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बीटी कॉटन की तर्ज पर बीटी कॉफी की तैयारी

बिजनेस भास्कर बंगलुरू | Jan 25, 2013, 00:03AM IST
बीटी कॉटन की तर्ज पर बीटी कॉफी की तैयारी

पहल
बीटी कॉफी के लिए फ्रांस की कंपनी के साथ मिलकर काम शुरू
बड़ी कंपनी जोडऩे के लिए जल्द जारी होगा ईओआई
अनुवांशिक संशोधन से कॉफी का उत्पादन बढ़ेगा देश में
काली मिर्च व इलायची उत्पादन भी बढ़ाने के प्रयास

कॉफी का उत्पादन और उसकी उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से बीटी कॉटन के तर्ज पर बीटी कॉफी की तैयारी की जा रही है। कॉफी बोर्ड कॉफी के अनुवांशिक परिवर्तन के लिए बड़ी कंपनियों की तलाश में जुट गया है ताकि उनकी मदद से इस काम को अंजाम दिया जा सके।

कॉफी के कुल उत्पादन में अरेबिका कॉफी की हिस्सेदारी 35 फीसदी तो रोबस्ता की 65 फीसदी है। अरेबिका कॉफी की हिस्सेदारी लगातार कम हो रही है।

मुख्य रूप से अरेबिका कॉफी के अनुवांशिक परिवर्तन के लिए ही कॉफी बोर्ड प्रयासरत है। कॉफी के उत्पादन में उत्पादकों की रुचि बनाए रखने के लिए कॉफी के उत्पादन के साथ काली मिर्च के साथ अन्य मसालों की खेती पर भी फोकस किया जा रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय के अधीन काम करने वाले कॉफी बोर्ड के प्लांट बायोटेक्नोलॉजी डिवीजन के प्रमुख डा. एच.एल. श्रीनाथ ने बताया कि बीटी कॉटन के तर्ज पर बीटी कॉफी के विकास के लिए फ्रांस की कंपनी सीराडे फ्रांस के साथ काम किया गया है।

कॉफी के अनुवांशिक परिवर्तन के लिए अब उनका डिवीजन किसी बड़ी कंपनी के साथ मिलकर काम करना चाहता है और इसके लिए डिवीजन जल्द ही एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी करने वाला है।

उन्होंने बताया इस प्रकार के परिवर्तन में सफलता पाने पर कॉफी के उत्पादन के साथ उत्पादकता में भी बढ़ोतरी होगी। कॉफी बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक कॉफी का उत्पादन लगभग तीन-चार लाख टन प्रतिवर्ष होता है और पिछले कई सालों से इस स्तर में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। कॉफी की खेती चार लाख हैक्टेयर से अधिक जमीन पर की जाती है।  

कर्नाटक के कुर्ग इलाके में कॉफी पर पिछले 35 साल से रिसर्च में जुटे उप-निदेशक एन. रामामूर्ति के मुताबिक अरेबिका कॉफी को बचाने के लिए कॉफी के साथ काली मिर्च व अन्य मसालों का उत्पादन जारी रखना होगा। अरेबिका कॉफी के उत्पादन के लिए छायादार पेड़ लगाए जाते हैं और उस पेड़ के सहारे काली मिर्च का उत्पादन किया जाता है।

उन्होंने बताया कि एक एकड़ में अरेबिका कॉफी की खेती के लिए 60 छायादार पेड़ लगाए जाते हैं और एक पेड़ के सहारे औसतन 7-10 किलो काली मिर्च का उत्पादन किया जा सकता है। कॉफी उत्पादकों को एक किलो काली मिर्च की कीमत 400 रुपये मिल जाती है।

काली मिर्च के अलावा इलायची व अन्य मसालों की भी खेती शुरू की गई है। रामामूर्ति के मुताबिक कॉफी की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए पौधारोपण के डिजाइन में भी परिवर्तन किया जा रहा है।  देश का 71 फीसदी कॉफी उत्पादन कर्नाटक में किया जाता है। कर्नाटक में मुख्य रूप से कुर्ग, चिकमंगलूर और हसन में कॉफी की खेती होती है।

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कॉफी का उत्पादन और उसकी उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से बीटी कॉटन के तर्ज पर बीटी कॉफी की तैयारी की जा रही है।

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