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ऐसा कारोबार जो सिर्फ पैसा बनाए,वह बेकार है।

आसान है फिक्स्ड हेल्थ प्लान का क्लेम

राजीव जामखेड़कर | Feb 19, 2013, 03:18AM IST
आसान है फिक्स्ड हेल्थ प्लान का क्लेम

फिक्स्ड-बेनीफिट हेल्थ प्लान समझने में आसान हैं
इसके तहत क्लेम लेने की प्रक्रिया है सरल
इलाज के वास्तविक दस्तावेज की नहीं पड़ती है जरूरत
इसके लिए जमा करा सकते हैं दस्तावेजों की प्रति

यह जानकर हैरानी होगी कि भारत में स्वास्थ्य बीमा की पैठ केवल 5 फीसदी है। आम आदमी को या तो इस बारे में जानकारी नहीं है या फिर वह स्वास्थ्य बीमा प्लान लेने के मसले पर दुविधा में हैं। दूसरी ओर, स्वास्थ्य सेवा से जुड़े खर्चों में दिन-ब-दिन वृद्धि हो रही है, जिसके चलते स्वास्थ्य बीमा आम आदमी के लिए अनिवार्य बन चुका है।

तकनीक और उपचार में सुधार आया है पर इसकी लागत में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। चिकित्सा विज्ञान में तकनीक के विकास के परिणामस्वरूप लोगों को बेहतर इलाज मुहैय्या कराया जा रहा है। इलाज काफी महंगा हो चुका है और यह भारत के मध्यम वर्गीय लोगों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।

ग्राहकों की चिंता
ग्राहकों के सामने बहुत से बीमा प्लान मौजूद है जिन्हें समझना काफी जटिल है। फायदे, नयापन और एक्सक्लूजंस के हिसाब से ग्राहकों के सामने बहुत से विकल्प मौजूद है पर इन्हें समझना काफी कठिन है। ऐसी स्थिति में ग्राहक खुद से फैसला नहीं ले पाते हैं और वे अपने एजेंट या ब्रोकर की सलाह पर भरोसा कर लेते हैं। दरअसल, भारी संख्या में लोग स्वास्थ्य बीमा प्लान खरीदते हैं लेकिन उन्हें यह पता नहीं होता कि उन्होंने क्या खरीदा है।

इसकी सच्चाई तब सामने आती है जब कोई व्यक्ति अस्पताल में भर्ती होता है और उसे बिल के भुगतान के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है। आमतौर पर, बिल में कई तरह के शुल्क शामिल होते हैं, जैसे-कमरे का किराया, डॉक्टर का परामर्श शुल्क, सर्जरी, दवा, जांच, भोजन आदि। इन सभी को मिलाकर राशि इतनी अधिक हो जाती है कि जेब खाली हो जाता है।

ऐसे में ग्राहकों को लगता है कि उनकी पॉलिसी ने उनसे जितना वादा किया था उन्हें उससे कम मिला है। सही मायने में, बीमा कंपनी की यह मंशा कतई नहीं होती है कि ग्राहकों को दावा भुगतान से संबंधित खराब अनुभव का सामना करना पड़े और उनकी जेब खाली हो जाए। बीमा प्लान के खरीद के समय, ग्राहकों की जानकारी का अभाव इसका एक सबसे महत्वपूर्ण कारण है।

क्या है फिक्स्ड-बेनीफिट हेल्थ प्लान
इस बात को ध्यान में रखते हुए, कुछ बीमा कंपनियों ने फिक्स्ड बेनीफिट हेल्थ प्लान लांच किया है जिससे ग्राहकों को दावा लेते वक्त हैरानी न हो। फिक्स्ड-बेनीफिट हेल्थ प्लान ऐसे वह स्वास्थ्य बीमा प्लान है, जो ग्राहकों के दो प्रमुख चिकित्सा खर्च को पूरा करने पर केंद्रित है।

पहला है अस्पताल के कमरे का खर्च और दूसरा सर्जरी का खर्च। इस तरह के प्लान कमरों के खर्च के लिए एक निर्धारित राशि का भुगतान करते हैं और सर्जरी की श्रेणी के आधार पर निर्धारित राशि का भुगतान करते हैं। नियमानुसार, ये प्लान परामर्श शुल्क, चिकित्सा, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी कवर नहीं करते।

कैसे काम करता है यह प्लान
इस प्लान में हॉस्पिटलाइजेशन के हर दिन के लिए निर्धारित भुगतान है और विभिन्न श्रेणियों की सर्जरी के लिए भी निश्चित भुगतान किया जाता है। इन्हें फिक्स्ड पेआउट कहते हैं, क्योंकि मान्य दावे की स्थिति में, ग्राहकों को बीमा कंपनी से यह राशि मिलेगी, चाहे वास्तविक खर्च जो भी हो। इसका अर्थ है कि, कोई भी ग्राहक अस्पताल में घुसने से पहले दावा की राशि की गणना कर सकता है।

इसके चलते दावा प्रक्रिया के दौरान हैरान होने की स्थिति पैदा नहीं होती है। कराये गये बाजार शोध दर्शाते हैं कि स्वास्थ्य बीमा की स्थिति में, ग्राहकों की असंतुष्टि का पहला कारण दावा भुगतान है। इसके अलावा, फिक्स्ड -बेनीफिट हेल्थ प्लान में दावा करने के लिए असली दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होती है।

दावा की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मूल दस्तावेजों की प्रति जमा की जा सकती है। यह विशेषता इसे उपयुक्त हेल्थ प्लान बनाती है। यदि नियोक्ता बीमा या ग्राहक के मौजूदा स्वास्थ्य बीमा से मिलने वाला कवरेज पर्याप्त नहीं है, तो इस तरह के हेल्थ प्लान से इस अंतर को पूरा किया जा सकता है। फिक्स्ड- बेनीफिट हेल्थ प्लान उन ग्राहकों के लिए है, जो दावा प्रक्रिया की दृष्टि से स्पष्ट उत्पाद खरीदना चाहते हैं।

फिक्स्ड-बेनीफिट हेल्थ प्लान का चुनाव
फिक्स्ड-बेनीफिट हेल्थ प्लान विभिन्न स्तर के कवरेज के साथ उपलब्ध है। ग्राहकों को ऐसा प्लान चुनना चाहिए जो बेहतरीन तरीके से उनकी आवश्यकताएं पूरी करे। फिक्स्ड-बेनीफिट हेल्थ प्लान चुनने से पहले, कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। ऐसा प्लान चुने
<>जो अधिकतम संख्या में सर्जरी कवर करे
<>कैश लेस सुविधा सुविधा उपलब्ध कराये
<>अस्पतालों का नेटवर्क विस्तृत हो
<>क्रिटिकल इलनेस जैसे महत्वपूर्ण राइडर्स उपलब्ध कराये
<> नो-क्लेम लाभ प्रदान करे
(लेखक एगॉन रेलिगेयर लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी हैं)

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यह जानकर हैरानी होगी कि भारत में स्वास्थ्य बीमा की पैठ केवल 5 फीसदी है। आम आदमी को या तो इस बारे में जानकारी नहीं है

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