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निवेश की दुनिया में भव‍िष्‍य के बजाय अतीत को देखना ज्‍यादा बड़ी समझदारी है।

बीमा के डिजिटलाइजेशन से ग्राहकों को होगा फायदा

जयंत दुआ | Jan 12, 2013, 01:17AM IST
बीमा के डिजिटलाइजेशन से ग्राहकों को होगा फायदा

डिजिटलाइजेशन के लाभ
पॉलिसी धारकों को पॉलिसी दस्तावेजों को संभालने और उसे सुरक्षित रखने की नहीं रहेगी चिंता
एक साथ सभी पॉलिसियों का मिल पाएगा स्टेटमेंट
सेवाओं में सक्षमता और पारदर्शिता में होगी बढ़ोतरी
बीमा कंपनियों को भी आंकड़े एकत्र करने में मिलेगी मदद जिससे अंडरराइटिंग बेहतर होगी

शेयरों और म्यूचुअल फंडों के इलेक्ट्रॉनिक प्रारुप में सफल स्थानांतरण के बाद अब वित्तीय बाजार के एक और महत्वपूर्ण उपकरण जीवन बीमा की ओर ध्यान देने का समय आ गया है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आइआरडीए) अब डीमैटीरियलाइजेशन के प्रस्ताव के लिए संभवत: तैयार दिखाई दे रहा है।

निश्चित रुप से बीमा पॉलिसी के दस्तावेजों का डीमैटीरियलाइजेशन सभी स्टेकहोल्डर्स को व्यापक लाभ पहुंचाएगा। पॉलिसीधारक बेशक सबसे बड़े लाभार्थी साबित होंगे, क्योंकि उन्हें अपनी पॉलिसी से संबंधित दस्तावेजों को भौतिक रुप में सुरक्षित रखने की आवश्यकता नहीं होगी।

उनका दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में आ जायेगा। पॉलिसी धारक अपने सभी जीवन बीमा खरीदारियों पर एक सिंगल रेफरेंस प्वाइंट का लाभ भी उठा सकेंगे। यह कंसोलिडेटेड म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट के पक्ष में भी है, जो सभी म्यूचुअल फंड्स में बीमा संबंधी विवरणों को प्रदर्शित करता है।

यह पॉलिसी धारकों के बोझ को कम करता है, जो विभिन्न प्रकार की पॉलिसियों की तलाश में समय और प्रयास बर्बाद करते हैं, खासकर प्रीमियम के भुगतान के समय। इसी प्रकार यह परिवार के सदस्यों को भी काफी राहत पहुंचाएगा, जो आपातकालीन स्थिति में एक स्थान से दूसरे स्थान पर भाग-दौड़ करने के लिये विवश हो जाते हैं।

पॉलिसी धारकों के लिये अन्य सुविधा कस्टमर केयर पर दिया जाने वाला ध्यान है। एक बार जब डीमैट प्रक्रिया पूर्ण हो जायेगी तो स्पष्ट रुप से इंश्योरेंस रिपोजिटरीज कस्टमर केयर की भूमिका को संभाल लेंगे, क्योंकि वे महज इलेक्ट्रॉनिक डाटा के आपूर्तिकर्ता बने रहने के अलावा सेवा संबंधी निवेदनों में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगे।


बीमा दस्तावेजों का डीमैट पॉलिसी की डिलीवरी से संबंधित लॉजिस्टिक्स जैसी समस्याओं का समाधान भी करेगा, खासकर दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले ग्राहकों के लिये यह बहुत उपयोगी है।

इस सुविधा के माध्यम से पॉलिसी ग्राहक के इलेक्ट्रॉनिक बीमा खाते में क्रेडिट कर दी जाएगी, बिलकुल उसी तरह जैसे पास-बुक में एंट्री की जाती है। साक्ष्य के तौर पर यदि देखा जाये तो बीमा पॉलिसियों का डिजिटलाइजेशन कुछ ऐसे लाभों को भी ले कर आएगा जो शेयर बाजार जैसे वित्तीय क्षेत्र में इस प्रक्रिया को अपनाने के बाद उठा रहे हैं। इसलिए पॉलिसी धारक सेवाओं में सक्षमता एवं पारदर्शिता की आशा कर सकते हैं।

बीमा कंपनियों के लिए डिजिटलाइजेशन परिचालन को सरल एवं प्रभावी बनाता है। यह बेहतर अंडरराइटिंग का मार्ग भी प्रशस्त करता है, क्योंकि इसके जरिए आंकड़ों को और अधिक प्रभावी तरीके से एकत्रित करने में मदद मिलती है। इसके अतिरिक्त ग्राहक बेहतर गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट की आशा भी कर सकते हैं।

आइआरडीए के लिये डिजिटलाइजेशन बीमाकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले डिजिटलाइज्ड आंकड़ों के आधार पर इस उद्योग जगत के रुझानों को और अधिक आसानी से चिन्हित करने में सहायता करेगा। इस प्रकार यह विनियामक को सुधारों को अपनाने एवं सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों के उपयोग की दिशा में सहायता करेगा तथा साथ ही इसकी निगरानी संबंधी भूमिका को बढ़ा कर अनियमितताओं को दूर करने में भी मददगार सिद्ध होगा।

डिजिटलाइजेशन के बाद उन पॉलिसी धारकों को लाभ होगा, जिन्होंने डीमैट प्रारुप को अपनाया है। ऐसे ग्राहक जो कागजी प्रारुप में पॉलिसियों को बरकरार रखे हैं, उन्हें परंपरागत सुविधाएं मिलती रहेंगी। यह ठीक उसी प्रकार की स्थिति है-जैसे शेयर बाजार में वही लोग डीमैट के लाभों को प्राप्त करते हैं, जिनके पास डीमैट शेयर होते हैं।

बीमा के संदर्भ में पॉलिसी धारक के पास यह विकल्प रहेगा कि वह अपनी इच्छानुसार या तो मौजूदा प्रारुप पर कायम रहे या फिर इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप को अपनाए। इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप को चयनित करने के बाद भी वे भौतिक स्वरूप की तरफ मुखातिब हो सकते हैं। इस प्रकार जीवन बीमा उद्योग के लिये डीमैट प्रस्ताव में स्वीकार योग्य लचीलापन बरकरार रहता है।

डीमैट के रूप में बीमा पॉलिसी एजेंटों के लिए भी अच्छा है, जो ग्राहक के निवेदन पर सेवा प्रदान करने के लिये इंश्योरेंस रिपोजिटरी की सहायता प्राप्त कर सकेंगे। चूंकि रिपोजिटरीज ग्राहक सेवा कार्यों को साझा करते हैं, इसलिए एजेंटों को ग्राहक परामर्श के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।

उद्योग जगत के विभिन्न प्रतिभागी एवं रिपोजिटरीज प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने तथा इस नये उद्योग पहल से संबंधित चुनौतियों से मुकाबला करने के लिये एक साथ मिल कर कार्य कर रहे हैं।
- लेखक बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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