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नियम नंबर एक: पूंजी को खोना नहीं चाहिए, नियम नंबर दो: पहले नियम को ना भूलें।

कैपिटल प्रोटेक्शन ओरिएंटेड फंड जोखिम कम, फायदा ज्यादा

जिजू विद्याधरन | Feb 15, 2013, 02:35AM IST
कैपिटल प्रोटेक्शन ओरिएंटेड फंड जोखिम कम, फायदा ज्यादा

हाल के वर्षों में म्यूचुअल फंड उद्योग ने विभिन्न प्रकार के जोखिम प्रोफाइल वाले निवेशकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कई तरह की योजनाओं की शुरूआत की। दरअसल कुछ परिसंपत्ति वर्ग (डेट ओरिएंटेड) फिक्स्ड रिटर्न मुहैया कराते है जिनमें अपेक्षाकृत कम जोखिम होता है

जबकि अन्य परिसंपत्ति वर्ग जैसे इक्विटी और गोल्ड ऊंचा मुद्रास्फीति समायोजित रिटर्न देते हैं पर इनमें जोखिम के साथ पूंजी के क्षय का खतरा भी रहता है।

कैपिटल प्रोटेक्शन ओरिएंटेड फंड (सीपीओएफ) जैसा कि इनका नाम है, ऐसे निवेशकों की पूंजी सुरक्षित रखते हैं जो कि इक्विटी बाजार में निवेश तो करना चाहते हैं लेकिन अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने की इच्छा रखते हैं। ये परिपक्वता पर शून्य से सकारात्मक रिटर्न मुहैया कराते हैं।

क्या है कैपिटल प्रोटेक्शन ओरिएंटेड फंड
यह घरेलू म्युचुअल फंडों की हाइब्रिड योजनाएं हैं। ये कॉर्पस का 75-80 फीसदी डेट व बाकी इक्विटी में निवेश करते हैं। उदाहरण के तौर पर 100 रुपये की निवेश रकम से 80 रुपये डेट में और 20 रुपए इक्विटी में निवेश किए जाएंगे। डेट का हिस्सा उच्चतम रेटिंग की प्रतिभूतियों या सरकारी बांडों में इस तरह से निवेश किया जाएगा ताकि सीपीओएफ की अवधि में बढ़कर 100 रुपये हो जाए।

अवधि खत्म होने के दौरान इसका मूलधन तो बचा ही रहता है साथ ही निवेशक को इक्विटी के हिस्से से रिटर्न भी मिल जाता है। इसमें निवेशकों को इक्विटी बाजार के उतार-चढ़ाव की चिंता करने की जरूरत नहीं होती क्योंकि उनका मूलधन डेट में निवेश की वजह से सुरक्षित रहता है।

निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सीपीओएफ पूंजी सुरक्षित रखने की गारंटी नहीं देते बल्कि ये निवेश पोर्टफोलियो के आधार पर आश्वासन देते हैंं। पूंजी की सुरक्षा परिपक्वता के समय ही एश्योर्ड होती है न कि फंड की अवधि के दौरान।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पूंजी सुरक्षा के ध्येय को प्राप्त करने के लिए नियम बनाया है कि पोर्टफोलियो संरचना की रेटिंग किसी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा की गई हो और इसकी समीक्षा तिमाही आधार पर की जाए। किसी सीपीओएफ के लिए उच्चतम रेटिंग एएए-एसओ है जो सुनिश्चित करता है कि मैच्योरिटी पर निवेशकों को यूनिटों की फेस वैल्यू का भुगतान समय पर किया जाएगा।

सीपीओएफ में एक, दो, तीन या पांच साल की लॉक-इन अवधि होती है और ये तरलता के ध्येय ये स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध होते हैं। हालांकि इनकी ट्रेडिंग कम होती है क्योंकि ज्यादातर निवेशक इसमें लॉक-इन अवधि तक बने रहते हैं। ये फंड अधिकांशत: अपने बेंचमार्क इंडेक्स व एसेट एलोकेशन के लिए क्रिसिल एमआईपीईएक्स का उपयोग करते हैं।

