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बीमा पॉलिसी बच्चे के नहीं अपने नाम से लें

चिराग राठौड़ | Feb 09, 2013, 00:05AM IST
बीमा पॉलिसी बच्चे के नहीं अपने नाम से लें

पिछले हफ्ते मुझे हमारे पार्टनर बैंकों में से एक की शाखा में कुछ समय बिताने और ग्राहकों से मिलने का मौका मिला। बैंक के ग्राहकों में से एक बेहद युवा जोड़ा मिला, जिनके 5 वर्ष और एक वर्ष की आयु के दो बच्चे हैं। जैसा कि सभी जानते हैं कि घर में छोटे बच्चे होने (उन्हें अपने साथ बैंक की शाखा में लेकर आने) की अपनी चुनौतियां होती हैं।

हालांकि यह जोड़ा अपने हालात और परिवार संभालने के दबाव, अपनी नौकरियों और वित्त में संतुलन बनाने की अपनी तरफ से भरपूर कोशिश कर रहा था, जो कि बेहद मुश्किल काम साबित हो सकता है!

लेकिन जो देख कर मैं हैरान रह गया वह यह कि उन्होंने कितनी जल्दी यह समझ लिया कि इस विशिष्ट स्थिति में उन्हें ऐसा प्लान चाहिए, जो उनके बच्चों के विकास और उनकी उच्च शिक्षा के समय काम आए और उनकी जरूरत के हिसाब से उसमें बदलाव किए जा सकें। यह जोड़ा महज एक स्टैंडर्ड बीमा या निवेश जैसे विकल्प से संतुष्ट होने वालों में से नहीं था।

इस युवा मां ने कहा कि वह इस बात पर बेहद स्पष्ट है कि उसे ऐसा प्लान चाहिए, जो उनके द्वारा बनाए जा रहे शिक्षा व शादी फंड को सुरक्षित रखे और अगर उन्हें कुछ हो जाए तो बच्चों के स्कूल फीस भी भरती रहे क्योंकि वे दोनों ही परिवार की आय के स्रोत हैं। उन्हें किसी हादसे के बाद एक 'इकट्ठी' रकम नहीं चाहिए थी बल्कि एक वास्तविक प्लान चाहिए, जो आगे प्रीमियम भरे बिना भी जारी रहे और वक्त पर काम आए यानी जब उनके बच्चे कॉलेज जाने के लिए या शादी के लिए तैयार हों।

सौभाग्य से बाजार में चाइल्ड प्लान के तहत आज ऐसे कई प्लान मौजूद हैं। हम बच्चों की उच्च शिक्षा और उनकी शादी, जो रोजाना महंगी होती जा रही है, के लिए लंबी अवधि के निवेश की जरूरत को अच्छी तरह समझते हैं। ऐसे निवेश का प्रमुख लक्ष्य है आपके बच्चे के लिए आपके फाइनेंशियल प्लान की सुरक्षा यानी यह एक ऐसा प्लान है,

जो इकट्ठा होकर लक्षित रकम (निवेश के प्रकार के आधार पर) के बराबर होगा, भले ही माता-पिता जीवित हो या नहीं। इसके अलावा आप कवरेज भी खरीद सकते हैं, जिससे आपका प्लान और मजबूत हो जाएगा। उदाहरण के लिए माता-पिता को गंभीर बीमारी होने या स्थायी तौर पर उनके विकलांग होने के बाद भी प्लान चलता रहेगा।

लेकिन जोड़ा इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं था कि वे फॉर्म में क्या भरें? उन्होंने एक बीमा पॉलिसी लेने की योजना बनाई थी लेकिन अब वे सोच रहे थे कि उसे अपने नाम पर खरीदें या फिर बच्चों के नाम पर?

