और बच्चों से जुड़े दुष्कर्म व अपराध के मामलों की सुनवाई भी केवल महिला जज ही करें
महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानूनों पर अमल में कोई कोताही न बरती जाए
अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता ओमिका दुबे की याचिका
महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामलों पर निर्णय सुनाने के लिए अतिरिक्त जजों की नियुक्ति का निर्देश दें
दुष्कर्म का शिकार होने वालों को अनिवार्य तौर पर मुआवजा देने की व्यवस्था की जाए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में महिलाओं की अश्लील तस्वीरों के प्रकाशन व प्रसारण पर रोक लगाने का आदेश सुनाएं
दोषी सांसद आएंगे लपेटे में - महिलाओं से जुड़े अपराधों में चार्जशीटेड सांसदों व विधायकों को सदन के अयोग्य ठहराने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार, इस बारे में केंद्र व राज्य सरकारों से मांगा जवाब
आप आने वाले समय में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनों का कड़ाई से पालन किए जाने की उम्मीद कर सकते हैं। देश के सर्वोच्च न्यायालय के ठोस कदम से यह आस बंधी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सहमति व्यक्त करते हुए कहा है कि वह दुष्कर्म मामलों के फास्ट-ट्रैक ट्रायल और महिला सुरक्षा कानूनों पर अमल से जुड़े मसलों पर गौर करने के लिए तैयार है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि दामिनी गैंगरेप हाल के दिनों का सबसे वीभत्स अपराध है।
सुप्रीम कोर्ट ने गत 16 दिसंबर को हुए दामिनी गैंगरेप मामले के बाद दाखिल की गई दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान ये बातें कहीं। शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि वह कुछ सीमित मसलों पर सरकार को केवल नोटिस भेज सकता है।
अदालत का कहना है कि इन याचिकाओं में कुछ अपील ऐसी हैं जो उनके क्षेत्राधिकार से बाहर हैं। न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने कहा, 'सांसदों और विधायकों को अयोग्य ठहराना हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं है। अत: अदालत इस बारे में कोई राहत भरा निर्णय नहीं सुना सकती है।
' वैसे, खंडपीठ ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति के स्टैटस का ख्याल किए बगैर इस तरह के मामलों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। खंडपीठ ने सुझाव दिया, 'पीआईएल दाखिल करने वालों को इस बात पर जोर देना चाहिए था कि अगर किसी मामले में जांच कार्य अपेक्षा के अनुरूप न पाया जाए तो इसे जांच अधिकारी का गलत आचरण करार दिया जाए।
'खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों व दुष्कर्म से जुड़े मौजूदा कानून की समीक्षा और उसे मजबूत व कारगर बनाने के लिए गठित की गई न्यायमूर्ति जे एस वर्मा कमेटी की शर्तों वगैरह से उसे वाकिफ कराए।
खंडपीठ को यह जानकारी दी गई कि देश में 4,835 सांसद एवं विधायक हैं। इनमें से 1,448 सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं।

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अदालत ने कहा, वह दुष्कर्म मामलों के फास्ट-ट्रैक ट्रायल व महिला सुरक्षा कानूनों पर अमल से जुड़े मसलों पर गौर करने को तैयार

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