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जीवन बीमा क्लेम को अस्वीकृत होने से बचाएं

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली | Feb 05, 2013, 02:44AM IST
जीवन बीमा क्लेम को अस्वीकृत होने से बचाएं

मृत्यु संबंधी दावे कई बातों पर निर्भर करते हैं। इनमें सही और ईमानदारी पूर्वक दी गई जानकारियां सबसे प्रमुख होती है। भरोसा ही उस संकल्प का मूल आधार बनता है जो पॉलिसीधारक अपने परिवार को सौंपता है

प्राय: अस्वीकृत दावों के मामले में, प्रपोजल फॉर्म में गलत जानकारी दिया जाना एक मुख्य कारण होता है। ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि बीमा कंपनियां दावों के निपटारे को लेकर गंभीर होती हैं लेकिन उन्हें उन दावों की सच्चाई की पूरी पड़ताल करनी होती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस प्रक्रिया में पॉलिसीधारक को कोई नुकसान न उठाना पड़े।

मृत्यु के समय दावे की प्रासंगिकता पर विचार किए बगैर जीवन बीमा कराना एकदम निरर्थक प्रयास है। अपने जीवन का बीमा कराने का प्रमुख मकसद यही होता है कि हम अपने आश्रितों का भविष्य उस स्थिति में सुरक्षित रखना चाहते हैं जबकि हमारी असामयिक मौत के चलते वह आर्थिक संकट में पडऩे वाले होते हैं।

अलबत्ता, परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत होने पर यह दुख की घड़ी उस स्थिति में संकट में भी बदल सकती है जबकि परिवार की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो। लिहाजा, हर कमाऊ सदस्य का यह नैतिक दायित्व भी है कि वह सोच-समझकर और ठोक-बजाकर ही जीवन बीमा पॉलिसी खरीदे।

अपने कर्तव्य को सही ढंग से पूरा करने के लिए पॉलिसीधारक को अपने और जीवन बीमा कंपनी के बीच होने वाले अनुबंध में पारदर्शिता बरतनी चाहिए, क्योंकि यही करार उसके न रहने पर उसके परिवार की सुरक्षा और भरण-पोषण की जिम्मेदारी पूरी करता है।

पारदर्शिता है जरूरी
मृत्यु संबंधी दावे कई बातों पर निर्भर करते हैं। इनमें सही और ईमानदारी पूर्वक दी गई जानकारियां सबसे प्रमुख होती है। जीवन बीमा पॉलिसी संबंधी दस्तावेजों को भरते समय उसी भावना और नैतिकता के बोध से गुजरना चाहिए जो पॉलिसीधारक हमेशा अपने परिवार के लिए चाहता है। भरोसा ही उस संकल्प का मूल आधार बनता है जो पॉलिसीधारक अपने परिवार को सौंपता है।

कैसे बचें परेशानियों से
जीवन बीमा पॉलिसी फार्म स्वयं भरें और इसके लिए एजेंट या सर्विस एडवाइज़र पर कतई निर्भर न रहें। मेडिकल हिस्ट्री और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का पूरा ब्योरा दें, किसी भी स्थिति में अपनी उम्र गलत न बताएं या आवेदन के साथ अपेक्षित अन्य कागजातों के साथ छेड़छाड़/कांट-छांट न करें, मौजूदा इंश्योरेंस कवर के बारे में जानकारी दें और उसकी पुष्टि करें, यदि ये प्रमाण गलत पाए जाते हैं तो इनसे न सिर्फ आवेदक के आश्रित पॉलिसी के तहत मिलने वाले फायदों से वंचित रह जाते हैं बल्कि बीमाकर्ता के मन में भी संदेह पैदा होता है और अनावश्यक रूप से अवांछित स्थितियां पैदा होती हैं।

आवेदन पत्र में मांगी गई सूचनाएं भरते समय पूरा समय दें, किसी प्रकार की गलतियों की गुंजाइश न छोडें़। जारी की जा रही पॉलिसी से संबंधित नियमों एवं शर्तों को बखूबी जान-समझ लें; यदि कोई बात या पक्ष या समझ में नहीं आए तो उस बारे में बीमाकर्ता से स्पष्टीकरण अवश्य लें।

याद रखें कि यह पॉलिसी आपकी गैर-मौजूदगी में आपके परिवार की सुरक्षा का स्रोत है, लिहाजा नियमित रूप से प्रीमियम राशि का भुगतान करें और उनसे फायदा उठाएं। इंश्योरेंस कवर के बारे में नामित व्यक्ति को इसकी जानकारी अवश्य दें ।

यह जानना महत्वपूर्ण है कि पूर्ण और ईमानदारी-पूर्वक दी गई सूचनाएं आगे चलकर दावा फार्म के अस्वीकृत होने की आशंका को समाप्त करती हैं। अपनी समस्या को जाहिर करना उसे छिपाने से बेहतर है क्योंकि ऐसा कर कम समय में दावे की औपचारिकताओं को पूरा किया जा सकता है।

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प्राय: अस्वीकृत दावों के मामले में, प्रपोजल फॉर्म में गलत जानकारी दिया जाना एक मुख्य कारण होता है।

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