किन्हें करना चाहिए निवेश
कम जोखिम उठाने वाले ऐसे निवेशक जो इक्विटी की अप साइड का आनंद उठाना चाहते हैं और अपनी पूंजी सुरक्षित रखने की इच्छा रखते हैं, उनके लिए यह फंड उपयुक्त हैं। बेहतर नतीजे के लिए इस फंड में मैच्योरिटी तक निवेश बनाए रखना चाहिए।

कराधान  
सीपीओएफ पर डेट फंडों की तरह ही टैक्स लगाया जाता है। अगर यूनिट 12 महीने से कम अवधि के लिए रखे गए तो शॉर्ट टर्म गेन माना जाएगा और इस पर व्यक्ति जिस कर-वर्ग में आता है उस हिसाब से कर लगाया जाएगा। 12 महीने ये अधिक अवधि तक यूनिटों में निवेश बनाए रखने से प्राप्त हुए लांग टर्म कैपिटल गेन पर 10 प्रतिशत के हिसाब से बिना इंडेक्सेशन के और इंडेक्सेशन के साथ 20 प्रतिशत के हिसाब से कर लगाया जाएगा।

सीपीओएफ में जोखिम
सीपीओएफ का सबसे बड़ा जोखिम क्रेडिट रिस्क है इसलिए फिलहाल सेबी ने एएए से कम रेटेड डेट इंस्ट्रूमेंट में सीपीओएफ का निवेश करने पर रोक लगा रखी है। क्रेडिट रिस्क यह सुनिश्चित करते हुए कम किया जा सकता है कि स्कीम में शामिल डेट इंस्ट्रूमेंट उच्च गुणवत्ता वाले हैं।

सीपीओएफ का चयन व प्रदर्शन
निवेशकों को उच्चतम रेटिंग वाले सीपीओएफ में ही निवेश करना चाहिए। फंड हाउस का चयन उनके इक्विटी फंड प्रबंधक की क्षमता पर आधारित होना चाहिए, क्योंकि अगर इक्विटी बाजार में तेजी है तो रिटर्न अधिक मिल सकता है।

जहां तक प्रदर्शन की बात है तो क्रिसिल के विश्लेषण से पता चला कि सीपीओएफ ने परिपक्वता पर न केवल सकारात्मक रिटर्न दिया बल्कि उनमें से अधिकांश से एस एंड पी सीएनएक्स निफ्टी को भी पीछे कर दिया।

मैच्योर हुए अधिकांश सीपीओएफ ने 5-9 प्रतिशत का एनुअलाइज्ड लाभ दिया है जबकि इक्विटी मार्केट (एस एंड पी सीएनएक्स निफ्टी) ने नकारात्मक से 10 प्रतिशत का सकारात्मक रिटर्न दिया है। सीपीओएफ के रिटर्न में विविधता होती है जो इक्विटी मार्केट के उतार-चढ़ाव और सीपीओएफ की अवधि पर निर्भर करता है।

निष्कर्ष
जो निवेशक इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं पर उनमें होने वाली गिरावट के जोखिम से चिंतित रहते हैं, उनके लिए सीपीओएफ में निवेश एक आकर्षक विकल्प है। इक्विटी बाजारों में जारी अनिश्चितताओं से इस श्रेणी के फंडों की ओर निवेशकों का ध्यान गया है।

इसी वजह से इस प्रकार के निवेश विकल्प में एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) पिछले दो साल में तीन गुना बढ़कर दिसंबर 2010 में 12 योजनाओं में 1,829 करोड़ रुपये से दिसंबर 2012 में 58 योजनाओं में 6,025 करोड़ रुपये हो गया है। पर इसमें निवेश करने का फैसला निवेशकों के जोखिम प्रोफाइल, लक्ष्य, नकदी की जरूरत के आधार पर लिया जाना चाहिए।
- लेखक क्रिसिल रिसर्च के फंड्स एवं फिक्स्ड इनकम रिसर्च के डायरेक्टर हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।

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