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कोल ब्लॉक संबंधी 50 दस्तावेज सीबीआई को शीघ्र : जायसवाल

एस.के. सिंह और राजीव कुमार | Feb 23, 2013, 01:37AM IST
कोल ब्लॉक संबंधी 50 दस्तावेज सीबीआई को शीघ्र : जायसवाल

कोल ब्लॉक आवंटन मामले की जांच के सिलसिले में हाल ही सीबीआई का बयान आया कि कोयला मंत्रालय की तरफ से कागजात उपलब्ध कराने में देरी की जा रही है। लेकिन कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का कहना है कि यूपीए कार्यकाल के सभी कागजात जांच एजेंसी को सौंप दिए गए हैं। जो कागजात बाकी हैं वे 2004 से पहले के हैं और उन्हें भी ढूढा जा रहा है। बिजनेस भास्कर के एस.के. सिंह और राजीव कुमार के साथ बातचीत में सीबीआई के बयान के अलावा प्राइस पूलिंग, कोयला उत्पादन, कोल रेगुलेटर जैसे मसलों पर अपनी बेबाक राय रखी। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश -

सीबीआई कह रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की जांच में उन्हें कोयला मंत्रालय की तरफ से कई पेपर देने में देर की जा रही है, हकीकत क्या है?
- सच्चाई यह है कि सरकार की तरफ से किसी पेपर को छिपाने या देरी करने का कोई औचित्य नहीं है। हम आपको बता दें कि वर्ष 2004 के बाद आवंटित कोयला ब्लॉक से जुड़ा कोई भी पेपर सीबीआई को देने के लिए नहीं बचा है। वर्ष 1993-2004 के बीच के जो आवंटन हुए थे, उनके पेपर खोजने में समय लगा है और अब जो मिल गए हैं उन्हें हम सीबीआई को सौंप रहे हैं। लगभग 50 दस्तावेज उन्हें सौंपे जा रहे हैं। सीबीआई को कागजात मुहैया कराने के लिए संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को जिम्मा दिया गया है।   

कोल रेगुलेटर बिल पर क्या प्रगति है?
- इस बिल के एक-दो प्वाइंट पर चर्चा बाकी है जो अगली मीटिंग में संभवत: पूरी हो जाएगी। पिछले सप्ताह ही इस पर बने जीओएम की बैठक होनी थी। लेकिन किसी सदस्य की गैरमौजूदगी के कारण नहीं हो पाई। मुख्य रूप से इस बात पर सहमति बननी है कि रेगुलेटर को कितनी जिम्मेदारी दी जाए, कितने अधिकार दिए जाएं।

चालू वित्त वर्ष में कोल इंडिया क्या अपना लक्ष्य हासिल कर लेगी?
- योजना आयोग ने जो लक्ष्य तय किया है वह कोल इंडिया हासिल कर लेगी। अभी दो दिनों की जो महा-हड़ताल रही उसमें कोल इंडिया को 12.5 लाख टन कोयले के उत्पादन का नुकसान हुआ। यह नुकसान अचानक हुआ है।

कोल इंडिया की रिस्ट्रक्चरिंग कैसे कर रहे हैं? इसे विभाजित किया जाएगा या कोई और योजना है?
उत्तर : योजना आयोग ने इसका आइडिया दिया था। यह प्लानिंग अभी शुरूआती स्तर पर है। रिस्ट्रक्चरिंग को लेकर प्लान मंगाया गया है। उनमें से कौन सा प्लान सही है, फाइनल होने पर ही बता सकते हैं। इसके अलावा इतनी सारी यूनियन हैं, वे प्लान को स्वीकार करती हैं या नहीं, यह भी देखना होगा। फिर संसद में बिल आएगा। एक लंबी प्रक्रिया है यह सब।  

प्राइस पूलिंग पर कई राज्य विरोध कर रहे हैं, उनका कहना है कि इससे निजी बिजली कंपनियों को फायदा होगा, आपका क्या कहना है?
- जो विरोध कर रहे हैं उन्होंने इसका अध्ययन ही नहीं किया है। प्राइस पूलिंग वर्ष 2009 से पहले के पावर प्लांट पर लागू नहीं होगा, किसी ने यह नहीं देखा। प्राइस पूलिंग के हिसाब से कोयला दिया जाएगा तो लागत कम होगी। इससे सरकारी कंपनियों को भी फायदा होगा।

मोजाम्बिक में कोल इंडिया ने दो कोयला ब्लॉक लिए थे, क्या स्थिति है उन ब्लॉक की?  
-उन ब्लॉक में ड्रिलिंग का टेंडर जारी कर दिया गया है। जब यह आश्वस्त हो जाएगा कि इन ब्लॉक में इतना कोयला है तो फिर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। वैसे भी किसी भी ब्लॉक से उत्पादन में पांच-छह साल का समय लगता है। आने वाले समय में कोयले की जरूरत बढ़ेगी ही, ऐसे में इस प्रकार की कोयला प्रॉपर्टी को रखने में फायदा ही है।

कैबिनेट कमेटी ऑन इंवेस्टमेंट (सीसीआई) में रेलवे प्रोजेक्ट का क्या हुआ ?
- कोल इंडिया और रेलवे के संयुक्त प्रयास से पूरी की जाने वाली तीन परियोजनाएं थीं, तीनों को सीसीआई की मंजूरी मिल गई। चार कोयला ब्लॉक को भी मंजूरी दी गई। अन्य ब्लॉक के मामले में कहा गया कि कोयला, बिजली व पर्यावरण सचिव हर विवाद पर निपटारा करके उसे फिर से सीसीआई में पेश करेंगे।

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