इसका जवाब बेहद आसान है। बीमा में बीमित व्यक्ति वह होना चाहिए, जिसके नहीं रहने से वित्तीय नुकसान होगा यानी परिवार में कमाई करने वाले सदस्य।

माता-पिता को जीवन बीमा हमेशा अपने नाम पर खरीदना चाहिए, जिसमें वे बीमित हों और बच्चा लाभार्थी हो क्योंकि इसका प्रमुख लक्ष्य काम करने वाले व्यक्ति की मृत्यु से हुए वित्तीय नुकसान को कवर करना है। जीवन बीमा खरीदने की वजह है कमाई करने वाले व्यक्ति के नहीं रहने पर आय का जरिया बदलना है। कमाई करने वाले व्यक्ति पर निर्भर लोगों को पॉलिसी में लाभार्थी बनाया जाना चाहिए।

एक चाइल्ड प्लान में नौकरीशुदा माता-पिता बीमित होने चाहिए और बच्चा लाभार्थी या नामित होना चाहिए। प्रीमियम का भुगतान पॉलिसी धारक करता है और पॉलिसी की अवधि समाप्त होने पर रकम का भुगतान बच्चे को किया जाता है। पॉलिसी के परिपक्व होने पर मिली रकम का इस्तेमाल तय किए गए विभिन्न लक्ष्यों मसलन बच्चों की उच्च शिक्षा या उसकी शादी के लिए किया जा सकता है।

लेकिन दुर्भाग्यवश अगर बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो भविष्य में सभी प्रीमियम का भुगतान मृत व्यक्ति की ओर से जीवन बीमा कंपनी करेगी। पॉलिसी की अवधि समाप्त होने पर बच्चे को प्लान की परिपक्व रकम मिलेगी और माता-पिता द्वारा बच्चे के लिए तय किए गए लक्ष्य तब भी पूरे हो सकेंगे, जब कमाई करने वाला सदस्य जीवित नहीं हो।

सवाल यह है कि क्या किसी को बच्चे के लिए जीवन बीमा खरीदना चाहिए जहां बच्चा बीमित हो? इसका जवाब स्पष्ट तौर पर ना है। उद्देश्य की पूर्ति के लिए माता-पिता का जीवन बीमा होना चाहिए। हालांकि, कुछ दूसरी वजहें भी हैं कि क्यों कभी बच्चे के नाम पर प्लान खरीदना भी उपयोगी होता है।

पहला, अगर यह लंबी अवधि की पॉलिसी है तो बच्चे में शुरू से ही लंबी अवधि की बचत की आदत आती है, जहां माता-पिता बच्चे के कमाना शुरू करने तक उसकी पॉलिसी का प्रीमियम भरते हैं और उसकी नौकरी के बाद बच्चा खुद प्रीमियम का भुगतान करता है। दूसरी बात यह है कि जीवन बीमा कवर के लिए ली गई लंबी अवधि की पॉलिसी को जल्दी शुरू करना फायदेमंद रहता है क्योंकि तब कम प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है।

इसके अलावा आपको न्यूनतम मेडिकल जरूरतों के साथ ज्यादा कवरेज मिल सकती है, जो बढ़ती उम्र में मिलना मुमकिन नहीं होता है। तीसरी, व्यक्तिगत स्वास्थ्य कवर के लिए, जहां खराब सेहत और अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम प्रत्येक उम्र वर्ग में होता है इसलिए जल्दी शुरुआत करना फायदेमंद साबित होता है और इससे न्यूनतम भुगतान जरूरत के साथ निरंतर कवरेज सुनिश्चित हो सकती है।

आदर्श तौर पर माता-पिता को पहला चाइल्ड इंश्योरेंस खरीदना चाहिए, जहां वे बीमित हों। एक बार बच्चे के जीवन के अहम पड़ावों के लिए और कमाने वाले सदस्यों के विकल्प के तौर पर  जरूरी वित्तीय सुरक्षा हासिल हो जाए, फिर दूसरी संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं कि बच्चे के नाम पर भी बीमा खरीदने की जरूरत है या नहीं।

बैंक की शाखा में मिले युवा जोड़े को मैंने यही सलाह दी। पहले खुद का बीमा करवा कर अपने बच्चों के सपनों को सुरक्षित करो और फिर देखो कि आपके पास बच्चों के नाम से बीमा खरीदने के लिए अन्य वजहें हैं या नहीं।

- लेखक केनरा एचएसबीसी ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स लाइफ इंश्योरेंस के अप्वांइटेड एक्चुअरी और डायरेक्टर- एक्चुरियल एंड प्रोडक्ट्स हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।

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