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ऐसा कारोबार जो सिर्फ पैसा बनाए,वह बेकार है।

बीमा एजेंटों पर जरूरत से ज्यादा न करें भरोसा

अनुज भागिया | Jan 19, 2013, 00:30AM IST
बीमा एजेंटों पर जरूरत से ज्यादा न करें भरोसा

आंखें-मूंद कर बीमा एजेंट पर भरोसा करना अच्छा निर्णय नहीं है। जिस तरह आप शोरूम में कार दिखाने वाले व्यक्ति की पसंद की कार नहीं खरीदते उसी तरह खुद के लिए बीमा योजना चुनने की जिम्मेदारी बीमा एजेंट को मत दीजिए

पिछले हफ्ते आई एक कॉल ने मुझे चिंतित कर दिया। यह ग्राहक एक खास यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) के बारे में विस्तृत जानकारी मांग रहा था। हमारे प्रतिनिधि ने उसे यूलिप के प्रावधानों और रिटर्न के बारे में विस्तार से जानकारी देनी शुरू की, अचानक ग्राहक बोला, 'इन सबको छोडि़ए और मुझे बताइए कार के बारे में ? क्या मुझे कार नहीं मिलेगी ?'

फिर एजेंट ने कहा, 'आप बस इस प्रपोजल फॉर्म पर हस्ताक्षर कर दीजिए! और बाकी सब मैं देख लूंगा।Ó और यहीं से गड़बड़ की शुरुआत हुई।

हम हमेशा जल्दी में रहते हैं और जल्द से जल्द चीजों को निपटाने की कोशिश करते हैं। इसलिए अक्सर हम आधी बातें ही सुनते हैं और सिर्फ चुनिंदा बातें सुनने की ही आदत विकसित कर लेते हैं। यह मामला इसी आदत का सटीक उदाहरण था।

एजेंट ग्राहक के पास गया, जिसने जल्दी सौदा करने के चक्कर में उससे योजना का विस्तृत ब्योरा भी नहीं सुना। एजेंट कहता है बीमा कंपनी अपने ग्राहकों को एक बजट कार मुफ्त में दे रहा है लेकिन यह पेशकश सिर्फ पहले 100 ग्राहकों के लिए ही है।

हकीकत में ऐसी कोई योजना ही नहीं थी बल्कि वास्तविकता यह है कि ऐसी कोई योजना कभी अस्तित्व में आ भी नहीं सकती। जब भी हम ऐसी योजनाओं के बारे में सुने तो हमें पहले इसकी पृष्ठभूमि और आधार समझने की कोशिश करनी चाहिए। हमें विस्तार से पॉलिसी के दस्तावेज पढऩे चाहिए, जिनमें स्पष्ट लिखा होता है कि पॉलिसी में क्या शामिल है और क्या नहीं।

इस ग्राहक की सबसे बड़ी गलती थी पॉलिसी के दस्तावेजों को नहीं पढऩा। उसने सिर्फ एक खाली प्रपोजल पर हस्ताक्षर कर दिए और बाकी काम अपने एजेंट के भरोसे छोड़ दिया। कुछ अनैतिक एजेंट उद्योग का नाम खराब करते हैं और यह एजेंट उनमें से ही एक था।

ऐसे एजेंट उन ग्राहकों को ढूंढते रहते हैं, जिन्हें वित्तीय योजनाओं की ज्यादा जानकारी नहीं होती है और ये उनकी विभिन्न फर्जी योजनाओं में आसानी से फंस जाते हैं। एक बार ग्राहक उनकी योजनाओं में दिलचस्पी दिखाता है तो एजेंट ग्राहक के समक्ष फॉर्म भरने से लेकर सारा काम करने की पेशकश रख देते हैं।

और यही पर होती है सबसे ज्यादा धोखेबाजी। अनभिज्ञ ग्राहक रिटर्न गिफ्ट/ऑफर का इंतजार करता रह जाता है और इसी सब में 15 दिन की फ्री-लुक अवधि समाप्त हो जाती है। यह वह अवधि होती है, जिसमें ग्राहक के पास योजना लौटाने का विकल्प होता है।

अब ग्राहक खुद को फंसा हुआ पाता है। पॉलिसी के शुरू के कुछ साल में निकलने के ज्यादा शुल्क लगने के कारण ग्राहक चाहे भी तो अपनी पॉलिसी रद्द नहीं करा सकता है।

आपको क्या करना चाहिए
उत्पाद के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करना पहला कदम है। उत्पाद, उससे जुड़े प्रावधानों, रिटर्न और कंपनी के पिछले प्रदर्शन को ठीक से समझने के लिए ग्राहक को विवरणिका और पॉलिसी के शब्दों को गौर से पढऩा चाहिए।

यह सुनिश्चित करें कि आप बीमा कंपनी द्वारा मुहैया कराए गए दस्तावेज ही पढ़ें न कि आपके एजेंट द्वारा लाई गई उसकी फोटोकॉपी।

एजेंट अपने दस्तावेजों में गलत गणना, झूठे दावे और फर्जी प्रतिबद्धता दिखा सकते हैं। वह बाजार से जुड़ी एक योजना को पारंपरिक योजना दिखाने के अलावा रिटर्न की गारंटी भी दे सकते हैं।

यह भी सुझाव दिया जाता है कि कोई भी पॉलिसी खरीदने से पहले उसी क्षेत्र की कंपनियों की दो-तीन ऐसी ही योजनाओं का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहिए, जिससे पता चले कि कौन सी कंपनी क्या दे रही है और प्रीमियम व शुल्क में कितना अंतर है।

एक बार आपने तुलना कर ली और एक योजना खरीदने के लिए विचार पक्का कर लिया तो यह सुनिश्चित करें कि प्रपोजल फॉर्म आप खुद ही भरें।

फॉर्म भरते समय पूरी जानकारी सही-सही देना बेहद मायने रखता है। किसी भी छोटी से छोटी बीमारी के बारे में छिपाने या झूठ बोलने से दावों के भुगतान में आगे समस्या हो सकती है।

एजेंट प्रपोजल फॉर्म में गलत पता भी भर सकते हैं। एक मामले में तो एजेंट ने मौजूदा पते में अपना पता और स्थायी पते में ग्राहक का पता लिख दिया था।

इससे यह सुनिश्चित हो गया कि ग्राहक को फ्री-लुक अवधि समाप्त होने के बाद ही उसके बांड के दस्तावेज प्राप्त हुए। इसके अलावा फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से पहले कंपनी के प्रतिनिधि से संपर्क करें और योजना के बारे में कोई शंका है तो उसके बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त कर लें।

निष्कर्ष
आंखें-मूंद कर बीमा एजेंट पर भरोसा करना अच्छा निर्णय नहीं है। मोबाइल फोन खरीदने से लेकर कार खरीदने तक हर फैसला हम बेहद सोच-समझकर और तसल्ली से लेते हैं तो हमें बीमा योजना खरीदने में भी उतना ही वक्त देना चाहिए और दिलचस्पी दिखानी चाहिए।

जिस तरह आप शोरूम में कार दिखाने वाले व्यक्ति की पसंद की कार नहीं खरीदते उसी तरह खुद के लिए बीमा योजना चुनने की जिम्मेदारी बीमा एजेंट को मत दीजिए।
- लेखक पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के मार्केटिंग हेड हैं।

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पिछले हफ्ते आई एक कॉल ने मुझे चिंतित कर दिया। यह ग्राहक एक खास यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) के बारे में विस्तृत जानकारी मांग रहा था।

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