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Henry Ford
ऐसा कारोबार जो सिर्फ पैसा बनाए,वह बेकार है।
अनार की मिश्रित खेती से कई साल आय
कुछ माह बाद खरीफ की बुवाई शुरू होने वाली है। अनुसंधानों में यह बात सामने आई है कि अगर किसान खरीफ की फसलों के साथ इंटरक्रॉपिंग सिस्टम में दूसरी फसलें भी उगाएं तो जमीन की उर्वरा शक्ति बेहतर रहती है। इससे ज्यादा आमदनी होगी।

कृषि वैज्ञानिक किसानों को मल्टी क्रापिंग यानि एक साथ दो या इससे अधिक फसलें उगाने की सलाह दे रहे हैं। इस कवायद का उद्देश्य परंपरागत खेती को बढ़ावा देना और जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाना है। वैसे भी अब तक के अनुसंधानों से यह साबित हो चुका है कि हर साल एक ही फसल की बुवाई घातक होती है। इसके मद्देनजर आगामी खरीफ सीजन के दौरान दूसरी फसलों के साथ अनार की भी खेती की सकती हैं। इससे अतिरिक्त आमदनी का जरिया तो बनेगा ही, जमीन की उर्वरा शक्ति में भी सुधार होगा। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण तथ्य है कि काश्तकारों के लिए खेती आज भी निश्चित आय का साधन नहीं बन पाया है। कभी मौसम की मार से पैदावार घट जाती है तो कभी अधिक उत्पादन के कारण बाजार में दाम जमीन पर पहुंच जाते हैं। ऐसे में थोड़ा व्यवसायिक नजरिया अपनाते हुए खेत के एक हिस्से में फलों के पौधे लगाना एक बेहतर सोच साबित हो सकती है। मसलन पांच हैक्टेयर के खेत में एक हैक्टेयर में फल के पौधे लगाकर कई सालों तक कमाई की जा सकती है। चूंकि आगामी सीजन खरीफ का है और अनार के पौधों को अगस्त में लगाया जा सकता है। ऐसे में नई विधि के साथ अनार के पौधे लगाकर मुनाफा और बढ़ाया जा सकता है।

अनार की पैदावार
अनार का पौधा तीन-चार साल में पेड़ बनकर फल देने लगता है और एक पेड़ करीब 25 वर्ष तक फल देता है। साथ ही अब तक के अनुसंधान के मुताबिक प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए अगर दो पौधों के बीच की दूरी को कम कर दिया जाए तो प्रति पेड़ पैदावार पर कोई असर नहीं पड़ता है। लेकिन ज्यादा पेड़ होने के कारण प्रति हैक्टेयर उत्पादन करीब डेढ़ गुना हो जाता है। परंपरागत तरीके से अनार के पौधों की रोपाई करने पर एक हैक्टेयर में 400 पौधे ही लग पाते हैं जबकि नए अनुसंधान के अनुसार पांच गुणा तीन मीटर में अनार के पौधों की रोपाई की जाए तो पौधों के फलने-फूलने पर कोई असर नहीं पड़ेगा और एक हैक्टेयर में छह सौ पौधे लगने से पैदावार डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगी।

एक पौधे से कितने फल
एक सीजन में एक पौधे से लगभग 80 किलो फल मिलते हैं। इस हिसाब से बीच की दूरी कम करके पौधे लगाने से प्रति हैक्टेयर 4800 क्विंटल तक फल मिल जाते हैं। इस हिसाब से एक हैक्टेयर से आठ-दस लाख रुपये सालाना आय हो सकती है। लागत निकालने के बाद भी लाभ आकर्षक रहेगा। नई विधि को काम लेने से खाद व उर्वरक की लागत में महज 15 से 20त्न की बढ़ोतरी होती है जबकि पैदावार म्क् फीसदी बढ़ने के अलावा दूसरे नुकसानों से भी बचाव होता है। पौधों के बीच की दूरी कम होने से माइक्रोक्लाइमेट के कारण तेज गर्मी और ठंडक दोनों से पौधों का बचाव होने के साथ बर्ड डेमेज यानि पक्षियों से फलों को होने वाला नुकसान भी कम हो जाता है। राजस्थान के कुछ किसानों ने इस विधि को अपनाकर देखा है। इसके बेहतर परिणाम मिले हैं। अनार के पौधों को लगाने का सही समय अगस्त या फरवरी-मार्च होता है। ऐसे में खरीफ सीजन के दौरान अगस्त में अनार के पौधों की रोपाई करते हैं तो तीन-चार साल बाद पेडों पर फल देना शुरू कर देंगे और एक बार निवेश का लाभ कई सालों तक मिलता रहेगा।

रोगों से बचाव का तरीका
अनार के पौधों में फल छेदक और पौधों को सड़ाने वाले कीड़े लगने का खतरा रहता है। इसके लिए कीटनाशक के छिड़काव के साथ पौधे के आसपास साफ-सफाई रखने से भी कीड़ो से बचाव होता है। अनार के पौधों के लिए गर्मियों का मौसम तो प्रतिकूल नहीं होता, लेकिन सर्दियों में पाले से पौधों को बचाने के लिए गंधक का तेजाब छिड़कते रहना जरूरी है। नियमित रूप से पानी देने से पाले से बचाव होने से पौधे जलने से बच जाते हैं। सर्दी के मौसम में फलों के फटने की आशंका ज्यादा होती है। इसलिए पौधों का सर्दी से बचाव करके फलों को बचाया जा सकता है। इस तरह खरीफ में दूसरी फसल के साथ अनार के पौधे लगाकर किसान कमाई का एक अतिरिक्त जरिया तैयार कर सकता है। डॉ. एस. मुखर्जी दुर्गापुरा कृषि अनुसंधान केंद्र, जयपुर
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